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  • कहमुकरियाँ

    कहमुकरियाँ

    रात अँधेरी वो था आया मेरा मन कुछ कुछ घबराया देख भोर को छुपता मांद क्या सखि प्रेमी..? न सखि चाँद। अधरों की बढ़ती है प्यास। कैसे कह दूं सब अहसास मन में उठती प्रणय उमंग।...




  • कुंडलियाँ छ्न्द

    कुंडलियाँ छ्न्द

      #आधुनिकता नैतिक मूल्यों को रखा, बड़े गर्व से ताक। खूब उड़ाई धूल में, संस्कारों की खाक। संस्कारों की खाक, धूसरित करती माया। चकाचौंध पुरजोर, आधुनिकता की छाया। “अनहद” दौड़ें दौड़, करें भी काम अनैतिक। रखें...


  • “सरस्वती वंदना”

    “सरस्वती वंदना”

      नमामि मात शारदे, नमामि मात शारदे। विनाश काम क्रोध मोह लोभ मात मार दे। सदैव सत्य लेखनी लिखे डरे न सार दे। अनेक भाव शब्द और शुद्ध से विचार दे। उपासना करूँ प्रभात से बनी...


  • जिद्दी गुड़िया रानी

    जिद्दी गुड़िया रानी

    (सार ललित छ्न्द) हठ कर बैठी गुड़िया रानी, चाँद मुझे दिलवा दो। दादी बाबा नाना नानी, चाँद मुझे दिलवा दो। छोड़ दिया है दाना पानी, चाँद मुझे दिलवा दो। करती रहती आनाकानी,चाँद मुझे दिलवा दो। चाँद...