संस्मरण

संस्मरण

एक बार केबीसी में एक लड़का बता रहा था कि मेरी मां की इच्छा की वजह से हम बहन भाई पढाई कर पाये क्यूंकि मां विपरीत परिस्थितियों के कारण पढ नहीं पाई पर उन्होने मन में ठान लिया था कि मैं अपने बच्चों को अवश्य पढाउंगी ! उसकी बात सुन कर मुझे भी अपने पिताजी की […]

हाइकु/सेदोका

हाइकु

{1} सदुपदेश करलो आत्मसात गुरुजनों के [2] दूध औ पानी होते है आत्मसात एक दूजे में {3} सगर पुत्र गंगा अवतरण शिव ग्रहण {4} थोथा उडाय सार आत्मसात हंस समान {5} करो ग्रहण तात मात की सीख जन्म सफल (६) नदी बहती समुंद्र में समाती हो आत्म सात — गीता पुरोहित

कविता

पिता का साया

पिता का साया मानो बरगद की छाया उंगली पकड़कर चलना सिखाया ऊंच नीच का पाठ पढाया पिताजी के बारे में जितना लिखो वह कम है पिता क्या तेरे क्या मेरे बना रहे सबके सिर पर पिता का साया क्या लिखूं क्या बोलूं लिखते हुए आंखें आंसुओं से अवरुद्ध हो गई है कलम साथ नहीं दे […]

लघुकथा

रावण से मुलाकात

कल सुबह अचानक नेहा की  स्कूटी के सामने हट्टा कट्टा दसशीश वाला रावण आ गया, नेहा ने जैसे तैसे ब्रेक लगाये और कहा, ‘अंकल क्या करते हैं ? बीस बीस आंखे होते हुवे भी टकरा गये क्या लड़की देख कर जानबूझ टकराये हो |’ दशानन गुस्से में तमतमा कर बोले, ‘लड़की तमीज से बात कर तुम […]

कविता

पर्व और त्योहार

आए पर्व और त्योहार  लाये उमंग उल्लास चुन्नू मुन्नू हो या दद्दू मैया हो या बहना सबके मन को भाए यह पर्व और त्यौहार तीज और त्यौहार आया तीज का त्यौहार पड़ती बरखा फुहार  झूले अमवा की डाल रचते मेहंदी वाले हाथ  सजती वीरा की कलाई छलके भाई बहन का प्यार  आया ईद का त्यौहार […]

हाइकु/सेदोका

हाइकु

निशाना साधे खड़े बिजूखा पर निशानेबाज === करता रक्षा बिजूखा खड़ा मर्द खेत पक्षी से === रात अंधेरी खड़ा बिजूखा खेत मालिक लगे/ चोर को भ्रम === खड़ा बिजूखा फसल चोर डरे चोरी करते === खड़ा बिजूखा भ्रम पाले बटोही मनहरखे == खड़ा बिजूखा करता रखवाली खेत फसल — गीता पुरोहित

लघुकथा

कहर कोरोना

दादाजी चार पांच साल अस्वस्थता वश पलंग पर रहे फिर कोमा में अंततः परलोक सिधारे, दादी ही उनका सब कार्य करती थी क्योंकि अवश थे नित्य क्रियाओं के लिए भी दादी पर आश्रित थे। रिमझिम दादी को पूजा करते हमेशा भगवान से ये कहते सुनती थी कि हे भगवान हाड गौडा सलामत रखना मुझे चलते […]

इतिहास

पंडित जी

पंडित मोहन लाल जी व्यास यदि दुनिया में होते तो सौ वर्ष के होते | बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी व्यास जी का जीवन काफी संघर्षमय रहा , दस वर्ष की अल्पायु में पालनहार पिता के असामयिक निधन के बाद घर परिवार की जिम्मेदारी इनके नाजुक कंधों पर आ गई , मां विधवा बहन छोटा भाई […]

कहानी

आखिर क्यों ?

सारिका मेरी बालपन की सखी के पति का असामयिक देहावसान सुन मन खिन्न हुवा बैठक में संवेदना प्रकट करने गई सबसे मिली पर सारिका की बड़ी बेटी कहीं नजर नहीं आ रही थी पोछने पर पता चला की वो अभी तक आई नहीं है. लोग खुशर फुसर क्र रहे थे की लो जी बाप के […]

लघुकथा

लघुकथा : कब तक

वर्माजी की बहु फिर से उम्मीद से थी ,पहले एक लड़की थी सो इस बार सब उम्मीद लगाये थे की जरूर लड़का ही होगा | मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था | नर्स ने जब आकर बताया की बधाई हो लड़की हुई है तो ओरतो ने ऐसे घूर कर देखा मानो खा ही जाएँगी किसी […]