गीतिका/ग़ज़ल

गजल

तनहाई को मीत बनाओ तो जानूँ! गम को अपने गीत सुनाओ तो जानूँ! * लौ से मिलकर जले न कोई परवाना, प्रीत की ऐसी रीत चलाओ तो जानूँ ! * नरम दिलों को पत्थर होते देखा है , पत्थर को नवनीत बनाओ तो जानूँ ! * सभी कोसते रहते काली रातों को, आगे बढ़कर दीप […]

गीत/नवगीत

गीत

जिंदगी हर जगह बेहाल लिखूँ । या गरीबों को खस्ताहाल लिखूँ । नहीं ये बिल्कुल बेइमानी होगी, भला क्यों कर मैं नया साल लिखूँ ? * हर जगह धुंध है कुहासा है , झुग्गियों में भरी निराशा है , कहीं भूखा ही सो गया बच्चा, काटते कुत्ते कहीं माल लिखूँ । भला क्यों कर मैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

हम पतझड़ के वीराने हैं। अपनों से हम बेगाने हैं। * यारों हमको रोना होगा, पत्थर दिल पर दीवाने हैं । * मत पूछो इतिहास हमारा, केवल गम के अफसाने हैं। * मन उनकी यादों में गुम है, वह हर गम से अनजाने हैं । * तोड़े से यह ना टूटेंगे, रिश्तो के ताने बाने […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल (शीर्षक :अम्मा)

नित नित कष्ट उठाती अम्मा। कभी नही उकताती अम्मा । * सूखे मेँ थी मुझे सुलाती , गीले मे सो जाती अम्मा। * अपने लाल के कुशलछेम को देवी,दैव मनाती अम्मा । * सफल देख अपने बच्चे को फूले नही समाती अम्मा। * जब जब मुझे कष्ट होता है, याद बहुत तू आती अम्मा। * […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चार दिन इस जहां में हर किसी का आशियाना है। फिर कहीं तुमको जाना है फिर कहीं हमको जाना है। * निजी कमजोरियों का दोष क्यों देते जमाने को, जमाने से नहीं है हम ,हमसे तुमसे जमाना है । * जिंदगी कारवां है, साथ मे राही बहुत से है, किसे मालूम ,कितनी दूर, किसको साथ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कहीं है जलती कहीं पर भी पिघलती धरती। आग का गोला हर दिन जा रही बनती धरती । * आदमी ने स्वार्थ हित दोहन की सीमा तोड़ी कैसे चुप रहती कब तक धीरज धरती धरती? * गले की हड्डी के एक दिन बनना ही है रहेगी कब तक पालीथीन निगलती धरती । * खीरी एटम […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जब चांद नहीं तो तारों का मतलब ही क्या? मरुथल में जवां बहारों का मतलब ही क्या? * वह का वियोग में शून्य निहारा करता है नायिका के मधुर इशारों का मतलब ही क्या? * सारी आशाएं छोड़ी तुम बिन हार गया अब धैर्य पुष्प के हारों का मतलब ही क्या ? * वह तेरे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सच कहने का मूल्य चुकाना पड़ता है। कांटों में भी राह बनाना पड़ता है । * अंधेरे से जंग छेड़ दी जब मैं मैंने पता इसमें जल जाना पड़ता । * सच्चाई घाटे का सौदा है यारों बंदर को आइना दिखाना पड़ता है। * शर्म बेचकर खा ली दुनिया वालों ने अब इज्जत को नजर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़जल

ये अफसर भी होगा बेईमान, चंद लोगो को खबर थी । बिकेगा पैसे से ईमान चंद लोगों को खबर थी । * वो फिल्मी सितारे के व्रत की खबर रोजनामे मे । मर गया भूख से रमजान चंद लोगों को खबर थी । * इलेक्शन जीता था रघुआ पर केवल कण्डीडेट था , बनेगा फिर […]

गीत/नवगीत

गीत : अमावस की रातें

ये अमावस की रातें, हमसे करती हैं बातें। छेड़ जाती हैं मन को, चाँदनी की बरातें। कुछ उजड़ते घरौंदे, टूटते कितने सपने। गैर नजदीक आते, छोड़ जाते हैं अपने। लोग सपने दिखाके तोड़ लेते हैं नाते। ये अमावस……………………….. कितनी गुमनाम चोटें, कितने बदनाम किस्से। हर कोई मौज लेगा, क्यों कहें हम किसी से? प्रेम हाला […]