लघुकथा

यहाँ चाह , वहां राह

पंजाबी के एक महान कवी महोदय मेरे फेस बुक फ्रैंड हैं जो निउयौर्क में रहते हैं। वोह अपनी कविताएं लिख कर हर रोज़ फेस बुक पर पोस्ट करते हैं और मैं भी उन की कविता पढ़ के अपने विचार लिख देता हूँ। एक दिन उन की एक कविता पढ़ के मुझे बहुत मज़ा आया और […]

कहानी

धरम करम

शेर सिंह पक्का नास्तिक था। उसकी पत्नी सुरजीत कौर का अपने धर्म में विश्वास तो था, लेकिन शेर उसको गुरदुआरे के सिवा कोई और साधू संत या डेरे पे जाने नहीं देता था। सिख धर्म की मर्यादा के अनुसार उसने अपने घर में कभी भी कोई अखंड पाठ या अन्य रसम कराने की इजाजत नहीं […]

लघुकथा

नई सोच

                     रामू की नौकरी तो बहुत अच्छी थी लेकिन जो उस को शराब और सिगरट की आदत थी उस ने घर का सारा महौल विगाड़ कर रख दिया था। उस की बीवी और दो बच्चे उसे एक अजनवी की तरह देख कर एक तरफ हो जाते […]

कविता

नव वर्ष मुबारक हो !!!!

1.कामयाबी की दुआ जैसे, जिस हाल में उसने रखा है, खुश रहने की कोशिश करता हूं, धीरे-धीरे ही सही आगे बढ़ते रहने की कोशिश करता हूं, जो जिस स्वभाव का है, उसे वैसा ही स्वीकारने की कोशिश करता हूं, नए साल में सबको मिलें खुशियां अपार, सबके लिए कामयाबी की दुआ करता हूं.

कविता

और मुझे जीना है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

कहाँ था तब, कहाँ हूँ अब न सवाल सीधा न जवाब सीधा शुरू करूँ कहाँ से विराम लगाऊं कहाँ समय ने ही तो मुझे सींचा. गाँव में जन्मा-पला, खेला-खाया खेतों में काम किया फिर शहर में पढ़ा, इंकलाब आया जोर-शोर से, विलायत ने मुझे कुछ और गढ़ा. धन भी मिला, मज़े भी किये, शादी भी […]

संस्मरण

मेरी कहानी 167

मैं और गियानी जी उठ कर गियानी जी के कमरे में आ गए। यह कमरा घर का फ्रंट रूम ही था। वैसे तो यह कमरा महमाननिवाज़ी के लिए था लेकिन गियानी जी के लिए यह कमरा सब कुछ था, यहाँ अपने दोस्तों से वे गियान गोष्ठी भी किया करते थे और स्ट्डी रूम के तौर […]

लघुकथा

किसी की मदद करने से आप को ख़ुशी मिलती है

लंडन में हमारी बेटी पिंकी को एक दिन काम से छुटी थी और उसी दिन उस के बेटे यानी हमारे दोहते को भी छुटी थी। दुपहिर के वक्त दोनों माँ बेटा एक दूसरे को किया खाया जाए, किया खाया जाए, पूछने लगे। तो बेटा सन्नी बोला, ” माम, आज हैम सैंडविच खाने को जी चाहता […]

संस्मरण

एक बिदेसी की दास्ताँ !

राजेश कोहली से मेरी दोस्ती तब से थी जब हम दोनों ने एक ही दिन इंगलैंड की एक बस कम्पनी में काम शुरू किया था लेकिन हम एक दूसरे के घर कभी नहीं गए थे क्योंकि जिस घर में वोह रहता था वोह किसी और का था और राजेश ने उस में एक कमरा किराए […]

लेख

विक्लांघ लोग सर उठा कर जियें

मैं एक डिसेबल हूँ और घर में एक रौलेट जिस को तीन पहिओं वाला वाकिंग फ्रेम भी कह सकते हैं, के साथ चलता फिरता रहता हूँ। एक गंभीर रोग के कारण मेरे शरीर की शक्ती भंग होने से इस के बगैर मैं एक कदम आगे नहीं जा सकता क्योंकि मेरा बैलैंस बिलकुल ही ज़ीरो है। […]

लघुकथा

एक बिदेशी की दास्ताँ

बृद्धाश्रम में पढ़ा पड़ा देव राज अपने उन दिनों को याद कर रहा था, जब वोह गाँव से इंगलैंड के लिए रवाना हुआ था। चार एकड़ ज़मीन पर खेती करके घर चलाना कितना मुश्किल था। उस की पत्नी माया ने भी कितना पसीना वहाया था, पती के कंधे से कन्धा मिला कर खेतों में काम […]