गीत/नवगीत

पीपल की बरगद से चाहकर बात नही होती

पनपे कंकरीट के जंगल, बड़े मंझोले पेड़ काटकर,पीपल की बरगद से चाहकर बात नही होती । सावन की पुरवैय्या सूनी ।दादी की अंगनैय्या सूनी ।सरिता का संगीत शोकमय,बंधी घाट पर नैय्या सूनी । महुए की सुगंध से महकी रात नही होती ।पीपल की बरगद……………………….. कहीं खो गये कोयल ,खंजन।दूर हो गये झूले सावन ।उजड़ रहे […]

गीत/नवगीत

कौन हृदय की पीर सुनेगा?

कौन हृदय की पीर सुनेगा ,इस दुख के निर्जन कानन में ?घड़ी वेदना की निर्मम है, एक झंझावात सा है मन में । मोल करेगा कौन जौहरी,मोती टपक रहे हैं दृग से?शूल और पाषाण चुनेगा ,कौन भला इस दुष्कर मग से?कौन मेरे उर की पीड़ा को ,अपनी पीड़ा समझ सकेगा,क्यों मैं कोई आशा पालूँ,स्वारथरत, कटुतामय […]

कहानी

भूल

पिछले कई सालों से लखनऊ आना जाना हुआ है, मगर कभी गुरूजी से नही मिल सका। मैंने सोंचा, आज मैं गुरूजी से मिलकर जाऊँगा। गुरूजी हमें पीएमटी की तैयारी के दिनों में प्राणि विज्ञान पढ़ाते थे और, बहुत ही सहृदय और नियमों के पक्के, उदारवादी चरित्र। मैं उनका सबसे प्रिय शिष्य था। वह लखनऊ के […]

गीत/नवगीत

गीतों के गाँव में

[ गीत ]शहर के कोलाहल से,चलो प्रिये लौट चलें !गीतों के गाँव में,पीपल की छाँव में । कोयल अमराई हो, महकी पुरवाई हो ।हो बसंत डाल डाल बगिया बौराई हो ।गेहूं के पके खेत ,कनक सरिस दिखते हों,प्राची पट ओढ़ लाल,ऊषा जब आई हो । चार नयन फिर उलझें ,सरित मध्य नाव में।गीतों के गाँव………………. […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

खेतियाँ जब जहर की करे आदमी । तो बताओ कि क्यों न मरे आदमी ? हर तरफ से प्रकृति को चरा आपने , क्यों प्रकृति आपको न चरे, आदमी? अन्न ,पशु,कीट,खग,मत्स्यकुल खा गया, राक्षसों सा उदर; तू भरे आदमी ! आग से खेलना तुझको महँगा पड़ा, अपनी ही आग में अब जरे ,आदमी । कंकरीटों […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

मुझको बसंत चुभने लगा तीर की तरह । कोयल का गीत,आह भरी पीर की तरह। मस्तिष्क के गगन पे,यादों के घन घने , बनते हैं बिगड़ते हैं, तस्वीर की तरह । ख्वाबों की भीड़ आई ,करती है शोरगुल, नींदों को काट देती है ,शमशीर की तरह। मन मानता नही हैं,मिलने की जिद करे, मजबूरियाँ खड़ी […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

दर्द जो पिछले विदा लेते हैं। हम नया दर्द बुला लेते हैं । रोज इक आग दिल में जलती है, रोज हम अश्क बहा लेते हैं। राह में स्याह अंधेरे जो मिले , हम अपने ख्वाब जला लेते हैं । दर्द जब हद से गुजर जाता है दर्द के गीत बना लेते हैं । दर्द […]

गीत/नवगीत

गीत

कट रहें हैं पेड़ देखो, ताल में घर बन रहे हैं , बन रहे हैं कंकरीटों के शहर, अब गाँव सारे, ऐ प्रवासी पक्षियों अब तुम न आना ! जहर पीती हर नदी,और झील के सिमटे किनारे। अब कहाँ चकवी निशा में,मीत को अपने पुकारे ? कहाँ कोई क्रौंच विरहा में अकेला मर मिटेगा ? […]

गीत/नवगीत

गीत

हृदय व्याकुल, नैन में घन घोर,वो आये नहीं। कोशिशें मैंने करी पुरजोर,वो आये नहीं । कोयलों ठहरों ,सुनो, मत गीत गाओ! मधुकरों कलियों पें तुम मत गुनगुनाओं! हो रहा है कर्णभेदी शोर, वो आये नहीं। कोशिशें ……………………. भीड़ में दिन कट गया फिर, रात तनहा आ गई। अंधेरे की एक चादर ,मेरे मन पे छा […]

गीत/नवगीत

गीत

शीतनिशा जैसा नीरव मन । ठिठुर रहा है मन का उपवन। कठिन प्रश्न हैं,कठिन व्याकरण। पीड़ा का हिय मध्य अवतरण । नही दिख रहे समाधान पथ, मन पे कुहरा सरिस आवरण। जला रही है मुझको पीड़ा , सुलग रहा मैं ,जैसे कुंदन । शीतनिशा……………… करवट करवट बीती रैना । शीतबिंदु से बरसे नैना । ठंडी […]