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  • जीवन क्या है?

    जीवन क्या है?

    जीवन क्या है? कभी सोचता हूँ क्या सिर्फ ये भागमभाग है या कहीं कोई ठहराव भी है या यह एक मृगमरीचिका जहां हमेशा ही कुछ पाने की दौड़ है पर मिलने पर लगता है की और...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    पतंग छाए गगन में, लेकर नव-नव रूप। सतरंगी माहौल है, प्यारा और अनूप॥ गुड़ तिल और मिठाइयाँ, खावें हैं सब लोग। मकर राशि में रवि चले, प्यारी लागे धूप॥ दिनेश”कुशभुवनपुरी” परिचय - दिनेश पाण्डेयMail | More...

  • गीतिका

    गीतिका

    ये दिल सबका करता स्पंदन। उस दिल को है मेरा वंदन॥ नगर-नगर में बजा ढिंढोरा। गली-गली है महका चन्दन॥ प्रेम नगर की है ये भाषा। हर प्रेमी करता अभिनंदन॥ जात-पात को नहि ये माने। करलो चाहे...

  • गीतिका

    गीतिका

    ज़िंदगी की राह में, हम तो अकेले रह गए। कुछ कदम साथी चले, फिर राह में बिछड़ गए॥ दोष उनका था नही, वो तो मेरे साथी बने। कुछ कर्म ही ऐसे थे मेरे, छोडकर वो सब...


  • भारत की प्रकृति

    भारत की प्रकृति

    अनमोल हमारा देश  देता हर पल संदेश, अलग-अलग रंग, अलग-अलग भेष, प्रकृति का अनूठा रूप, निराला उसका सौंदर्य, देखकर होता आश्चर्य, कहीं विशालकाय पर्वत, कहीं समतल मैदान, कहीं रेत के धोरे, कहीं उफनता सागर, कहीं निर्झर...

  • हाइकु-लेखनी

    हाइकु-लेखनी

    लेखनीकार, लयबद्ध संसार, सत्य विचार। लिखे कलम, सच्चाई का आलम, बेरोक टोक। विधि लेखनी, मिटाये नही मिटे, सत्य घटित। दिनेश”कुशभुवनपुरी” परिचय - दिनेश पाण्डेयMail | More Posts (22)