राजनीति

हिन्दू समाज पार्टी की बैठक

दिनांक २२ सितंबर २०१९, दिन रविवार को हिन्दू समाज पार्टी की बैठक सनातन गौ आश्रम भोईदापाड़ा, वसई पूर्व में आयोजित की गई। जिसमें सैकड़ों की संख्या में सनातन धर्म के जागृत हिन्दू भाइयों ने हिस्सा लिया। पार्टी में मुख्य अतिथि श्री अजय सिंह सेंगर महाराष्ट्र प्रदेश प्रभारी हिन्दू समाज पार्टी रहे। हिन्दू समाज पार्टी के […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मीरा बाबा (जेन खां) आज भी बैठे हैं हिन्दू मंदिरों में भगवान् बनकर!

हजारों वर्षों से सनातन को नष्ट करने की परम्परा चली आ रही है. पूरी दुनिया जानती है जब से दो धर्मों (पंथों) इस्लाम और ईसाईयों का उदय हुवा है तब से ही सनातन धर्म का सबसे अधिक अहित किया जा रहा है. लाखों मंदिर तोड़े गए करोड़ों लोगों को काटा गया. करोड़ों को अपने मजहब में […]

कविता

विकास नहीं, एक और पाकिस्तान बनाना है! 

जो देश तोड़ कर ले गये थे और पाकिस्तान बना डाले। वो चमड़ी के बेशक गौरे हों, लेकिन हैं दिल के काले।। जिन्हें बहन, बेटियों, माता में कोई फर्क नजर नहीं आता। बस हवस उनकी बुझ जाये, ताक धरा है हर नाता।। जिनको अपनी बहन, बेटियों में भी बेगम दिखती हो। जहां औरतों की इज्जत […]

राजनीति

कट्टरपंथी दे रहे हैं सरकार को चुनौतियां!

कट्टरपंथी दे रहे हैं योगी सरकार को चुनौतियां! जिनके लिए धर्म और उनकी कुरुतियां ही राष्ट्रीय से ऊपर हो वो भला कैसे राष्ट्रीय का और कानून का सम्मान करेंगे.  उनको तो मात्र सरकार की सुविधाओं का फ़ायदा लेना है. उनको बाकि किसी से कोई लेना देना नहीं है. कट्टरपंथियों को सरकारी नौकरी दे दो. हज […]

राजनीति लेख

शांतिप्रियों का शांति पाठ अब भारत में भी शुरू

शांतिप्रिय धर्म की जनसंख्या जैसे-जैसे बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे ही शांति स्थापित होने का खतरा दुनिया पर मंडराता जा रहा है और भगवा को आतंकी सिद्ध करने का पुरजोर प्रयत्न किया जा रहा है। भारत भले ही रात दिन पाकिस्तान को अपनी दुर्दशा के लिए कोष रहा है मगर बिमारी बाहर नहीं अंदर है। […]

कविता

भारत के सपूतों की ललकार !

हां पाला है सांपों को मैंने, दंश भी मैंने झैले हैं। मेरी ही छाती पर हरदम क्यों दुश्मन के मैले हैं। जिनके 56 देश बसे हैं, वो मेरे घर क्यों आते हैं? आकर मेरी धरती पर क्यों अपनी नाक कटाते हैं? देश को असहिष्णु कहने वाले, क्यों अपने घर ना जाते हैं? अब में भगवा […]

अन्य

देशभक्त नहीं हो सकते!

रात दिन राष्ट्रीय के विरोध में खड़े लोग देशभक्त नहीं हो सकते! वो राष्ट्रीय में पल रहे शत्रु हैं, जो बाहरी शत्रुओं से भी ज्यादा घातक हैं! इनका शर्वनाश करना अति आवश्यक है नहीं तो ये दीमक की भांति राष्ट्रीय को खा जायेंगे!

कविता

पता नहीं क्यों?

पता नहीं क्यों तुमको सेना पर पत्थर मरने वाले भटके नौजवान लगते हैं. पता नहीं क्यों तुमको भारत तेरे टुकड़े होंगे बोलने वाले देश प्रेमी लगते हैं. पता नहीं क्यों तुमको राष्ट्रीयगान ना गाने वाले देश के वाशी लगते हैं. पता नहीं क्यों तुमको राम के सबूत मांगने वाले भारत वाशी लगते हैं. पता नहीं […]

कविता

सत्य वचन

जिन राजाओं की संधि राष्ट्रीय के शत्रुओं के साथ हो गई हो, वो राजा राष्ट्रीय के बाहरी शत्रुओं से कहीं ज्यादा घातक हैं. ऐसे राजाओ को जनता को तुरंत निष्काषित कर देना चाहिए. क्योंकि वो राष्ट्रीय के दुश्मनों के साथी हो चले हैं और जब राष्ट्रीय पर आपत्ति आएगी तो वो बाहरी दुश्मन से अधिक […]

कविता

अपने ही देश में मैं बार-बार मरा हूँ

मुझे तुमने देश की रक्षा का भार दिया है, मैं बन्दुक लिए सीमा पर खड़ा हूँ. कोई दुश्मन तुम्हारी ओर ना ताके मैं इस निश्चय पे अड़ा हूँ! मगर तुमने तो पीछे से मुझे ही पत्थर मार दिए मैं ही तुम्हारी रक्षा में तुम्हारी हाथो ही मरा हूँ. अब समझ नहीं आता रक्षा तुम्हारी दुश्मन […]