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  • खेवत उर केवट बनि

    खेवत उर केवट बनि

    खेवत उर केवट बनि, केशव सृष्टि विचरत; सुर प्रकटत सुधि देवत, किसलय हर लय फुरकत ! कालन परिसीमा तजि, शासन के त्रासन तरि; कंसन कौ चूरि अहं, वंशन कौ अँश तरत ! हँसन कौ मन समझत,...


  • मोहन कूँ देखन कूँ

    मोहन कूँ देखन कूँ

    मोहन कूँ देखन कूँ, तरसि जातु मनुआँ; देखन जसुमति न देत, गोद रखति गहिया ! दूर रखन कबहुँ चहति, प्रीति करति खुदिइ रहत; डरति रहति उरहि रखति, गावत कछु रहिया ! थकति कबहुँ रुसति कबहुँ, नाचत...