मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

रफ्ता रफ्ता खो गया, दिल का चैन करार। रफ्ता रफ्ता हो गया , मुझको उससे प्यार। जब  से  मेरी  हो गयीं , उससे आँखें चार। मैं  उसका  बीमार  हूँ , वो   मेरी   बीमार। बुझा बुझा रहने लगा, तब से दिल ये यार। जबसे उसने प्यारको,नहीं किया स्वीकार। नहीं समझना तुम इसे,दिलबर का इंकार। अक्सर  होती  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेरुखी देख शर्म सार गये। आज महफ़िल से अश्क बार गये। दिल की बाज़ी भले ही हार गये। हो के वो और बावकार गये। एक ग़लती उन्हें मिली क्या कल, तान तानों का तीर मार गये। खूब उनको सजा के रक्खा है, जो बना कर के यादगार गये। ज़ख़्म खाकर नहीं रुके हरगिज़, पाँव उस […]

कविता

करोना ‌

अनदेखे  दुश्मन  से  अपनी। जारी  है इक  जंग  बड़ी सी। नाम   करोना ‌ उसका  यारो, लड़नी है ये मिलकर सबको। साधन  जो   उपयोग  कऱेंगे। साधन बिन भी खूब  लड़ेंगे। जीना  मरना  जो  भी  होगा, भारत   वासी   साथ   रहेंगे। — हमीद कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

है राह इश्क़ की ये क़दम रख संभाल कर। काँटे क़दम क़दम पे हैं चल देखभाल कर। वो आ रहा है एक मुसीबत को टाल कर। दूजी खड़ी है सामने सीना निकाल कर। रखिये न ढेर काम का निपटाइये उसे, बढ़ता तनाव काम को पेंडिग में डाल कर। अब भी नहीं यक़ीन उसे हो रहा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जोर नाहक ही लगाने  की ज़रूरत क्या है। बेसबब  शोर  मचाने  की  ज़रूरत क्या है। ज़ख़्म इक रोज़ लगाने की ज़रूरत क्या है। कह के  गद्दार  सताने  की ज़रूरत क्या है। आपका हुस्न ही काफी है रिझाने के लिए, लुक नया रोज़ बनाने  की ज़रूरत क्या है। जब नहीं राज़ कोई है  तो छुपाते  क्यूँ […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

देश  हमारा  एक  है, जिसका  भारत  नाम। प्यार मुहब्बत से रहो,नफरत का क्या काम। डर  ही  तो  है आपका, कुछ का कारोबार। दुनिया  यारो  हो  गयी , एक बड़ा  बाज़ार। गाली  देते   फिर  रहे , सब  को  बारम्बार। मुझको उनका लग रहा ,नफरत कारोबार। किरदारों पर ठीक से,करिये  ज़रा  विचार। अच्छों को  ही  दीजिये,वोटों  का  […]

गीतिका/ग़ज़ल

होली

गुनगुनाओ  कि  आ  गयी  होली। खिलखिलाओ की आगयी होली। हर तरफ  मस्तियों का आलम है, हिंद आओ  कि आ   गयी होली। मानिये  मत   बुरा  ज़रा  सा भी, ग़म भुलाओ  कि आ गयी होली। खेत  खलिहान और  घर आँगन, जगमगाओ  कि आ  गयी  होली। नफ़रतें  भूल  कर   सभी   यारों, दिलमिलाओ कि आ गयी होली। दूर  शिकवे  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर कोई सिर्फ रौशनी से मिले। भूल कर भी न तीरगी से मिले। सादगी से उन्हें बड़ी उल्फत, जब मिले उनसे सादगी से मिले। उससे जब से हुई मेरी अनबन, फिरनहरगिज़ कभीकिसी सेमिले। आज लहजा अजीब था उसका, ये लगा एक अजनबी से मिले। बात अच्छी बुरी कहूँ हँस कर, ये हुनर मुझ को शायरी […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

किस तरह हो पुर भला। जो हुई पैदा खला। आपका जाना हमीद, इक बड़ा है मसअला। साथ सच के सदा खड़े रहना। झूठ को सच नहीं कभी कहना। सच को ज़ेवर बना बना पहनो, इससे बेहतर नहीं कोई गहना। एक से एक हैं जब यहाँ हस्तियां। डूबती क्यूँ भला फिर यहाँ कश्तियां। आम जनता सिसकती […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चलना हल्की चाल मुसाफिर। मत होना बे हाल मुसाफिर। संकट है विकराल मुसाफिर। काम नहीं अब टाल मुसाफिर। दुख तेरा क्या समझेगा वो, जिसकी मोटी खाल मुसाफिर। एक क़दम तक भारी उसको, इतना है बेहाल मुसाफिर। जिस पर तेरा आज बसेरा, काट नहीं वो डाल मुसाफिर। ज़ुल्म ज़बर के जो मारे हैं, बन जा उनकी […]