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  • गजल

    गजल

    सरकारी फाईलें है कि बिना नोट के हिलती नहीं बेचारे गरीब आदमी की दाल है कि कभी गलती नहीं खाने वालों के आगे ईमानदारी ज्यादा चलती नहीं हौंसलें उनके बड़े बुलंद है सरकार है कि कुछ...



  • प्यार का पैमाना

    प्यार का पैमाना

    भूखी आंखें देखती है हुस्न की बनावट इंच-इंच सेंटीमीटर-सेंटीमीटर कुरेदती है सौंदर्य की शक्ल पर अनगिनत निशान मर्द का प्यार भी व्योम में छाये मेघ की भांति जगाता है उमंग रातभर बरसकर थककर बुस जाती है...

  • पाजेब 

    पाजेब 

    जब खनकती थी तेरे पांव की पाजेब तो लगता था मुझे जैसे दिल के गर्भगृह में किसी ने छिड़क दिया हो गंगाजल और मिट गये हो सारे पाप और धुल गया हो सांसर सागर की द्वेष...

  • जब दिन ढले 

    रक्त लालिमा के भाल पटल पर सिन्दूरी स्वप्न के अनगिनत दीप लह – लह कर जले जब दिन ढले शांत नभ के आगोश में शीत समीर के झोंके करे स्मृतियों का बिंब सृजन तम की गुफाओं...



  • सावन फिर से अइयो रे

    सावन फिर से अइयो रे

    सावन का महीना दस्तक दे चुका है। चहुंओर फैली हरितिमा की चादर ने धरती की कोख को हरा-भरा कर दिया है। गांव में जगह-जगह पेड़ की टहनियों पर झूलों का लुफ्त उठाती लड़कियों को देख विश्वास...