कविता

नही चलता मेरा मुझपर असर तेरे बिना नही रहती अब मेरी खबर मुझे तेरे बिना जमाने को मुस्कराकर मैँ मिलती रहती हू पर हर मुस्कराहट खिलती नही तेरे बिना तुझे सोचना,तुझे चाहना और तेरा दीदार ही नही रह पाता अब मेरा ध्यान कही तेरे बिना जी तो रही हू ये जिंदगी अपने आप में मगर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका : नारी की व्यथा

तू लाख कोशिश कर मुझे सताने की मैँ नही बनूंगी चीज अब तेरे सजाने की हुई खता जो इश्क़ कर बैठी मैं तुझसे क्यों की कोशिश मैंने तुझे आजमाने की न अब आफताब होगा न सितारों की चाहत न होगी अब जरूरत चिरागों को जलाने की होगी न शिकायत मुझे तुझसे ऐ हमनशीं तेरा मेरा […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका : हिंदी को बढ़ाना है

अपनी हिन्दी भाषा को, आगे और बढाना है पूरे विश्व में इसको, सम्मान दिलाना है हिन्दी की महानता जो, सबसे ही निराली है हर दिल में हिंदी का, दीपक जलाना है क्यूं तोङा जाता हिंदी को ,मरोड़ा जाता हिन्दी को अब इसके खिलाफ, अभियान चलाना है अंग्रेजी को अब तुम, सर पर न चढ़ाओ उनका […]

गीत/नवगीत

गीत : वो इतवार नहीं आता

सबकुछ जी लिया हमने पर वो प्यार नहीं आता मस्ती से गुजरता था जो वो इतवार नहीं आता सुबह सुबह रंगोली से दिन की शुरुआत होती थी पूरा दिन आने वाली उस इक फिल्म की बात होती थी पूरा परिवार साथ बैठे वो मजा अब यार नहीं आता मस्ती से गुजरता था जो वो इतवार […]

गीत/नवगीत

गीत : याद तुम्हारी आती है

सावन के महिने में प्रिय याद तुम्हारी आती है तन पर पङती ये बूंदे फिर मन में अगन लगाती है नही रुकता मन का आवेश हरदम यूं घबराता है तङपन लिये ह्रदय में मेरे तेरा ख्याल सताता है कह नही सकती तुमसे दिलबर आँख छलक ही जाती है तन पर पङती ये बूंदे फिर मन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : महफिल में भी खुद को उदास रखती हूँ

महफिल में भी खुद को उदास रखती हूँ तेरे ख्यालों को मैं अपने पास रखती हूँ अब तो कह देते है मेरे दोस्त भी मुझको कि रुह में भी मैं तेरे अहसास रखती हूँ नही जंचता अब हमें तसव्वुर में तेरे सिवा तुझसे ही मिलन की मैं प्यास रखती हूँ मैं तेरी धङकनो में उतर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तेरी चाहत मेँ अब भी महकता गुलाब है क्यूं कहती है दुनिया कि ये चाहत खराब है इस मीठे दर्द से बच सका ना कोई भी कभी न छूटने वाली ये दर्द भरी शराब है इश्क के मंजर में हम फिर भी डूबते गये अब न कोई सवाल है, न कोई जवाब है ये तेरा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बारिश जैसा जुनून तेरी मोहब्बत में चाहिये मौसम की तरह बदलकर हमें यूं न सताईये मिजाजे इश्क बहक रहा तेरे दीदार की खातिर इक बार ही सही हमें अक्स दिखा जाइये रह जायेंगे हम तन्हा तेरी रुख्सती के बाद इस कदर हमारी चाहत  को न आजमाईये माना कि बहकना इश्क में आसां नहीं होता पर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आंखों से दिलदम का अंदाज जुदा होता है कैसे कह दें हम कि इंसान खुदा होता है माना कि अपनी मस्ती में रहता है आदमी हालातोँ की जंजीरों से हर पल लदा होता है कहने को तो लड़ लेता अपनी तकदीर से पर हाथों की लकीरों मेँ लटका सदा होता है सुख दुख तो पायदान […]

कविता

कविता

बलात्कार की कोई परिभाषा नही होती होती है तो सिर्फ रूहं तक कांपने वाली पीड़ा ह्रदय को छलनी करने वाला घाव जीते जी मर जाने वाली संवेदना और स्वयं से हार जाने वाली घृणित मंशा क्या कुछ नही घट जाता उस एक हादसे में जो झंझोड़ कर रख देता है सारा जीवन अस्तित्व से लड़कर […]