गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जब से प्यार के सिलसिलो का इंतकाल हो गया तब से नफरतो का सिलसिला कमाल हो गया। रखते थे ख्याल अनजान का भी,जां लुटाके खुद की अब तो भाई का भी भाई ,दुश्मन कमाल हो गया। बच्चे होने पर थाली लोटे बजवा लेते थे,खुश होकर अब तो मैरिजएनिवर्सरी में आर्केस्ट्रा का धमाल होगया। पहले अलाव […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

मदीना वाले तेरा ये जो चेहरा साथ जन्मों का लगता है गहरा। यो न टुकड़े करो मेरे दिल के दिल घरोने में महबूब ठहरा। इतनी मिन्नत से आया है दर पे हो न जाए कोई घाव गहरा। मैंने सजदे किये थे मोहम्मद तब कही जाके दीदार चेहरा। बस दुआ तेरी काफी है मुझको अब नही […]

गीतिका/ग़ज़ल

देश प्रेम

खंड खंड मैं उसको कर दूँ खाल उडेढ़ के भुस मैं भर दूँ। नजर उठाये यदि भारत पर शीश काट के हाथ पे धर दूँ। गद्दारी तेरे खून में बसती वफ़ा की रश्में कैसे कर दूँ। न कर कत्ले ,इधर से हट ले बीच बजार सिर मुंडन कर दूँ। नियत खोर कश्मीर को मांगे नही […]

कविता

प्यारी माँ

तीरथ  माँ  बाप  को कभी  करा न सका कभी श्रवण  कुमार  कहला न सका। छाती  सुखा ली उसने मुझे पिलाकर मैं बकरी का दूध भी  दिला  न सका। गीले  बिस्तर  पर करवटे ली रात भर मैं टूटी  खाट भी  उसे सुला न  सका। भूखी  रहकर  मुझे  खिलाये  व्यंजन मैं उसे जी भरके भी अफरा न […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

प्रेम तेरा सच्चा है दिल मेरा बच्चा है प्यार की कसोटी में अभी जरा कच्चा है। वेवफाई की नही वो नियत का सच्चा है नफरतो से कोसो दूर हालातो का गुच्छा है। रखता है मान सभी इतना न वो टुच्चा है करता न भेद कभी चरित्र से न लुच्चा है। पीपल का पत्ता नही हाल […]

कविता

कविता : भ्रम

इन्सान जब करता है मिसयूज़। भगवन भी सब देख के होता है कन्फ्यूज़। कभी बने बो लखपति कभी रहे बिन शूज़। भगवन भी सब देख के होता है कन्फ्यूज़। कभी बने वो आज्ञाकारी कभी डिक्टेटर यूज़। भगवन भी सब देख के होता है कन्फ्यूज़। कभी बने वो ब्रह्मचारी कभी करेक्टर लूज़। भगवन भी सब देख […]

कविता

कविता : शील भंग

वाह   रे     शैतान    तूने   ऐसा    खेल    खेला, भारत   में  ब्यभिचारियो  का लगा दिया  मेला। दिखने में अल्हड फूल सा अवयस्क सा भोला करतूते   इतनी  काली  भीतर   से   था  शोला। न   देखी  बहिन  बेटी  औरत  समझ के खेला उडा दो   बीच   बाजार   इनके  सर  का भेला। बैठाओ  इनको  गधे पर सिर मुंडन मुह काला फांसी दो […]

गीत/नवगीत

गीत : पुलिस

देश भक्ति जन सेवा मन में देश का जज्बा भरा है तन में। चौवीस घंटे काम  करत है रात को ना आराम करत है। फिर वर्दी पे दाग क्यों गहरा…… तनख्वाह थोड़ी खर्चे ज्यादा इनकी कमाई के चर्चे ज्यादा। शिक्षा में भी अब्बल आते देश भक्त वो है कहलाते। फिर क्यों जीवन नही सुनहरा…. सभी […]

कविता

कविता : दीवाली में दीप अली के रमजानो में राम

दीवाली में दीप अली के रमजानो में राम इतना सुंदर भाई चारा क्यों करते बदनाम। कहने को तो भेष अलग है देह सभी की आम हिन्दू घर में अल्ला बसते मुस्लिम घर में श्याम। फिर क्यों हम सब करे बटवारा ये दाया ये वाम सूरज, चन्दा, पहाड़, नदिया, सागर सबके नाम। रेलगाडी, बस और हवाई […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : वो रोती रही मैं आंख मलता रहा

वो रोती रही मैं आंख मलता रहा वो सिसकती रही मैं चलता रहा। हाथ रोके न उसने सब कुछ सहा पर अधरों से उसने न कुछ कहा। आँख उसकी, हथेली मेरी नम हुई मैं कटा वृक्ष सा, जब उस पर ढहा। फिर लिपटी वो ऐसी, मेरी बाजुए गिला अपनी बताते हुए जब कहा। हाल उसका […]