इतिहास

पंडित जी

पंडित मोहन लाल जी व्यास यदि दुनिया में होते तो सौ वर्ष के होते | बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी व्यास जी का जीवन काफी संघर्षमय रहा , दस वर्ष की अल्पायु में पालनहार पिता के असामयिक निधन के बाद घर परिवार की जिम्मेदारी इनके नाजुक कंधों पर आ गई , मां विधवा बहन छोटा भाई […]

कहानी

आखिर क्यों ?

सारिका मेरी बालपन की सखी के पति का असामयिक देहावसान सुन मन खिन्न हुवा बैठक में संवेदना प्रकट करने गई सबसे मिली पर सारिका की बड़ी बेटी कहीं नजर नहीं आ रही थी पोछने पर पता चला की वो अभी तक आई नहीं है. लोग खुशर फुसर क्र रहे थे की लो जी बाप के […]

लघुकथा

लघुकथा : कब तक

वर्माजी की बहु फिर से उम्मीद से थी ,पहले एक लड़की थी सो इस बार सब उम्मीद लगाये थे की जरूर लड़का ही होगा | मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था | नर्स ने जब आकर बताया की बधाई हो लड़की हुई है तो ओरतो ने ऐसे घूर कर देखा मानो खा ही जाएँगी किसी […]

लघुकथा

जिंदगी के रंग कई रे

घर परिवार में शादी का माहौल है। सब सजने सवँरने  में  उत्साह से जुटे हुए है। ममता व्यस्त होने का नाटक करती इधर-उधर में लगी हुई है  क्योंकि सजना सँवरना  उसकी किस्मत में नहीं, उसकी जिंदगी राम के जाने के बाद बेरंग, बेनूर हो गई। मेहँदी वाली आई है । सबमें मेहंदी लगवाने की होड़ […]

हाइकु/सेदोका

रामायण के पात्रो पर लिखे मेरे चंद हाईकु

{१} रामायण को गतिमान बनाती तीन देवियां मंथरा औ कैकई सूर पणखा {२] शबरी बेर ही बने संजीवनी प्राण बचाये {३] पत्थर शिला बनी अहिल्या नारी चरण स्पर्श {४} मा की ममता राम जी वनवास भरत राज्य {५} सौतिया डाह मचाई हलचल सुहाग खोया {६} पिता वचन राम-लखन-सीता वन को चले {७} घर का भैदी […]

कविता

कविता : जाने कहां गये वो दिन

जाने कहां गये वो दिन वो गर्मी की रातें वो छत का छिड़काव कर वो पिताजी का ऑफिस से आ सीधे छत पर जाना झिलमिल तारों की छांव सप्त ऋषि मंडल ध्रुव तारों का पिताजी का परिचय कराना जाने कहां गये वो दिन सब मिल बैठ खाना ठंडी बयार में तारों की छाव तले ठंडा […]

सामाजिक

दहेज

शादी के शुभ अवसर पर माता पिता व अन्य रिश्तेदार उपहार स्वरुप कुछ सामान भेंट देने की परंपरा का ही विकराल रुप दहेज है | नवविवाहित जोड़े अपनी गृहस्थी बसा रहे हैं तो कुछ सहयोग करने की प्रथा अब सुरसा के मुंह की तरह फैल गई है | लड़के के माता पिता की ईच्छा रहती […]

हाइकु/सेदोका

गर्मी के चंद हाईकु

{१} आंधी जो आई पसीना सूखा गई गर्मी के मारे {२} ढूंढते पानी पशु पक्षी हैरान गर्मी के मारे {३} कटते पेड़ राहगीर हैरान गर्मी के मारे {४} बरखा नहीं धरा पपड़ा गई गर्मी के मारे {५} हाव बेहाल पशु पक्षी तडपे गर्मी के मारे {६} गर्मी की मार ठंडाई घोट के पी राहत मिले […]

लघुकथा

लघुकथा : मेरा घर तेरा घर

ममता का इकलौता बेटा बहु को लेकर उदयपुर नौकरी के सिलसिले में जाने लगा तो ममता बहुत उदास हो गई, रोने लगी, अकेली क्या करूंगी, मन कैसे लगेगा. तब बेटा बोला माँ उदास क्यों हो रही हो, आते जाते रहेंगे | संचार साधन बने हैं फोन पर बतिया लेंगे और फिर भौगोलिक दुरी मायने नहीं […]

हाइकु/सेदोका

सूर्य पर हायकू

(१) तपती धरा फसल झुलसती तेज है धूप (२) सूर्य की गर्मी झुलसाती बदन सही ना जाये (३) सूर्य किरणें प्रभात का संदेश उजाला फैले (४) रोज उदित सूरज नारायण नव संदेश (५) स्कूल है जाना बालक परेशान तेज है गर्मी — गीता पुरोहित जयपुर