भजन/भावगीत

पद

  गंजरहा! मृण्मय यह संसार ! मृण्मय तन ,मृण्मय चीजों पर व्यर्थ करे अधिकार ! तेरे बाद सिर्फ होंगे बस अच्छे बुरे विचार ! इधर उधर मत भटक, पकड़ ले राम नाम आधार! माया नदी ,भक्ति है नैया , ज्ञान प्रबल पतवार । एक लक्ष्य रख जन्म मृत्यु के बंधन से उद्धार ! जाग नींद […]

पर्यावरण लेख

पर्यावरण के लिए सिर्फ एक दिन ?

  आज पार्यावरण दिवस है ,लोग एक छोटा सा पेड़ लगाते हुए एक फोटो किसी आनलाइन प्लेटफार्म पर डालकर अपने को प्रकृति प्रेमी घोषित करेंगे । यह प्रकृति प्रेम नही है ,प्रकृति प्रेम तो गाँवों मे होता था। हाँ, अब वहाँ भी शेष नही बचा ,यह दुख और चिंता का विषय है । हर गाँव […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

यह कैसा संयोग हुआ है, खुदा बचाये । नीच नीच का योग हुआ है,खुदा बचाये। राजनीति की गद्दी बोली ,मेरी खातिर- लाशों का उद्योग हुआ है,खुदा बचाये। सबकी कमियाँ गिना रहा वो घूम घूमकर, खुशफहमी का रोग हुआ है,खुदा बचाये। अब तो मन को कुछ भी नही सुहाता मेरे, जबसे तेरा वियोग हुआ है, खुदा […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

बस जोड़ने मे सारा जीवन गुजर गया है । हिस्से में मेरे अब तक केवल सिफ़र गया है। हलचल है हर तरफ मैं गोधूलि की तरह हूँ, कुछ देर पहले छूकर,मुझे दोपहर गया है । थे स्वप्न काँच के सब, कब तक सम्हाल पाता? ठोकर थी वक्त की ,अब सब कुछ बिखर गया है। हर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

यक्षप्रश्न चहुँओर खड़े हैं, मेरे पास जवाब नही है । नागफनी के काँटे है बस ,मेरे पास गुलाब नही है। प्यास बुझाने की खातिर मैं, रक्तपान कैसे कर लूँगा ? प्यासा है मन बात अलग है, पर इतना बेताब नही है। चाहत है कुछ चेहरों को मैं पल भर की मुस्कान दे सकूँ, जो औरों […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

एकलव्य के अपराधी तुम द्रोण तुम्हारा क्या होगा ? वहम तुम्हारा टूटेगा यह ,कि सब कुछ अच्छा होगा । तुम भविष्य से खेल रहे हो, काट रहे हो हाथों को , जिन आँखो को रुला रहे हो, उनमें भी सपना होगा। जाने कौन पिपासा है तुम चीरहरण पर मौन रहे ? कल इतिहास वही लिक्खेगा,जो […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

तन्हाई  की पीर  लिखूँगा  । इन नैनौं का  नीर  लिखूँगा। जिसने  दिया वियोग क्रौंच को, वही  व्याध  का तीर लिखूँगा । घाव पीठ पर देने वालों ! तुमको कैसे वीर  लिखूँगा । उर  में  हैं  झंझा  भावों का , चेहरे को गंभीर  लिखूँगा  । मैं  भी  हूँ  उनका  अनुगामी , तूलसी ,सूर, कबीर लिखूँगा । […]

गीत/नवगीत

गीत

कोयल बिन सूनी अमराई । चुभती यादों की पुरवाई । तुम बिन चंदा रोया होगा , आँसू लटके हैं पत्तों पर। तुम गीतों का अलंकार हो, तुम बिन सूने लगतें हैं स्वर। मेरी नींद तोड़ देती है, अक्सर सपनों की अंगड़ाई । कोयल बिन……………… बागों में बसंत आया है, नई कोपलें डाली डाली। दिग दिगंत […]

गीत/नवगीत

गीत

रंग-अबीर-गुलाल लगाकर,सबको गले लगायें! मन के सकल विकार मिटाकर,होली-पर्व मनायें! जो मानवता के भक्षक हैं, हिंसक उन्हें बतायें! झूठे लोगों के सब झूठे चोलें नोच बहायें ! बचे धर्म प्रह्लाद ,होलिका ऐसी चलो जलायें ! मन के सकल विकार……………. कोशिश करो न कोई खेले कहीं रक्त की होली! बचे लाज, ललनाओं की न लगे हाट […]

गीत/नवगीत

गीत

  उर की पीड़ा, नीर प्रलय सी, धैर्य एक छोटी सी नाव । संघर्षों का राही जीवन, आखिर कब लेगा ठहराव ? कर्तव्यों के बोझ शीश पर । शूल समेटे पाँव, लहू तर । जीवन सिर्फ गीत पीड़ा का, घाव घाव जिसका हर अक्षर। तब तब महँगा मोल चुकाया, जब चाहा कोई बदलाव । उर […]