गीतिका/ग़ज़ल

झील में खिलते कमल दल की कतारों की तरह

झील में खिलते कमल दल की कतारों की तरह तुम हसीं लगती हो बर्फीले पहाड़ों की तरह चांदनी आयेगी,खेलेगी कभी लहरों से राह हम देखते दरिया के किनारों की तरह मेरे जैसे यहां कितने ही है दीवाने और रात भर जागते रहते जो सितारों की तरह मेरे महबूब की लहराती घनेरी जुल्फें मेरे शानों पे […]

गीतिका/ग़ज़ल

बवंडर उठ रहा है क्या तुम्हें इसकी ख़बर भी है

बवंडर उठ रहा है क्या तुम्हें इसकी ख़बर भी है तबाही से डरे हैं लोग घबराहट इधर भी है मेरी मंज़िल मुझे आवाज़ देती है चले आओ उधर है डूबता सूरज इधर धुँधली नज़र भी है समझने बूझने में साल कितने ही गँवा डाले समय है कम हमें मालूम है लंबा सफ़र भी है ज़रा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल ….. उडी़ ख़बर कि शहर रोशनी में डूबा है

उडी़ ख़बर कि शहर रोशनी में डूबा है गया क़रीब तो देखा कि महज़ धोखा है बडे़ घरों की खिड़कियाँ कहाँ खुलें जल्दी जिधर भी देखता हूँ हर तरफ़ अँधेरा है उनके कुत्ते भी दूध पी के सो गये होंगे मगर बच्चा बगल का दो दिनों से भूखा है किसी ग़रीब की इमदाद कौन है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल ….मेरी आँखों से उसे दरिया बहाना आ गया

मेरी आँखों से उसे दरिया बहाना आ गया अब उसे कमज़ोर नस मेरी दबाना आ गया वो हमारी शक्ल पर भी तंंज कसता खूब है फिर भी मैं खुश हूँ कि उसको मुस्कराना आ गया चार दिन पहलें तलक कहते थे सब बच्चा उसे कब उसे इस दरमियाँ बिजली गिराना आ गया थामकर उँगली जिसे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – गमे आशिक़ी ने सँभलना सिखाया

गमे आशिक़ी ने सँभलना सिखाया समंदर में गहरे उतरना सिखाया अकेले थे पहले बहुत खुश थे लेकिन तेरी आरज़ू़ ने तड़पना सिखाया बड़ी धूल थी बारहा रुख़ पे मेरे तेरी इक नज़र ने सँवरना सिखाया कभी मैंने ख़ारों की परवा नहीं की गुलों ने मुझे भी महकना सिखाया लगी आग दिल में तो ख़ामोश रहकर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गरीबी से बढ़कर सज़ा ही नहीं है

गरीबी से बढ़कर सज़ा ही नहीं है सुकूँ चार पल को मिला ही नहीं है कहाँ ले के जाऊँ मैं फ़रियाद अपनी ग़रीबों का कोई ख़ुदा ही नहीं है मुझे फ़िक्र उनकी है जिनके घरों में कई दिन से चूल्हा जला ही नहीं है मुहब्बत को भी लोग पैसों से तौलें दिलों में भी अब […]

गीतिका/ग़ज़ल

तेरे प्यार में हर सितम है गवारा

तेरे प्यार में हर सितम है गवारा होता है होने दो नुक्सां हमारा अभी तक सफ़र में था बिल्कुल अकेला मगर अब किसी न मुझे भी  पुकारा यही एक छोटी सी बस जुस्तजू है तुम्हीं फिर मिलो गर जनम हो दुबारा अगर तुम न होते तो मैं भी न होता कठिन जंग में भी कभी […]

गीतिका/ग़ज़ल

जिंदगी जितना तुझको पढ़ता हूँ

जिंदगी जितना तुझको पढ़ता हूँ उतना ही और मैं उलझता हूँ सारे आलम को यह ख़बर कर दो इश्क़ की आग में उतरता हूँ वक़्त पर जो मेरा हथियार बने वो क़लम साथ लिए चलता हूँ हक़़ ग़रीबों का छीन लेते जो उन लुटेरों से रोज़ लड़ता हूँ जब कोई रास्ता नहीं सूझे ऐ ख़ुदा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल -दूर से आकर हमारा वो क़रीबी हो गया

दूर से आकर  हमारा वो क़रीबी हो गया देखते ही देखते किस्मत हमारी हो गया कब मिला , कैसे मिला कुछ भी नहीं मालूम पर चार दिन में वो हमारी जिंदगी भी हो गया अजनबी कोई नहीं रिश्ते बनाकर देखिए कल तलक जो  गै़र था कितना ज़रूरी हो गया अब उसी के नाम से होती […]

गीतिका/ग़ज़ल

मेरा प्यार  बेशक समंदर से भी है

मेरा प्यार बेशक समंदर से भी है मगर गाँव के अपने पोखर से भी है किनारे जो लग करके डूबा सफ़ीना कोई वास्ता क्या मुक़द्दर से भी है तेरे इस चमन की हर इक शै है प्यारी मुझे इश्क़ काँटों के बिस्तर से भी है मेरे तन का बहता लहू बोल देगा तअल्लुक़़ मेरा उनके […]