Author :



  • वोह दिन !

    वोह दिन !

    आज पहली दफा किसी ने अकबर से उस की पिछली ज़िंदगी के बारे में पूछा था। अकबर अब 80 साल का बज़ुर्ग हो चुक्का था। बाबा जी, मैं पाकिस्तान के उस इतहास को जानना चाहता हूँ...

  • जूते !

    जूते !

    बचपन की एक बात याद हो आई। गाँव में एक गरीब चर्मकार हुआ करता था।  वोह शराब बहुत पीता था। शराब पी कर वोह अक्सर कीचड़ में गिर जाता था । गांव के कुछ लोग कहते,...

  • ईअरर्फ़ून

    ईअरर्फ़ून

               गुरदीप, अपने माँ बाप का इकलौता बेटा था। माँ बाप का लाडला और पढ़ने में बहुत हुशिआर था। यूँ तो गुरदीप सारे रिश्तेदारों और दोस्तों में हरमन पियारा था लेकिन अपने माँ...



  • आँखें

    आँखें

    रौशनी पंद्रा सोला वर्षय एक खूबसूरत लड़की तो थी ही, मगर इस से भी ज़्यादा फुर्तीली काम काज में माहिर और गाने में सुरीली आवाज़ की मालिक थी। हर सुबह वोह माँ के साथ बाबा नानक...

  • कुछ नहीं

    कुछ नहीं

    खाना खाने के लिए मेरी अपनी अकेले की जगह है और वोह है किचन टेबल के साथ। यहाँ मेरे लिए एक डिसेबल चेअर है। यों तो घर में कहीं भी बैठ कर खा लेता हूँ लेकिन मेरी आसानी...