गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

पीड़ा के गीत हो रहे हम ,रोज कलम से ।चुपचाप प्रिये ! रो रहे हम,रोज कलम से । कुछ दाग हैं समाज पर,जो मिट नही सके,घिस घिस के उन्हें धो रहे हम,रोज कलम से। पीड़ा है हिम प्रहार सी ,धड़कन ठिठुर रही,साँसो में आग बो रहे हम,रोज कलम से । मुझको ये जिलायेगी,मेरे बाद कह […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

कोई मीत नही हैं मेरा ,कोई स्वजन ,न कोई भाई।सबके सुख दुख होगें अपने,मेरी उदासीन तनहाई । अक्सर बोझ समझदारी के,यह मुझसे पूछा करते हैं,बालक से तू वृद्ध हो गया,कब बीती तेरी तरुणाई ? दर्पण मौन देखता रहता,दृग से मोती झर जाते है,हम चुपके से रो लेते हैं,जब हो बोझों की अधिकाई। सुख में सब […]

गीत/नवगीत

द्रुपदसुताओं अस्त्र गहो

सत्तासीन नैन खो दे तो, दुःशासन बौरायेंगे।द्रुपदसुताओ अस्त्र गहो ,अब केशव फिर न आयेंगे। गर नर दनुज सरीखा हो तो, ममतामयी रूप छोड़ो।बुरी नजर गर देखे कोई ,बाज बनो ,आँखे फोड़ो । कब तक दानव जैसे मानव ,तुमको जिंदा खायेंगे ?द्रुपदसुताओं अस्त्र गहो ………………………. यह सोता समाज उठ बैठे,तुम ऐसी हुंकार करो ।बहुत हुआ अब […]

पर्यावरण

राष्ट्रीय जलजीव : गांगेय डाल्फिन

*राष्ट्रीय जलजीव:गांगेय डाल्फिन* भारत सरकार ने सन 2005 में गांगेय डाल्फिन को भारतीय गणराज्य का राष्ट्रीय जलजीव घोषित किया । गांगेय डाल्फिन दक्षिण पूर्व एशिया की नदियों मे पायी जाने वाली डाल्फिन की दो प्रजातियों में से एक है ।इसकी दूसरी प्रजाति को सिंधु डाल्फिन कहते हैं ,सिंधु डाल्फिन मुख्यतया पाकिस्तान की सिंधु एवं इसकी […]

पर्यावरण

राष्ट्रीय जलजीव:गांगेय डाल्फिन

भारत सरकार ने सन 2005 में गांगेय डाल्फिन को भारतीय गणराज्य का राष्ट्रीय जलजीव घोषित किया । गांगेय डाल्फिन दक्षिण पूर्व एशिया की नदियों मे पायी जाने वाली डाल्फिन की दो प्रजातियों में से एक है ।इसकी दूसरी प्रजाति को सिंधु डाल्फिन कहते हैं ,सिंधु डाल्फिन मुख्यतया पाकिस्तान की सिंधु एवं इसकी सहायक नदियों में […]

गीत/नवगीत

ढाक के तीन पात

कोशिशें बहुत करीं पर ,कुंभकरण जागे नही ।अंत में परिणाम आया ,ढाक के बस तीन पात। देकर के आसरा हर बार वो टरकाते रहे ।तब भी हम ऊसर में बीज नित बहाते रहे।भैंसो के आगे हम बीन भी बजाते रहे ।बहरों के आगे हम मेघ राग गाते रहे । फिर हमने जाना बाँझ ,जाने क्या […]

मुक्तक/दोहा

शिक्षक

1:- रोशनी बनकर जीवन की राहें हमको दिखाते हैं।भला क्या है, बुरा क्या है ,हमें हरपल सिखाते हैं।जन्म माँ बाप देते हैं, भूख रोटी दिला देती ,‘दिवाकर’ आदमी को आदमी शिक्षक बनाते हैं।2:- अरस्तू हैं कहीं पर तो ,कहीं गुरु द्रोण है शिक्षक।हमारी जिंदगी की मुश्किलों का तोड़ है शिक्षक।‘दिवाकर’ जिंदगी को जो सफलता की […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

जोर चली पुरवाई है ।नदिया भी बौराई है । स्वप्न कृषक के सूख गये,बाढ़ खेत में आई है । कर्तव्यों ने प्रौढ़ किया ,बोझ तले तरुणाई है। पर्वत उतरी सरिता सी,यौवन की अँगड़ाई है । कूप सामने, लौटूँ तो -पीछे गहरी खाई हैं। चलो गंजरहा, गाँवों में-शेष बची मनुसाई है । ——-डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

कुछ पीड़ा के चित्र घनेरे।उर के पट पे आज उकेरे। मेरे दुख की रात न बीती,जग में आये रोज सवेरे । मन की मीन बहुत उलझी है,डाल न चारा , समय मछेरे ! एकाकी पथ नाप रहा हूँ,बागी निर्णय थे सब मेरे । दीप अकेला कब तक लड़ता,दुश्मन थे हर ओर अंधेरे । मुझसे उत्तर […]

कविता

कविता-अपेक्षाएँ

हाय इतनी अपेक्षाएँ, एक नन्ही जिंदगी,किस अपेक्षा पर खरा उतरूँ ? मित्रों की कुछ अपेक्षाएँ,चाहतें कुछ प्रेमिका की,कुछ मेरे दायित्व हैं –माँ बाप के प्रति ।देश का ऋण,धर्म का ऋण,जाति का ऋण,कुछ मेरे दायित्व हैं-संतान के प्रति ।इतनी सारी बेदियाँ हैं, बलि की खातिर,बता! किस पे कौन इच्छा बलि करूँ ? दौड़ धन की ,दौड़ […]