लघुकथा

प्रेम

“मैं तुमसे प्रेम करता हूँ।” पूरब के मुँह से अचानक यह सुन वृंदा चौंक गयी। “प्रेम…….!” “हाँ प्रेम,इस अथाह सागर की तरह गहन।” पूरब ने बाँहों को फैलाकर कहा। “सागर की तरह! मतलब खारा।” हँसते हुए वृंदा ने कहा। “उसके खारेपन को न देखो! उसकी गहराई को देखो।” वह बोला। “प्रेम समझते हो तुम पूरब?” […]

कहानी

तेरे नाम से शुरू तेरे नाम पर खतम…

“क्या देख रहे हो! हाँ जानती हूँ थोड़ी मोटी हो गई हूँ पर उम्र भी तो देखो पूरी पैंतालीस साल की हूँ।आप भी ना!आँखों से ही सारी बात समझा देते हो।” कहकर स्मृति वार्डरोब से कपड़े निकालने लगी।एक साड़ी हाथ में लेकर शेखर की ओर मुडी और बोली, “देखो! यह कैसी है, इसे पहन लूँ? क्या […]

कहानी

कहानी – सिमरन

अस्पताल के बेड पर पडे हुए शेखर को देखकर सिमरन सिहर जाती हैं। कभी सोचा नहीं था कि उसे इस हाल में देखेगी। कलेजा फटने को हो गया जी हुआ चिल्ला कर रो पडे। पैर कांपने लगे लेकिन खुद को संयत कर एकदम शेखर के सामने जाकर खड़ी हो गई। अचानक सिमरन को सामने देख शेखर के […]