पुस्तक समीक्षा

गुमनाम हीरो को तराशती पुस्तक “नेपथ्य के नायक खंड 1”

आजकल चर्चा में बनी हुई पुस्तक नेपथ्य के नायक खंड 1 विविध क्षेत्रों के 25 ऐसे शख्सियतों की जीवन गाथा है जिन्होंने अपने अपने समय में अपने-अपने क्षेत्रों में व्यवस्था प्रवर्तक कार्य किया था। लेकिन दुर्भाग्यवश उनके कार्यों को वह पहचान नहीं मिल पाई जिसके वे हकदार थे।यह या तो जानबूझकर या अनजाने में उनके […]

इतिहास

शिक्षा को सामाजिक विकास का केंद्र मानते थे शेर-ए-बिहार रामलखन यादव

नरसिम्हा राव सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे स्वर्गीय श्री रामलखन सिंह यादव सैकड़ों विद्यालय और महाविद्यालय खोलने के लिए एकीकृत अविभाजित बिहार (झारखंड समेत)में श्रद्धा के साथ याद किए जाते हैं।बिहार और झारखंड का शायद कि कोई ऐसा जिला होगा जहां राम लखन सिंह यादव के नाम पर कोई शैक्षणिक संस्थान न हो।वे जहां भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

बेटियों से पहचान हमारी

माता-पिता के जान से प्यारी, दादी-दादाजी के राज दुलारी। बड़े लाड से कहें चाची-चाचा, बेटियों से ही पहचान हमारी। जिस घर जन्म लेती हैं बेटियां, वहीं होता शहनाई की तैयारी। बड़े ही अभिमान से कहे भाई, बहन पुरायेगी अरमान हमारी। बेटियों से घर में होती है रौशनी, इन्हीं से तो बनती नई रिस्तेदारी। बड़े ही […]

लघुकथा

ऊपर जाकर तुम्हारी दादी को क्या जवाब दूंगा

स्वाति और सुमन दो बहनें थी। दोनों पढ़ने में काफी होशियार थी। लेकिन यकाएक दो माह के भीतर ही माता पिता के गुज़र जाने के कारण उनपर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा। दोनों के देखभाल और उनकी पढ़ाई लिखाई की दोहरी जिम्मेदारी अब परिवार में एक मात्र बचे सदस्य शिक्षक पद से अवकाश प्राप्त दादाजी […]

गीत/नवगीत

किसान पूछ रहे सवाल

सबको दिखता किसानों को खाते पिज़्ज़ा पराठा, बताओ महीनों से चल रहा संघर्ष हमारा कहां है। लंबे-लंबे आलेख  लिखे हो हुक्मरानों  के पक्ष में, किसानों के हक में तुम्हारा विचार छुपा कहां है। सबको दिखता किसान आंदोलन से हुई परेशानी, कोई बता कर्ज में डूबे किसानों की खबर कहां है। लगातार कलम घींस रहे हो […]

कविता

नव वर्ष के नव किरण

नव वर्ष के,नव किरण संग,नव उमंग आया, देखो देखो देखो फिर से एक नया साल आया ‌। धीरे-धीरे कब और कैसे एक वर्ष गुजर गया, चुनौतियों के बीच कोई कुछ न समझ पाया। कई कार्य पूर्ण हुए वहीं कुछ अधूरा रह गया, कई संकल्प अधूरे रहे हकीकत न बन पाया। इस बीच दुनिया ने कई […]

कविता

चलो एक अखबार निकालें

चलो चलें जी हम सब मिलकर एक अखबार निकालेंगे। जो खबर न कहीं जगह पाती है उसे हम इस में डालेंगे, गरीब,मजदूर,किसान,नौजवान के लिए जगह बनाएंगे। जिनके दिल की बातें दब जाती हैं उसे हम दुनिया को पढ़ाएंगे, चलो चलें जी हम सब मिलकर एक अखबार निकालेंगे। खबर लिखेगा मंगरा,पढ़ेगी बुधिया, शनिचरा से चित्र बनवायेंगे, […]

राजनीति

बिहार में शराबबंदी बच्चों की बचपन छीनने लगी है

बिहार सरकार और उसके मुखिया भले ही शराबबंदी को न्यायोचित ठहराने के लिए शराबबंदी के पक्ष में अनेकानेक प्रमाण प्रस्तुत कर लें और बेशक वे सही भी है तो भी क्या सरकार इस बात से इंकार कर सकती है कि आज बिहार में लगभग हर गांव के कुछ किशोर वय उम्र के बच्चे अवैध शराब […]

राजनीति

अपने उद्देश्यों से भटकती पंचायती राज व्यवस्था देश पर भार साबित हो रही

भारत में स्थानीय स्वशासन के प्रणाली प्राचीन काल से ही अस्तित्व में होने का प्रमाण मिलता है।सबसे स्पष्ट प्रमाण चोल काल में मिलता है।अंग्रेजी शासन के दौर में सर्वप्रथम लॉर्ड रिपन ने 1882 में स्थानीय स्वशासन व्यवस्था लागू करने की घोषणा की जिसे स्थानीय स्वशासन का मैग्नाकार्टा भी कहा जाता है। स्वतंत्र भारत में सर्वप्रथम […]

बोधकथा

मत कहें तुम्हारी परेशानी से हमें क्या लेना

एक गांव में एक साहूकार अपने मां के साथ रहता था। उसके कोई बच्चे नहीं थे।बच्चे नहीं होने के कारण साहूकार अपनी पत्नी से नफरत करने लगा था इसलिए पत्नी भी उसे छोड़कर अलग रहने लगी थी।अब साहुकार गांव का प्रधान बन गया था।साहूकार के घर में एक तोता एक मोर और एक भेड़ उसकी […]