गीतिका/ग़ज़ल

गजल

फिर हृदय में कठिन वेदना है ,सखे! मुझको तन्हा इसे झेलना है ,सखे ! इसको समझेगा कोई भला किस तरह, पीर उर की, कठिन व्यंजना है ,सखे ! आदमी ,आदमी को डसेगा नही, सिर्फ कोरी सी एक कल्पना है,सखे! रोटियों का विभाजन ,तरीके से कर , ईश से बस यही याचना है सखे ! वह […]

कुण्डली/छंद

कुंडली

तुम आई न प्रियतमे, आई निष्ठुर शीत । शूल सरीखी शीत में,घायल मेरे गीत । घायल मेरे गीत ठिठुरते हैं रातों में । खो जाती है नींद ख्वाब की बारातों में, विकल विरह में रहता है मेरा मन गुमसुम। आश लगाए बैठा है, अब आ जाओ तुम

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

नशे में हूँ, कहाँ जाऊँ , साकी ? दो पहर तुझ संग बिताऊँ, साकी? हर तरफ आँधियाँ दिवानी हैं, दीप मैं कैसे जलाऊँ ,साकी ? जिसके हाथों में खूनतर खंजर, हाथ क्यों उससे मिलाऊँ ,साकी? चुक गई स्याही ,दर्द लिख लिख के, आँख के अश्क बचाऊँ ,साकी ? नशे में हूँ तो दर्द कम से […]

गीत/नवगीत

गीत

कल्प सरीखे बीत रहे दिन । रातें कटती तारे गिन गिन । जैसे हरियाली बिन सावन । जैसे बिना कल्पना के मन । जैसे फूल बिना सौरभ के , जैसे फूलों के बिन उपवन। प्रियतम हम ऐसे हैं तुम बिन । कल्प सरीखे ………………. ये विरहा की काली रातें । निष्ठुर सपने शूल चुभाते। गीत […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

[ गजल ] जुल्म की हद पे हमने की बगावत । गुलामी सी लगी,सहने की आदत । हम सलीके से करते हैं ऐ जालिम ! दोस्ती हो कि ,या फिर हो अदावत। युद्धबंदी से हैं हालात मेरे, हर तरफ साजिशें, गंदी सियासत। आदमी ,आदमी को खा रहा है , लग रहा है कि आयेगी कयामत […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

शहर को हाय ये हुआ क्या है? हर जगह धुंध है धुआँ सा है । देखकर मेरी खुशी जलता है, आदमी है कि वो जवासा है? बोनसाई सी जड़ें ,रिश्तों की, सोच कर मन मेरा रुआँसा है। लोग लाशों से लाभ ले लेते , इस कदर भूख है,पिपासा है। तंज कुछ लोग कस रहे हम […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

अधरों पर मुस्कान नही है। जिंदा हूँ पर जान नही है । घोर अमा, तू दुखड़ो वाली ! तेरा कोई विहान नही है ? क्या हूँ,कैसे हूँ,मैं क्यों हूँ ? मुझको कुछ भी भान नही है। भीड़ हो गया हूँ अब मैं भी, अलग कोई पहचान नही है। यहाँ सभी बस एक वहम में, कोई […]

गीत/नवगीत

गीत

हानि लाभ की गणना कर लें ; आ कर लें सब वारे न्यारे ! समय ! फेर दिन सुखद हमारे । पल भर मिलन ,मास भर पीड़ा । समय! रोक यह निर्मम क्रीड़ा । दोष सिद्ध ,तुझ पर भी होगा, दुखदाता ,सुख के हत्यारे ! समय! फेर…………………. क्या सोचा था,क्या फल पाया ? गहन हुई […]

गीत/नवगीत

पीड़ा का गीत

तुमको देखे युग गुजरा है । हाय प्रिये तुम दूर हो गये । हम कितने मजबूर हो गये । वक्त ने ऐसा मोल लगाया, हम इसके मजदूर हो गये । मत फेंकों यादों के कंकड़ , मन पानी जैसा ठहरा है । तुमको…………… तुम बिन सब वीराना लगता। झूठा ताना बाना लगाता । केवल एक […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

वक्त ने ,हाय ! ये क्या से क्या कर दिया ? देके शोहरत, मुझे गुमशुदा कर दिया । खेल ऐसा किया ,मैं ठगा रह गया , दूर मंजिल, कठिन रास्ता कर दिया । कल्पना बाँध दी, लेखनी छीन ली , और फिर दर्द का सिलसिला कर दिया । अब गजल, गीत ,नज्में नही पास हैं, […]