गीतिका/ग़ज़ल

देश प्रेम

देश प्रेम की सभी बच्चों में आग तो देखो। देश प्रेम की कभी बजाकर राग तो देखो।। हर तरफ लगी है होड़ सत्ता हथियाने की । कौन कर रहा शतरंजी गुणा भाग तो देखो।। किस पर करे यकीं किस पर रखे भरोसा । आस्तीनों में पल रहे विषैले नाग तो देखो।। देश सेवा के नाम […]

गीतिका/ग़ज़ल

जाने कहाँ गायब हो गई इंसानियत।।

होती है खूब देखकर अब हैरानियत जाने कहाँ गायब हो गई इंसानियत।। व्याकुल है मन बहुत,बेदर्द ज़माने से कोई तो लौटाये दिलो में मासूमियत।। प्रेम स्नेह अनुराग अपनत्व को समझे ढूंढ रहा हूँ मैं तो अब ऐसी शख्शियत।। इंसान बोले दो मीठे बोल है ये काफी इसी में तो छिपा है सार असलियत।। धन दौलत […]

गीतिका/ग़ज़ल

मुस्कराते चेहरे पर स्वीकार पढ़ लिया

मुस्कराते चेहरे पर स्वीकार पढ़ लिया यूँ लगा मानो मेरा अधिकार पढ़ लिया || लब कभी जो कह न पाए तुम्हारे पर खूबसूरत नजरो में इकरार पढ़ लिया || तुम्हारे खूबसूरत अंदाज़ अदाओं में चहकता सा हमारा संसार पढ़ लिया || जुल्फे खोल तुमने जब यूँ बिखराई खुशियों का मैंने अम्बार पढ़ लिया || चाह […]

गीतिका/ग़ज़ल

यहाँ अब सब कुछ निर्विरोध होना चाहिये

यहाँ अब सब कुछ निर्विरोध होना चाहिये | रिश्तो में अपनेपन का बोध होना चाहिये||1   नजरो ही नज़रो में दिल देते है देने वाले | इस पर तो अब जरुर शोध होना चाहिये||2   है अगर सामर्थ्य तो करे काम भलाई के | नेकी में भला क्यूँ अवरोध होना चाहिये ||3   सत्य ईमानदारी […]

गीतिका/ग़ज़ल

मैंने भी कुछ टूटे से घर देखे हैं,

मैंने भी कुछ टूटे से घर देखे हैं, उड़ने वालो के कतरे पर देखे हैं.|| डस जाते हैं वो धीरे धीरे यारो, आस्तीन में रहते विषधर देखे हैं.|| सारी दुनिया को तो धमकाते हैं वो उनके मन में पर हमने डर देखे है|| महलों में रहते थे शानों शौकत से आज वही सड़कों पर बेघर […]

कविता

रंग लगाने के बहाने पड़ोसन का हाथ जो पकड़ा

रंग लगाने के बहाने पड़ोसन का हाथ जो पकड़ा बीबी का फिर यारो गाल पर  पड़ा मुक्का  तगड़ा हाल न पूछो करते रहे सिकाई फिर पंचमी तक दर्द छिपाते रहे सबसे खतरनाक सूजा था जबड़ा भूल  छोटी थी या बड़ी कुछ समझ ना पाए हम इतना याद है रंग लगा के जमीन पर था रगड़ा […]

गीतिका/ग़ज़ल

सभी ओर मचा होली का ही तो है बवाल

सभी ओर मचा होली का ही तो है बवाल ऐसे में आ रे नटखट उड़ा तू प्रेम गुलाल काहे पीछे रहता जब है मस्ती का त्यौहार होली के हुड़दंग में तू भी कर ले धमाल तिनक तिनक सब से मिला ले सुर ताल रंग ही रंग उड़े हर ओर नीले पीले लाल गाल तो गाल […]

गीतिका/ग़ज़ल

क्यूँ सदा यूँ फतह की ही सोचते हो |

क्यूँ सदा यूँ फतह की ही सोचते हो | बस हमेशा सतह की ही सोचते हो ||१ प्यार मुहब्बत भी होता कुछ जहाँ में | बेवजह क्यूँ कलह की ही सोचते हो ||२ सबको ले कर चलो साथ दुनियां में | क्यूँ अपनी जगह की ही सोचते हो| ||३ गुजारिशे मन्नते रूठे को मनाने की […]

गीतिका/ग़ज़ल

रंग भी देता है खुलकर कौन है

रंग भी देता है खुलकर कौन है बैठा है जो दिल मे छुपकर कौन है लिख  इबारत प्यार की दिल पर मेरे जा रहा ये आज बचकर कौन है पासबानी भी  धरी ही रह गई ले गया दिल को चुराकर कौन है लिख दिया था नाम तो यूँ रेत पर पर इसे जाता मिटाकर कौन […]

गीतिका/ग़ज़ल

कैसे ये इश्क़ देखिये हालात करे है…

हमदम भी मेरा प्यार की बरसात करे है आकर वो खयालो में मुलाक़ात करे है। नज़रे यूँ मिलाकर किया इकरार तो लेकिन कैसे ये इश्क़ देखिये हालात करे है। नज़दीक वो बैठा है कहे कुछ न ज़बाँ से वो अपनी निगाहों से मगर बात करे है। डूबा है वो चाहत में मेरी कितना बताऊँ हमदम […]