गीत/नवगीत

मुद्दे अनेक हैं पर कैसे हो समाधान मुद्दा है?

देश के लिए समस्याग्रस्त किसान मुद्दा है, सीमा पर मुस्तैद एक एक जवान मुद्दा है। सबको समान शिक्षा और रोजगार मुद्दा है, अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं की दरकार मुद्दा है। मुद्दे अनेक हैं पर कैसे हो समाधान मुद्दा है? कार्यालयों में घूसखोरी व भ्रष्टाचार मुद्दा है, देशवासियों को ठगते नेता दागदार मुद्दा है। विकृत राष्ट्रवाद व […]

कहानी

लपंडूक बेटों ने ज्योतिषी की नाक कटवाई

अपने घर बच्चों को बेरोजगारी से बिहार के एक जिले के एक गांव संजौली के सीधे-साधे किसान हरेराम गोप जिन्होंने ने कड़ी मेहनत कर अपने घर के सभी बच्चों को देश के जाने-माने यूनिवर्सिटियों से शिक्षा दिलवाई थी बहुत परेशान रहते थे।उनके दरवाजे पर एक दिन वह ज्योतिषी पुनः पधारा जिसने कहा था तुम्हारे बच्चे […]

कविता

वीरांगना ए हिंद झलकरी बाई

22 अगस्त 1830 को धरा पर आई, नाम पड़ा उसका झलकरी बाई। मां जमुना थी पिता सदोबा कोली, आगे तोपची पूरन की बनी हमजोली। जन्म हुआ था यूपी के भोजल ग्राम, पहचान दिलाया स्वतंत्रता संग्राम। बेटों की तरह पालन पोषण पाया, पूरन ने उसे लक्ष्मीबाई से मिलवाया। घुड़सवारी तलवारबाजी की प्रशिक्षण पाई, फिर वह सैनिक […]

कविता

लोकतंत्र की बदसूरती बढ रही

बदसूरत बन रहा लोकतंत्र हमारा, धनबल,जांच, इसको  देता सहारा !! चुनकर आते  हैं जिसके  विरोध में, फिर भी सरकार बनाते गतिरोध मे!! प्रतिनिधियों  को  छुपाना  पड़ता है, विरोधियों को गले लगाना पड़ता है!! किसी के लिए गठबंधन है राजनीति, दूसरे के  लिए वही है मौका  परस्ती!! जहां  प्रतिनिधि बिकने  को हैं तैयार, उनकी कीमत  लाखों […]

कविता

कब बदलोगे भाई

सुबह-सुबह उंघ रहे थे एक आवाज कानों से टकराई। कितना सोते हो आजकल देखो कितनी धूप निकल आई। कुछ फिक्र कर लो गांव शहर की सिर्फ लेते हो क्यों अंगड़ाई। दुनिया बदल रही है तेजी से पर तुम कब बदलोगे भाई। आए हो घर के भाग्य बदलने पर छोड़ नहीं रहे चारपाई। कभी तो कॉपी-किताब […]

कविता

मेरे ख्वाब की खिड़कियां

ख्वाब की खिड़कियां खुल गई हैं उनकी,            जिन्हें रोज शराब और शबाब मिलता है। मेरे ख्वाब की खिड़कियां भला क्या खुलेगी,        हाड़तोड़ मेहनत पर भी न सुराख मिलता है। आज भी जुबान खोलने पर इस लायक          न हो तुम लोग,मुझे यह एहसास मिलता […]

राजनीति

शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माता हैं

संपूर्ण भारत वर्ष में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है.प्रत्येक वर्ष भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा पुरे इज्जत सम्मान और आस्था के साथ बदस्तूर जारी है.यह दिन देश के उन तमाम राष्ट्र निर्माताओं को सम्मान देने है,जो […]

राजनीति

शिक्षक दिवस

नई शिक्षा नीति में बहुत सारी बातें कहीं गई पर जिन कंधों पर देश के कर्णधारों को शिक्षा देने की जिम्मेवारी है उनके वेतन भत्ते और अन्य सुविधाओं के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है। एक ही देश के अंदर विविध प्रकार के शिक्षक और उन्हें दी जाने वाली सुविधाएं एवं वेतनमान […]

गीत/नवगीत

हरियाली के श्रृंगार

जब से बरसल बा सावन के फुहार,     मौसम में आ गईल बा बहार भौजी। सब जीव जंतु करत रहलक मनुहार,      काले बदरा बरसईले बौछार भौजी। सुखल धरती पर गिरते बारिश के बूंद,     खत्म हो गईले सूरज के अंगार भौजी। अब नईखे कहीं भी सूखा के आसार,    वसुंधरा कईले […]

राजनीति

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक सामान्य देशवासी की समाज और देश से उम्मीद

           भारत के प्रत्येक देशवासी उम्मीद करता है हमारा देश एक मजबूत नेतृत्व में संपूर्ण विश्व में एक अलग पहचान बनाएगा।भारत सामाजिक आर्थिक राजनीतिक सांस्कृतिक क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर्ता के रूप में उभरेगा।अपने गुटनिरपेक्षता की पहचान को बनाए रखते हुए विस्तारवादी टकराव के रुख से अलग रहेगा।भारत के अस्मिता को […]