Author :

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    गरीबी से बढ़कर सज़ा ही नहीं है सुकूँ चार पल को मिला ही नहीं है कहाँ ले के जाऊँ मैं फ़रियाद अपनी ग़रीबों का कोई ख़ुदा ही नहीं है मुझे फ़िक्र उनकी है जिनके घरों में...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तेरे प्यार में हर सितम है गवारा होता है होने दो नुक्सां हमारा अभी तक सफ़र में था बिल्कुल अकेला मगर अब किसी न मुझे भी  पुकारा यही एक छोटी सी बस जुस्तजू है तुम्हीं फिर...

  • गजल

    गजल

    जिंदगी जितना तुझको पढ़ता हूँ उतना ही और मैं उलझता हूँ सारे आलम को यह ख़बर कर दो इश्क़ की आग में उतरता हूँ वक़्त पर जो मेरा हथियार बने वो क़लम साथ लिए चलता हूँ...