मुक्तक/दोहा

मुक्तक

१) वक़्त  कहाँ  लगता  है, दूरियां  बढ़ाने  में । ज़िंदगी गुज़र जाती है, फ़ासले  मिटाने में ।। नफ़रत सभी समझते हैं ना बोलने पर भी । वक़्त  केवल  लगता  है  प्यार  जताने  में ।। २) मोहब्बत अपनी कुछ इस कदर निभा रहे हैं । लाख  सितम  सहकर उनके, मुस्कुरा  रहे हैं ।। तार टूटे  सभी […]

मुक्तक/दोहा

कोरोना प्राणघातक है ।

कुछ मुक्तक १) कोरोना प्राण घातक है, चलो यह जानते हैं सब । दवा  कोई नहीं  इसकी, चलो यह मानते हैं सब ।। सजग हो राष्ट्र की जनता,कोरोना को भगाए गी । सुरक्षा हो नियति अपनी,चलो यह ठानते हैं सब ।। २) जलबा एक जुटता का, दिखाना है बहुत लाजिम । समर्पित राष्ट्र हित में […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

१) आंधियों को चीरकर बढ़ना है तुझको । नित नया इतिहास फिर गढ़ना है तुझको ।। आग के दरिया को कब किसने रोका है । पाषाण हैं रहें कठिन चढ़ना है तुझको ।। २) ना वेद जानती हूं, ना कुरान जानती । ना हीं कोई में विश्व का, विधान जानती ।। माता-पिता हीं ऐसे हैं,मेरे […]

कविता

कविता

चंद पंक्तियाँ राष्ट्र हित में, उन समस्त दंगाइयों को एक संदेश जो राष्ट्र में दंगे करवाते हैं,चाहे वह महिला हों या पुरुष । हर वादे पूरे करते हैं, बातों के बिल्कुल सच्चे हैं । मूर्ख समझते हैं हमको,अफसोस अभी तक बच्चे हैं ।। झूठ अभी तक फितरत में, वो राष्ट्रद्रोह कर जाते हैं । जो […]

मुक्तक/दोहा

कुछ मुक्तक।

१) जो पीकर आंसुओं को भी, स्वयं हीं मुस्कुराती हैं । करें बलिदान इच्छा सब, न जाने सुख, क्या पाती हैं ।। हर एक चौखट की मर्यादा है,जिनके अपने हाथों में । वो रणचंडी, भवानी हीं, यहां नारी कहाती हैं ।। “दीपक्रांति” अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ । २) समरसता का भाव […]

गीत/नवगीत

गीत

इक बनाके ग़ज़ल तुझको हम गाएंगे । छोंड़ करके शहर तेरा हम जाएंगे ।। कर ले दो चार प्यारी मधुर कोई बात । फिर ना आऐगी ऐसी सुहानी सी रात ।। दूर रह के भी नज़दीक हम पाएंगे । छोड़ कर के शहर तेरा हम जाएंगे ।। प्यार मे यूँ बिछड़ना ज़रूरी भी है । […]

कविता

घर की बिटिया!

घर की बिटिया, रही सिसकती, हैं मंत्री, नेता मस्त यहां। नोच रहे हैं जिस्म भेड़िए, सब के सब हैं व्यस्त यहां।। आन बचा ना सके, जो घर की, लंबे भाषण झोंक रहें। बनकर दर्शक, तुम, ना मर्दों ! सुनकर ताली ठोक रहे।। क्या बची ना ताकत संविधान में,घर की लाज बचाने को। निपटारा हो तुरंत […]

गीतिका/ग़ज़ल

हिन्दी कविता

यह जो तस्वीरें मैं यादों के रूप में, हर पल दिल से संभालती रही हूं। जख्मों को मैं मिटाती नहीं कभी,नासूर बन्ने तक पालती रही हूं। बेशक मुझे पता है हर पल,आज मेरा वक्त खराब चल रहा है साहेब। अपने हर अच्छे वक्त के इंतजा़र में,बुरे लम्हों को मुस्का के टालती रही हूं, कचरा कहते […]

कविता

मैं मंजिल हूँ तुम्हारी

मैं मंजिल हूँ तुम्हारी,ये सच है, इसे तुम मान लो, मैं पहली और आखरी ख्वाइश हूँ,तुम्हारी,जान लो, मैं तुम्हारी ताकत हूँ,ताकत और हौंसला भी, किसी भी कसौटी में परख कर, इसे मान लो, नाराजगी,झगड़े,और दूरियाँ ना टिकेंगी हमरे बीच, अधूरे हो मेरे बिन तुम,हकीकत है इसे पहचान लो, सच्चे प्यार की ताकत को वक्त रहते […]

कविता

तू जब शहर में होता है

तू जब शहर में होता है, यह शहर भी अच्छा लगता है। झूठे तेरे वादे झूठे, फिर भी तू सच्चा लगता है। करूंँ ठिठोली संग तेरे मैं, यह मन बच्चा लगता है। तू जब शहर में होता है, यह शहर भी अच्छा लगता है जब दूर तू मुझसे होता है, यह मन बच्चों सा रोता […]