गीत/नवगीत

गीत- साथी साथ निभाऊंगा

साथी साथ निभाऊंगा मैं। जीवन राग मिलाऊंगा मैं॥   अधरों पर मुस्कान सदा हो। जीवन में गुणगान सदा हो॥ ऐसा मीत बनाऊंगा मैं। साथी साथ निभाऊंगा मैं॥   जीवन में इक फूल खिला हो। खुशियाँ आए दूर गिला हो॥ पुनः उजाला लाऊँगा मैं। साथी साथ निभाऊंगा मैं॥   अब जीवन में ज्ञान सदा हो। हर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका- प्यार की आवाज हो तुम।

प्यार की आवाज हो तुम। यार दिल की साज हो तुम॥   जिंदगी रोशन तुझी से। यार मेरी नाज हो तुम॥   जब उड़ा आकाश में मैं। तब बनी परवाज़ हो तुम॥   कामयाबी जो मिली है। यार उसकी लाज हो तुम॥   हृदय अपना हार जाऊँ। ऐसी एक राज हो तुम॥   दिनेश पाण्डेय […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका- मत भटक मुसाफिर राह में चल

मत भटक मुसाफिर राह में चल। अपने प्रियतम की चाह में चल॥ उसके जैसा नहीं यार कोई। उसके यादों की थाह में चल॥ जीवन में संकट आये कोई। संग-संग उसके आह में चल॥ एक दिन मंजिल मिल जाएगी। यार उसके ख्वाबगाह में चल॥ मरते दम तक मत धैर्य तू खो। अपने रब के खैरख़्वाह में […]

कविता

जीवन क्या है?

जीवन क्या है? कभी सोचता हूँ क्या सिर्फ ये भागमभाग है या कहीं कोई ठहराव भी है या यह एक मृगमरीचिका जहां हमेशा ही कुछ पाने की दौड़ है पर मिलने पर लगता है की और चाहिए जहां सिर्फ भौतिकता की चाह है धन की भूख है चहुंओर प्रकाश ही प्रकाश है दिन हो या […]

कविता

मुक्तक

पतंग छाए गगन में, लेकर नव-नव रूप। सतरंगी माहौल है, प्यारा और अनूप॥ गुड़ तिल और मिठाइयाँ, खावें हैं सब लोग। मकर राशि में रवि चले, प्यारी लागे धूप॥ दिनेश”कुशभुवनपुरी”

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

ये दिल सबका करता स्पंदन। उस दिल को है मेरा वंदन॥ नगर-नगर में बजा ढिंढोरा। गली-गली है महका चन्दन॥ प्रेम नगर की है ये भाषा। हर प्रेमी करता अभिनंदन॥ जात-पात को नहि ये माने। करलो चाहे जितना क्रंदन॥ अमर रहा है अमर रहेगा। हर प्रेमी जोड़ी का बंधन॥ दिनेश”कुशभुवनपुरी”

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

ज़िंदगी की राह में, हम तो अकेले रह गए। कुछ कदम साथी चले, फिर राह में बिछड़ गए॥ दोष उनका था नही, वो तो मेरे साथी बने। कुछ कर्म ही ऐसे थे मेरे, छोडकर वो सब गए॥ दोस्त न कहना मुझे अब, मैं बड़ा खुदगर्ज हूँ। मतलबी हूँ मैं बहुत, ऐसा वो मुझको कह गए॥ […]

कविता

मुक्तक-नूतन

मापनी- 2222 2222 2222 122  नूतन सा पल हो नूतन सा कल हो नूतन सफल हो, नूतन सा नभ हो नूतन सा थल हो नूतन सजल हो, नूतन अवसर में नूतन सरगम में नूतन कदम में, नूतन सा मन हो नूतन सा तन हो नूतन सकल हो। दिनेश”कुशभुवनपुरी”

कविता

भारत की प्रकृति

अनमोल हमारा देश  देता हर पल संदेश, अलग-अलग रंग, अलग-अलग भेष, प्रकृति का अनूठा रूप, निराला उसका सौंदर्य, देखकर होता आश्चर्य, कहीं विशालकाय पर्वत, कहीं समतल मैदान, कहीं रेत के धोरे, कहीं उफनता सागर, कहीं निर्झर झरनो का सुर, कहीं बहती नदियों का सरगम, कहीं शीतलहर की धार, कहीं कड़क धूप की मार, कहीं रिमझिम […]