गीत/नवगीत

किसान पूछ रहे सवाल

सबको दिखता किसानों को खाते पिज़्ज़ा पराठा, बताओ महीनों से चल रहा संघर्ष हमारा कहां है। लंबे-लंबे आलेख  लिखे हो हुक्मरानों  के पक्ष में, किसानों के हक में तुम्हारा विचार छुपा कहां है। सबको दिखता किसान आंदोलन से हुई परेशानी, कोई बता कर्ज में डूबे किसानों की खबर कहां है। लगातार कलम घींस रहे हो […]

कविता

नव वर्ष के नव किरण

नव वर्ष के,नव किरण संग,नव उमंग आया, देखो देखो देखो फिर से एक नया साल आया ‌। धीरे-धीरे कब और कैसे एक वर्ष गुजर गया, चुनौतियों के बीच कोई कुछ न समझ पाया। कई कार्य पूर्ण हुए वहीं कुछ अधूरा रह गया, कई संकल्प अधूरे रहे हकीकत न बन पाया। इस बीच दुनिया ने कई […]

कविता

चलो एक अखबार निकालें

चलो चलें जी हम सब मिलकर एक अखबार निकालेंगे। जो खबर न कहीं जगह पाती है उसे हम इस में डालेंगे, गरीब,मजदूर,किसान,नौजवान के लिए जगह बनाएंगे। जिनके दिल की बातें दब जाती हैं उसे हम दुनिया को पढ़ाएंगे, चलो चलें जी हम सब मिलकर एक अखबार निकालेंगे। खबर लिखेगा मंगरा,पढ़ेगी बुधिया, शनिचरा से चित्र बनवायेंगे, […]

राजनीति

बिहार में शराबबंदी बच्चों की बचपन छीनने लगी है

बिहार सरकार और उसके मुखिया भले ही शराबबंदी को न्यायोचित ठहराने के लिए शराबबंदी के पक्ष में अनेकानेक प्रमाण प्रस्तुत कर लें और बेशक वे सही भी है तो भी क्या सरकार इस बात से इंकार कर सकती है कि आज बिहार में लगभग हर गांव के कुछ किशोर वय उम्र के बच्चे अवैध शराब […]

राजनीति

अपने उद्देश्यों से भटकती पंचायती राज व्यवस्था देश पर भार साबित हो रही

भारत में स्थानीय स्वशासन के प्रणाली प्राचीन काल से ही अस्तित्व में होने का प्रमाण मिलता है।सबसे स्पष्ट प्रमाण चोल काल में मिलता है।अंग्रेजी शासन के दौर में सर्वप्रथम लॉर्ड रिपन ने 1882 में स्थानीय स्वशासन व्यवस्था लागू करने की घोषणा की जिसे स्थानीय स्वशासन का मैग्नाकार्टा भी कहा जाता है। स्वतंत्र भारत में सर्वप्रथम […]

बोधकथा

मत कहें तुम्हारी परेशानी से हमें क्या लेना

एक गांव में एक साहूकार अपने मां के साथ रहता था। उसके कोई बच्चे नहीं थे।बच्चे नहीं होने के कारण साहूकार अपनी पत्नी से नफरत करने लगा था इसलिए पत्नी भी उसे छोड़कर अलग रहने लगी थी।अब साहुकार गांव का प्रधान बन गया था।साहूकार के घर में एक तोता एक मोर और एक भेड़ उसकी […]

राजनीति

ग्रामीण पर्यटन में भारत को सशक्त बनाने की अपार संभावनाएं

आज भी भारत वास्तव में गांवों के देश के रूप में ही जाना-पहचाना जाता है।आज भी भारत की आत्मा गांवों में बसती है।प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल बासित ग्रामों की संख्या 593731 है। देश की कुल जनसंख्या का 68.82 फीसदी आबादी इन्हीं ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। जो कि कृषि और उससे […]

राजनीति

किसान आंदोलन का विरोध मानसिक दिवालियापन का द्योतक

जब पूरा विश्व कोरोनावायरस संक्रमण से आक्रांत था उसी समय भारत सरकार खेती किसानी से जुड़े तीन अध्यादेश लाकर भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली कृषि क्षेत्र को नेस्तनाबूद करने पर तुली हुई है ऐसा किसानों का मानना है।जब पूरा विश्व महामारी से परेशान था और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। इस […]

कविता

भईया के बनिहार बने सरकार

मंच मंच हुआ खूब प्रचार,   सत्ता दे दो मालिक अंतिम बार। सेवा करूंगा फिर से पुरजोर,      विनती कर रहा हूं हाथ जोड़। फिर भी जनता एक न मानी,   सबक सिखाने को मन में ठानी। जब आया अंतिम परिणाम,       साहब गिरे औंधे मुंह धड़ाम। जोड़-तोड़ से गद्दी मिल गया, […]

कविता

सिर्फ धनवानों की चिंता

न मजदूरों की चिंता,न किसानों की चिंता, कुछ लोगों को सिर्फ धनवानों की चिंता। न खेती की चिंता,न बागवानी की चिंता, कुछ लोगों को सिर्फ अडानी अंबानी चिंता। न शिक्षा की चिंता,न स्वास्थ्य की चिंता, कुछ लोगों को सिर्फ अपनी स्वार्थ की चिंता। न युवाओं की चिंता,न बुजुर्गों की चिंता, कुछ लोगों को सिर्फ अपनी […]