कविता

इंसान बंटता चला गया

धरती अम्बर एक सी लहू भी सबका एक का सा फिर भी इंसान क्यों बंटता चला गया सरहदे बंट गयी दिलो पे लकीरे खिच गयी फिर भी इंसान बंटता चला गया धर्म बंट गया जाति बात गयी खून सबका लाल ही रहा सब एक ही है धरती के लाल है पर सबके दिल में अंगार […]

कविता

बर्फ की जिंदगी

बर्फ की जिंदगी कितनी कठिन होती है हर समय पत्थर  बने रहना, धूप की जब किरणे परी तो पिघलना शुरू हो गया बर्फ से मिलती जिंदगी है रिश्ते  जिनको हम बर्फ की तरह कठोर बना देते है हम अपनी मै में खो जाते है कोई भी बड़ा अपनी धूप  रुपी बुद्धि देना भी चाहे, तो हम […]

कविता

प्यास

प्यास बुझ जाती है एक घूट पानी से जो न बुझती है प्यास वो है मृगतृष्णा की जीवन है छलावा ये पता है सबको फिर भी जीने की प्यास है सबको दौलत शोहरत की प्यास बहुत तेज होती है मानवता को मार रिश्तो का खून करती है नए नए संसाधन को जुटाने में लगे है […]

कविता

बचपन की यादें

बचपन की यादें कितनी अच्छी होती हैं आज उन यादों को ताजा करना अच्छा लगता है कहा खो गया वो बचपन वो हसीन दिन जब न होती थी कोई फ़िक्र खेल में जिंदगी के दिन बीतते थे न पढ़ने की फ़िक्र न कुछ करने की फ़िक्र पापा की डाट खाना माँ का लाड सब बहुत […]

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कविता : पाक को करारा जबाब

ऐ वीर जवानों उठ जाओ भारत माँ ने ललकारा है. अब बहुत हो चुका कतले – आम अब सबने ललकारा है कितने निर्दोष आतंकबाद के भेंट चढ़े माँ के लाल सो गए गोद में कब तक सूनी होगी बहनो की आँखे अब बदला लेने की बारी है अब न करो शांति की बात वो भाषा […]

कविता

कविता : गाँधी व शास्त्री को नमन

गाँधी व शास्त्री तुम कहा गए आज आपकी जरुरत फिर भारत माँ को है हर तरफ अराजकता का बोलबाला है , आतंकबाद का बोलबाला है न शांति है न चैन है माँ के आँचल में भारत माँ ढूंढ रही अपने सपूतो को गाँधी व शाश्त्री आप फिर आ जाओ भारत में आज आपका जन्मदिन है […]

कविता

जीवन पानी का बुलबुला

जीवन क्या है? पानी का बुलबुला तो है पाँच तत्वों  से मिलकर बना ये जीवन कब मिटटी में मिल जायेगा कोई नहीं जानता कितने सुख, कितने दुःख सहता है पर जीवन देता है हमेशा हमें नयी ऊर्जा जीने की बचपन से लेकर बुढ़ापे तक, कितनी होती है सुहानी यादें एक हमसफ़र के साथ कीयादो के […]

कविता

चाँद की चमक

चाँद कहता है मुझसे आदमी क्या अनोखा जीव है उलझन खुद पैदा करता है फिर न सोता है, और मुझसे बाते करता है रात भर मेरी चमक में अपने को निहारता है मेरी आगोश में आकर अपनी उलझन भूल जाता है चाँद अपनी चांदनी के साथ हर गम भूल जाता है चाँद पूरी रात सबको […]

कविता

कविता : जीवन

जीवन क्या है? पानी का बुलबुला तो है पाँच तत्वों से मिलकर बना ये जीवन कब मिटटी में मिल जायेगा कोई नहीं जानता कितने सुख, कितने दुःख सहता है पर जीवन देता है हमेशा हमें नयी ऊर्जा जीने की बचपन से लेकर बुढ़ापे तक, कितनी होती है सुहानी यादें एक हमसफ़र के साथ कीयादो के […]

कविता

दोस्त अनमोल होते हैं

दोस्ती अनमोल है दोस्त अनमोल होते हैं दोस्त यादो में, सम्बादो में होते हैं दोस्त गीत ग़ज़ल होते हैं दोस्त न हो जिंदगी सूनी है सारे रंग फीके हैं न होली न दिवाली अच्छी लगती है दोस्त महफ़िलो में संगीत की मधुर धुन की तरह होते हैं हर दर्द में दोस्त साथ होते हैं दोस्त […]