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  • हे अलि !

    हे अलि !

    हे अलि ! पिया अबहुँ नहि आये । यह अनंग का मीत निर्दयी ,उर तंत्री झनकाये । मौसम ने ली है अंगड़ाई। चहुँ दिशि में हरियाली छाई। दशों दिशाएँ प्रेमसिक्त हैं , मेरी रैन विरह की...

  • पछताओगे !

    पछताओगे !

    हाथ मलोगे, पछताओगे , अवसर बीते, क्या पाओगे ? क्रोध एक नाशक ज्वाला है। मारक गरलमयी हाला है । इसने डसे हजारो रिश्तें क्रोध एक विषधर काला है । अगर क्रोध का वरण किया तो, दर...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    1- कुर्सियों पर चढ़े लुटेरे हैं । हर तरफ अजगरों के घेरे हैं । शहर बिजली में चमकते होंगे, गाँव में अब तलक अंधेरे हैं । २- देखकर भाव सौतेला बालपन टूट के रोईं । विदाई...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    १- हृदय के तार दर्द देतें हैं । दुख के अधिकार दर्द देतें हैं । वफादारों से दुश्मनी अच्छी , दोस्त गद्दार दर्द देतें हैं । 2- मैं बहुत हूँ अधीर कह देना । मेरे इस...


  • अवधी गीत

    अवधी गीत

      पीली चदरिया ओढ़े सरसो दिवानी । हरियर हरियर गेंहूँ उपजा ,खेत खेत हरियाये । हवा करै बालों मे कंघी ,खेतन का दुलराये । गजरा, मुनमुन, गोंहूँ मामा ,बिन बोये जो उपजे, रामखेलावन घसियारी मा बैठा...

  • ले चलें !

    ले चलें !

      लेखनी! संगदिल हवा की बेवफाई तक चलें ! ठंड से हारी हुई दुबली रजाई तक चलें ! ठंड में कीचड़ के मोजे पहन के सिंचन करे, अन्नदाता की समर्पित आशनाई तक चलें ! ओड़ करके...



  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    स्याह रातों मे नया नूर दिखाने वाला । कोई आयेगा मुझे राह बताने वाला ।। ऐ अंधेरो के बुरे लोग ,कुछ डरो उससे, कोई आयेगा एक चराग जलाने वाला । मैं कोई गीत लिखूँ ,दर्द में...