लघुकथा

भूख

बाहर गली से एक आवाज आई – ”माई” कुछ खाने को मिलेगा ? बूढी माई ने ”रसोई घर” से रात की बची ”बासी रोटीयां” उठाई और भिखारी को देने के लिए ”हाथ” बाहर निकाला ही था, कि पता नहीं क्यों, अचानक ”माई” ने हाथ रोक लिया और उससे पूछा :- भाई तुम कौन हो ! […]

कविता

‘मोदी सूट’ की सच्ची कहानी

स्वर्ण मुकुट में हीरे-मोती, दलित बहिन जी को भाते। आजम खान मुलायम खातिर लन्दन से बग्घी लाते।। सुम्मी रेड्डी जा तिरुपति में सोना अतुल चढ़ाता है। लालू के ‘दामाद- तिलक’ पर खर्च करोड़ों आता है।। पञ्च सितारा होटल में आफिस थरूर का चलता था। ए. राजा के कमरे में सोने का दीपक जलता था।। दत्त […]

सामाजिक

कडवा सत्य

कडवा सत्य “”विहिप और आरएसएस ने कुछ नहीं किया”” बेटी को पैदा कर के बाप ने सलमान और शाहरुख के झूठे एक्सन दिखाए फिर जिस दिन वो किसी मलेक्ष वंशी के साथ भाग गयी उस दिन वो कुत्ता बोलता है की —- *विहिप और आर एस एस ने कुछ नही किया** भाई ने शाम को […]

राजनीति

दिल्ली में अराजकता की जीत

दिल्ली के नतीजों से एक बात तो साफ है कि आज भी गुलामी की मानसिकता लोगो के मन में भरी हुई है l कुछ मुफ्त कि चीजों के बदले लोग अपना भविष्य भी दांव पर लगा देते हैं l लोगों ने किरण बेदी जैसे इमानदार प्रत्याशी को भी हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी l […]

हास्य व्यंग्य

नाम कुछ है और काम कुछ और है

आज का दौर यही है नाम कुछ है और काम कुछ और है – मिस्टर दानी ने एक फूटी कौडी दान में नहीं दी और दूल्हे जान ने जिंदगी भर शादी नहीं की एक घर में छोटूराम सबसे बड़े भाई हैं उनकी पत्नी का नाम छुट्टो है पर उसकी साढ़े छ्ह फुट लंबाई है “दर्शन […]

लघुकथा

ज़िंदगी जीने की सीख

माँ ने एक शाम दिनभर की लम्बी थकान एवं काम के बाद जब डिनर बनाया तो उन्होंने पापा के सामने एक प्लेट सब्जी और एक जली हुई रोटी परोसी। मूझे लग रहा था कि इस जली हुई रोटी पर पापा कुछ कहेंगे, परन्तु पापा ने उस रोटी को आराम से खा लिया । हांलांकि मैंने […]

कविता

माँ तुम बहुत याद आती हो

माँ तुम बहुत याद आती हो वो प्यार से सिर पर हाथ फेरकर सुबह सुबह जगाना वो स्कूल के लिये तैयार करके जल्दी से नाश्ता कराना स्कूल से वापस आने तक हमारा इंतज़ार करना हमारे स्कूल से आते ही आपकी आखों का चमक उठना स्कूल में देर हो जाने पर आप बहुत डर जाती हो […]

सामाजिक

ये कैसी न्याय व्यवस्था ?

संत रामपाल की गिरफ्तारी के लिये सुप्रीम कोर्ट की राज्य सरकार को फटकार l संत रामपाल जैसे तथाकथित संतों को सजा मिलनी ही चाहिये, हम सब यही चाहते हैं l लेकिन यही सुप्रीम कोर्ट इमाम बुखारी के मामले में क्यों चुप्पी साध लेती है ? उसके खिलाफ भी तो सैकडों वारंट जारी हो चुके हैं […]

कविता सामाजिक

ज़िंदगी की हकीकत

एक कमरा था जिसमें रहता था मैं माँ-बाप के संग फिर विकास का फैलाव आया विकास उस कमरे में नहीं समा पाया जो चादर पूरे परिवार के लिए बड़ी पड़ती थी उस चादर से बड़े हो गए हमारे हर एक के पाँव लोग झूठ कहते हैं कि दीवारों में दरारें पड़ती हैं हक़ीक़त यह है […]

सामाजिक

देश की न्याय व्यवस्था

आखिर ”वही” हुआ जो होना ”तय” था ! ”जयललिता” जेल से ”रिहा” हो गई ? क्योंकि एक ” बड़ी अदालत ” को अपने से ”छोटी अदालत” पर ”विश्वास” नहीं है. जिस ”जज” ने ”चार साल” की कैद और 100 करोड़ का ”जुर्माना” लगाया है क्या उसमे ‘काबलियत’ नहीं थी, हैसियत नहीं थी या उस ने ”पक्षपात” किया था ! […]