कविता

राष्ट्र बचाए रखना

है गिरधर मेरे राष्ट्र को बचाए रखना इस पर सदा अपनी कृपा बनाये रखना कल कल सरिता बहती जाए जन जन की प्यास बुझाती जाए सदानीरा इनको बनाए रखना है गिरधर राष्ट्र को बचाए रखना सर सरोवर स्वच्छ साफ हो चहुँ ओर हरियाली हो हरे भरे वृक्ष हमारे फलदायी हो खिलते चमन यहाँ बनाए रखना […]

कविता

प्रेम त्याग तपस्या

प्रेम त्याग तपस्या है प्रेम ना रीति है प्रेम ना रिवाज धर्मों से परे जातियों से अलग ये एक अनछुआ अहसास है। प्रेम विश्वास है प्रेम धड़कन है प्रेम भक्ति है प्रेम शक्ति है जिसके प्यार में डूबे दिल बस वही खास है। प्रेम तन की प्यास नही प्रेम आत्मा का बंधन है प्रेम में […]

कविता

ये भूख कहाँ मिलती है?

भूख ये मिलती कहाँ है? आलीशान बंगलो व महलों में ये मिलती है। झोपड़ियों में चिथड़ों में लिपटे नरकंकालों में भूख से बिलखते बच्चें बेबस,लाचार बाप ये कहाँ मिलते हैं। महलों में ये मिलते हैं अन्न उपजाते किसान के घर मे बर्बाद फसल को देख रोता अन्नदाता अमीरों के आगे फैलते हाथ ये कहाँ मिलते […]

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यशोधरा का दर्द

सोता छोड गये भगवन तुम भगवान को पाने को एक बार भी सोचा क्या तुमनें निरपराध अर्द्धागिनी को अरणोदय पर उठी यशोधरा कितनी व्याकुल हुयी होगी खोजा होगा उसने फिर महल के हर कोने गलियारे को अपने मन को उस निरपराध ने कैसे तो समझया होगा बिना बताये छोड गये मन में मलाल रहा होगा […]

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बैचेन दिल

तेरे लिये जो मेरी महोब्बत है लबों पर लायी नही जा सकती क्या करूँ मगर बैचेन दिल का तुझे भूलने को तैयार ही नही रात दिन का गम लिए बैठी हूँ देखने को तुझे तरसती रहती हूँ आँखे हर पल तुझे ढूंढती है याद में तेरी बरसती रहती है महोब्बत तेरी मुझे हासिल नही तू […]

कविता

शीर्षक-मातृ दिवस (माँ)

माँ तुम करुणा का सागर तुम्ही मेरा संसार हो। माँ तुम्ही मेरी गीताLपPपपप माँ तुम्ही वेदों का ज्ञान हो। माँ तुम्ही त्रिदेव हो मेरे माँ तुम्ही ईश आराधन हो। माँ तुम्ही गंगा, यमुना तुम्ही तीर्थराज प्रयाग हो । वर्ण,शब्द तुम्ही हो मेरी माँ तुम्ही मेरी शारदा हो। जल, थल सब तुमसे है मेरे तुम्ही मेरा  […]