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  • गीत : क्यों पूज्य नारी हो

    गीत : क्यों पूज्य नारी हो

    इससे बड़ी नहीं कोई संतुष्टि अभिमान की नारी रहे बन्धनीय, मात्र अबला बेचारी हो चरित्र का प्रमाण जब राम ही ने मांग लिया कलयुग में मनुओं को, क्योँ पूज्य नारी हो स्वयं जिसने जना है सारे...

  • कविता : प्रेम

    कविता : प्रेम

    मुझे प्रेम नहीं करना था तुमसे प्रेम सीमित कर देता था अधिकार तुम पर.. लज्जा से बना देता था लचीला मुझे.. नवयौवना बना तुम्हे जी लेने से.. रोक दिया करता था मुझे तो वात्सल्यमयी स्नेह से...


  • मैं नारी हूँ

    मैं नारी हूँ

    मैं नारी हूँ मैं नारी हूँ,……………कलियुग से मैं हारी हूँ कौन समझता अब मुझको, किस पद की अधिकारी हूँ बनी पिता की मुश्किल मैं अब, जग समझे बेचारी हूँ हुई पुत्र की मैं मजबूरी,…………….पुत्री की लाचारी...

  • मैं भी डरने लगी हूँ

    मैं भी डरने लगी हूँ

    निर्भया,कैसे लिखूँ तुम्हारी कराह…..कैसे लिखूँ तुम्हारी पीड़ा तुम्हारी चीख़………तुम्हारी पुकार….. ह्रदय को चीर जाता है तुम्हारा द्वन्द…..एक साल हो गया ना आज क्या जानना चाहती हो तुम क्या बदला तुम्हारे बाद………………………………………. कुछ भी नहीं शायद….. आज भी कई विशेषज्ञ करेंगे चर्चा...

  • तुमसे सच कहूँगी आज…..

    तुमसे सच कहूँगी आज…..

    निर्भया, कैसे लिखूँ तुम्हारी कराह….. कैसे लिखूँ तुम्हारी पीड़ा तुम्हारी चीख़……… तुम्हारी पुकार….. ह्रदय को चीर जाता है तुम्हारा द्वन्द….. एक साल हो गया ना आज क्या जानना चाहती हो तुम क्या बदला तुम्हारे बाद………………………………………. कुछ...


  • नहीं  समेटी नहीं जाती पीर अब तो

    नहीं समेटी नहीं जाती पीर अब तो

    नहीं समेटी नहीं जातीपीर अब तोकागजो मेंहर्फ़ों में किस्सों में विचारों में मात्र यहाँ या और कही भी लिख देने भर से नहीं सुलझता ये जाला उलझन का ….. जबसे बदलने लगे हालात मुल्क के महफूज़ नहीं बेटियां...

  • जला आई हूँ मैं

    जला आई हूँ मैं

    जला आई हूँ मैंतुम्हारी रामायणजहाँ पूजा जा रहा थासीता को…बनाकर देवी-स्वरूपानहीं बनना था मुझे सीता नहीं देनी थी अग्नि-परीक्षा ना समाना था.. धरती की गोद में नहीं लेना था.. तमगा कोई पतिव्रता होने का ना भटकना...

  • तुम गए तो मेरी प्यास गई

    तुम गए तो मेरी प्यास गई

    तुम गए तो जैसे प्राण गए, मेरे जीवन की आस गई तर्षित थी मैं जन्मों से,. तुम गए तो मेरी प्यास गई जीवित तो…. अब भी हूँ मैं मैं हर्षित…. भी रह लेती हूँ तुम बिन चिंतन शून्य है पर मैं...