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  • गीत – बॉलीवुड में भांड भरे हैं

    गीत – बॉलीवुड में भांड भरे हैं

    बॉलीवुड में भांड भरे है,, नीयत सबकी काली है.. इतिहासों को बदल रहे,, संजय लीला भंसाली है.. : चालीस युद्ध जितने वाले को ना वीर बताया था..संजय तुमने बाजीराव को बस आशिक़ दर्शाया था.. : सहनशीलता...

  • गीत :  रोहिंग्या

    गीत : रोहिंग्या

    (रोहिंग्या मुसलमानों के बसाए जाने के मुद्दे पर घुसपैठियों की वकालत करने वालों को जवाब देती कविता) भारत का माहौल बुरा है, सब हैं नफरत भरे हुए, दाढ़ी वाले चीख रहे हैं, मुसलमान हैं डरे हुए,...

  • गीत

    गीत

    फिर से वही रवैया अपना, फिर वो ही लाचारी है अमरनाथ के आंगन में जेहादी गोलीबारी है हिन्दू सात मारकर लश्कर, जश्न मनाता कायम है और सूरमा मोदी का दिल अब तक बहुत मुलायम है अमरीका...

  • गीत

    गीत

    (कश्मीर में मस्जिद के बाहर मुसलमानों की भीड़ द्वारा मारे गए निर्दोष DSP अयूब जी की शहादत पर दिल से निकली एक कविता) कश्मीर में आतंक का सामान नहीं हूँ, अच्छा हुआ काफिर हूँ, मुसलमान नहीं...

  • गीत : सत्ता का लकवा मार गया

    गीत : सत्ता का लकवा मार गया

    (कश्मीर में जेहादियों द्वारा सैनिकों को थप्पड़-लात मारकर अपमानित करने पर एक सैनिक की सरकार से अपील को बयां करती कविता) दिल्ली में बैठे शेरों को सत्ता का लकवा मार गया इस राजनीति के चक्कर में...


  • कविता – यूपी से स्पेशल होली

    कविता – यूपी से स्पेशल होली

    (यूपी से स्पेशल होली की शुभकामनायें देती रंगभरी कविता) अब के पहले होली थी बस अख़बारों की होली सत्ता मद में डूबे बस कुछ परिवारों की होली सड़कें टूटीं और बनीं, ठेकेदारों की होली जातिवाद के...

  • गीत – जनता ने ऐलान सुनाया

    गीत – जनता ने ऐलान सुनाया

    (यू पी में बीजेपी की प्रचंड विजय पर तात्कालिक प्रतिक्रिया व्यक्त करती कविता) जनता ने एलान सुनाया यूपी के दरबारों को नही चुनेंगे, लोकतंन्त्र के हैवानों हत्यारों को नहीं चुनेंगे, जाति वर्ग का जाल बिछाने वालों...

  • गीत

    गीत

    (रानी पद्मावत के गौरवशाली इतिहास को दूषित करने की फ़िल्मी साजिश पर संजय लीला भंसाली को राजपूत करनी समाज द्वारा सबक सिखाने का समर्थन करती कविता) कब तक बॉलीवुड के आका, डाका डालेंगे अस्मत पर कब...

  • गीत : बंगभूमि का रंग-भंग

    गीत : बंगभूमि का रंग-भंग

    (बंगाल के एक मौलवी द्वारा मोदी जी के मुंडन का फ़तवा ज़ारी करने पर ममता खातून और उनके चेलों को चेतावनी देती मेरी नयी कविता) बंग भूमि का रंग भंग है, दंगाई हुंकारें हैं शांति निकेतन...