कुण्डली/छंद

पंछी करे न काम…….

  अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। जनमानस के बीच में, नेता है बदनाम।। नेता है बदनाम, रात-दिन गाल बजाते। करते काम न एक, बात की वो हैं खाते।। अनहद भरते गूँज, झूठ बहलाते अकसर मत देना मतदान, छुपे है इनमें अजगर।। ,,,,,,,,गुंजन अग्रवाल “अनहद”

गीतिका/ग़ज़ल

गुंजन की ग़ज़ल

मुद्दत से चाहते थे वो हो गयी हमारी। समझो न इसको कोई बाज़ीगरी हमारी। वो कह रहे हैं हमसे मरते हैं तुम पे कब से उनको तो भा गयी है ये सादगी हमारी। गफ़लत में रात बीती गफ़लत में दिन ये गुज़रा। ग़फलत में जी रहे थे, ग़फलत ये थी हमारी सीरत ने उनको लूटा,सूरत […]

गीत/नवगीत

प्रणय गीत – अनहद गुंजन अग्रवाल

प्रणय निवेदन भेज रही हूं, कर लेना स्वीकार प्रिये। मेरी हर धड़कन साँसों पर कर लेना अधिकार प्रिये। ढूंढ रहे हैं व्याकुल नैना दर्श तुम्हारा मिल जाये। पतझर सा मन में छाया है तनमन बगिया खिल जाए। छूले जो फिर रोम रोम में भर जाए झनकार प्रिये। मेरी हर धड़कन साँसों पर…… बांच अगर तुम […]

भजन/भावगीत

सत्य ही शिव है और सुंदर भी……गुंजन अग्रवाल

सृष्टि का एक तू ही स्वामी है। बात भोले तेरी ही निराली है। सत्य ही शिव है और सुंदर भी। जर्रे जर्रे ने महिमा गाई है। अर्ज मेरी सुनो हे शिव भोले दासी ये दर्शनाभिलासी है। तुम ही आराध्य हो मेरे शंकर मेरी बिगड़ी तुम्हें बनानी है। नूर मिलता है तेरी भक्ति से तुझसे ही […]

कुण्डली/छंद

कुंडलियाँ छ्न्द…. नेकी करना हो गया, बहुत बड़ा अभिशाप।

कुंडलियाँ छ्न्द…. नेकी करना हो गया, बहुत बड़ा अभिशाप। इस कलियुग में है नही, इससे बढ़कर पाप। इससे बढ़कर पाप, मिलेगी मिट्टी काया। कैसे हो निर्बाह, जहां ठगनी है माया। रिश्ते नाते गौण, न बाकी “अनहद” रेकी। कलियुग का अभिशाप, न करना अब तू नेकी। अनहद गुंजन 24/11/18

मुक्तक/दोहा

जात पात का अंतर हमक़ो समझाया सरकार ने…

गर्म बहुत हालात किये कुर्सी के पहरेदार ने। आरक्षण की खातिर मिलने वाले उस अधिकार ने। कौन धनी है ऋण लेकर भी कौन यहाँ कंगाल है- जात पात का अंतर हमक़ो समझाया सरकार ने। अनहद गुंजन 08/09/18  

कुण्डली/छंद

शुभ कृष्णजन्माष्टमी …जिद्दी लल्ला

#जिद्दी_लल्ला….😊 रूठ गयो है कान्हा मेरो थकी मना महतारी। माखन मिस्री से न माने लगी बुरी लत भारी। जिद कर बैठो ऐंठ के बैठो नन्हों कान्हा मेरो- फोन दिलाय दे मोकू बस तू मैया मोरी प्यारी। खीझ गयी फिर मैया झट से बोली चन्दा ला दूँ। लेकिन सुन ले लाला तोकूँ फ़ोन कभी मैं ना […]

गीत/नवगीत

परम आदरणीय अटल बिहारी बाजपेयी जी को समर्पित शब्द सुमन…

अटल क्यूँ मौत होती है मौत भी आज है रोई। बिलखती भारती माँ है लेखनी मौन हो सोई। बड़ा गमगीन है सारा यहाँ अभिसार भारत का। तिरंगे झुक गए पल को गृह अंधियार भारत का। समय के मोड़ पर आकर दगा दे ज़िंदगी खोई। अटल क्यूँ मौत होती है मौत भी आज है रोई। भाल […]

कुण्डली/छंद

कुंडलियाँ….

आँगन मन  इठला रहा, एक अधखिला फूल। घात अमित्र सम वात की, चुभा गयी थी शूल। चुभा गयी थी शूल, फूल मुरझाया ऐसे। यत्न वृथा सब आज, खिला न पहले जैसे। “अनहद” महत विषाद, लगे ये सूना कानन। मुरझाया था फूल, चहकता कैसे आँगन। ……अनहद गुंजन

कुण्डली/छंद

कुंडलियाँ छ्न्द……

  लगता मेघों ने किया, गठबंधन मजबूत। इंद्रदेव का आज तो, बना दिवाकर दूत। बना दिवाकर दूत, समय पर हर दिन आता। तांडव करता रोज, उगल के ज्वाला जाता। जले जलाशय कुंड, विकल हो मानव जलता। गठबंधन मजबूत, किया मेघों ने लगता। *अनहद गुंजन 26/06/18*