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  • दारी

    दारी

    दारी, तांगे वाले को हमारे गाँव के सभी लोग जानते थे। जब पहली दफा हमारे गाँव से शहर को सड़क बनी थी तो उस वक्त अभी कोई बस नहीं होती थी। यह दारी ही था जिस...



  • गुरदई

    गुरदई

    गुरदई, सारे मुहल्ले की रौनक होती थी। उस की उम्र कितनी होगी, किसी को कभी ख्याल ही नहीं आया। उमर पूछ कर करना भी किया था, उस के मुंह और कलाइओं से ढुलकता हुआ मांस ही...





  • अमृत

    अमृत

    अर्धांगिनी साहबा एक दिन गुरदुआरे से आई। अपने हैंड बैग से उस ने छोटी सी एक शीशी निकाली और बोली,” यह लो थोह्ड़ा सा अमृत पी लो, गुरमीत कौर इंडिया से लाइ है और यह अमृतसर...