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  • कुछ नहीं

    कुछ नहीं

    खाना खाने के लिए मेरी अपनी अकेले की जगह है और वोह है किचन टेबल के साथ। यहाँ मेरे लिए एक डिसेबल चेअर है। यों तो घर में कहीं भी बैठ कर खा लेता हूँ लेकिन मेरी आसानी...


  • दारी

    दारी

    दारी, तांगे वाले को हमारे गाँव के सभी लोग जानते थे। जब पहली दफा हमारे गाँव से शहर को सड़क बनी थी तो उस वक्त अभी कोई बस नहीं होती थी। यह दारी ही था जिस...



  • गुरदई

    गुरदई

    गुरदई, सारे मुहल्ले की रौनक होती थी। उस की उम्र कितनी होगी, किसी को कभी ख्याल ही नहीं आया। उमर पूछ कर करना भी किया था, उस के मुंह और कलाइओं से ढुलकता हुआ मांस ही...