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  • गजल

    गजल

    जिंदगी जितना तुझको पढ़ता हूँ उतना ही और मैं उलझता हूँ सारे आलम को यह ख़बर कर दो इश्क़ की आग में उतरता हूँ वक़्त पर जो मेरा हथियार बने वो क़लम साथ लिए चलता हूँ...