गीत/नवगीत

गीत

कट रहें हैं पेड़ देखो, ताल में घर बन रहे हैं , बन रहे हैं कंकरीटों के शहर, अब गाँव सारे, ऐ प्रवासी पक्षियों अब तुम न आना ! जहर पीती हर नदी,और झील के सिमटे किनारे। अब कहाँ चकवी निशा में,मीत को अपने पुकारे ? कहाँ कोई क्रौंच विरहा में अकेला मर मिटेगा ? […]

गीत/नवगीत

गीत

हृदय व्याकुल, नैन में घन घोर,वो आये नहीं। कोशिशें मैंने करी पुरजोर,वो आये नहीं । कोयलों ठहरों ,सुनो, मत गीत गाओ! मधुकरों कलियों पें तुम मत गुनगुनाओं! हो रहा है कर्णभेदी शोर, वो आये नहीं। कोशिशें ……………………. भीड़ में दिन कट गया फिर, रात तनहा आ गई। अंधेरे की एक चादर ,मेरे मन पे छा […]

गीत/नवगीत

गीत

शीतनिशा जैसा नीरव मन । ठिठुर रहा है मन का उपवन। कठिन प्रश्न हैं,कठिन व्याकरण। पीड़ा का हिय मध्य अवतरण । नही दिख रहे समाधान पथ, मन पे कुहरा सरिस आवरण। जला रही है मुझको पीड़ा , सुलग रहा मैं ,जैसे कुंदन । शीतनिशा……………… करवट करवट बीती रैना । शीतबिंदु से बरसे नैना । ठंडी […]

गीतिका/ग़ज़ल

मौसमी गजल

सारी राहें रोक रहा हैं, एक दीवार बना कुहरा है । हर खिड़की पर ,दरवाजे पर,सर्द हवाओं का पहरा है। ओस के आँसू टपक रहे हैं, खिलें गुलाबों की कलियों से, इनके दिल में भी मुझ जैसा,कोई दर्द बहुत गहरा है। सर्द हवायें चूम रही हैं ,मेरे तन को, रोको इनको , चुंबन से भी […]

गीत/नवगीत

मर जाओगे

एक दिन तुम भी मर जाओगे। मौत से बचकर किधर जाओगे। अपनों गैरों की बारातें । ये दुनियादारी की बातें। किसको संग लेकर जाओगे ? मौत से………………. भूखे जग में रहे भागते । तृष्णा में तुम रहे जागते। चिरनिद्रा सोकर जाओगे । मौत से……………….. यह रिश्तों के झूठे बंधन । छोड़ के भूमि भवन औ, […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

फिर हृदय में कठिन वेदना है ,सखे! मुझको तन्हा इसे झेलना है ,सखे ! इसको समझेगा कोई भला किस तरह, पीर उर की, कठिन व्यंजना है ,सखे ! आदमी ,आदमी को डसेगा नही, सिर्फ कोरी सी एक कल्पना है,सखे! रोटियों का विभाजन ,तरीके से कर , ईश से बस यही याचना है सखे ! वह […]

कुण्डली/छंद

कुंडली

तुम आई न प्रियतमे, आई निष्ठुर शीत । शूल सरीखी शीत में,घायल मेरे गीत । घायल मेरे गीत ठिठुरते हैं रातों में । खो जाती है नींद ख्वाब की बारातों में, विकल विरह में रहता है मेरा मन गुमसुम। आश लगाए बैठा है, अब आ जाओ तुम

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

नशे में हूँ, कहाँ जाऊँ , साकी ? दो पहर तुझ संग बिताऊँ, साकी? हर तरफ आँधियाँ दिवानी हैं, दीप मैं कैसे जलाऊँ ,साकी ? जिसके हाथों में खूनतर खंजर, हाथ क्यों उससे मिलाऊँ ,साकी? चुक गई स्याही ,दर्द लिख लिख के, आँख के अश्क बचाऊँ ,साकी ? नशे में हूँ तो दर्द कम से […]

गीत/नवगीत

गीत

कल्प सरीखे बीत रहे दिन । रातें कटती तारे गिन गिन । जैसे हरियाली बिन सावन । जैसे बिना कल्पना के मन । जैसे फूल बिना सौरभ के , जैसे फूलों के बिन उपवन। प्रियतम हम ऐसे हैं तुम बिन । कल्प सरीखे ………………. ये विरहा की काली रातें । निष्ठुर सपने शूल चुभाते। गीत […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

[ गजल ] जुल्म की हद पे हमने की बगावत । गुलामी सी लगी,सहने की आदत । हम सलीके से करते हैं ऐ जालिम ! दोस्ती हो कि ,या फिर हो अदावत। युद्धबंदी से हैं हालात मेरे, हर तरफ साजिशें, गंदी सियासत। आदमी ,आदमी को खा रहा है , लग रहा है कि आयेगी कयामत […]