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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नज़र से नज़र को बचाकर तो देखो। नज़र से नज़र तुम चुराकर तो देखो। लड़ो  मत  सदा  निर्बलों  से  लड़ाई, बड़े  दुश्मनों  को  हराकर  तो देखो। इबादत समझकर  करो जग भलाई, कभी यार सबकाभलाकर तो देखो।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मुहब्बत  की  ज़रूरत है। ये इक तन्हा हक़ीक़त है। बुलन्दी पर कहाँ थी कल, कहाँ  आखिर  मईसत है। नहीं कहते ज़बां से कुछ, हमारी   ये    शराफत  है। जो  उछला नाम मी टू में, किसी  की ...

  • ग़ज़ल 

    ग़ज़ल 

    आदमी  गर   ज़हीन   है   तो है। सबको उसपर  यक़ीन  है  तो है। सोचता   वक़्त  से  बहुत   आगे, सोच  उसकी   नवीन  है   तो है। तर्क  गढ़ता   नये   नये   हर दम, ज़ह्न  उसका   महीन   है   तो है। आदमी ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हर  तरफ  पैदा  करे  डर   कौन है। माॅब लिंचर  यां  सितमगर  कौन है। हार को स्वीकारता  हरगिज़ न जो, दिलकेअन्दर का सिकन्दर कौन है। कहकहों के सब यहाँ तालिब दिखे, देखता   ग़मगीन   मंजर   कौन  है। दूसरों ...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    आत्म प्रसंशा  से  नहीं, बनती  है  पहचान। सब करते तारीफ जब,तब मिलता सम्मान। पुख्ता  होती  है तभी,‌ रिश्तों  की  बुनियाद। प्यार मुहब्बत की अगर,उसमें  डालो खाद। चेला अब मिलता नहीं, मिलते सब उस्ताद। चाहत हो  जब...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ज़हनो दिल को संवारती आँखें। आरती   सी    उतारती   आँखें। अब भी लगतीं पुकारती आँखें। तेरी  दिलकश  शरारती  आँखें। देख  उनको  सुकून  मिलता है, मैल  दिल  का  बुहारती आँखें। एक मुद्दत  गुज़र गयी  लेकिन, याद अब...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बाढ़   में   सब  बहा   देखते   देखते। क्या से क्या  हो गया  देखते   देखते। सुब्ह निकला जला राह अपनी चला, शाम  तक  जा  ढला  देखते  देखते। इश्क़ जबसे हुआ तनबदन खिलगया, हो   गयी    चंचला    देखते ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    समय  से  न पहले  यूँ  जाया  करो। नहीं  इस   तरह  से   सताया  करो। ज़रूरत  पे कुछ  काम आया  करो। न ज़्यादा  किसी को  सताया  करो। यूँ ही मिल के मुझसे न जाया  करो। कभी  घर  भी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    खूब  सराहूँ  अज़मत को। अल्ला  तेरी   रहमत  को। चलनी  भीतर   दूध   दुहें, कोस रहे  हैं  किस्मत को। सच को सच  ही कहता है, दाद  तेरी   है  हिम्मत को। अच्छी  दुल्हन  चाहें  सब, ढूंढ  रहे  पर   दौलत ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    अश्क बहाकर आँख भिगोना। छोड़ो   अब  ये   रोना   धोना। हँसते    रहना   बाहर   बाहर, अन्दर  अन्दर  छुपकर  रोना। अश्क नहीं  बाहर  से दिखते, भीग रहा पर दिल का कोना। रहना  जिसको  जग में आगे, सीखे कब...