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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    उनके  दस्तूर  सबसे  निराले  रहे। जान  लेवा  सदा  रोग  पाले  रहे। धुनहमेशा जो मंज़िलकी पाले रहे। पाँव में हर समय उनके छाले रहे। साफ किरदार उनका रहा हर घड़ी, साथ पर  ज़िन्दगी भर  बवाले रहे। साफ़ ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इस वक्त  रचें आओ  कोई मिल के कहानी। आकाश  में बादल हैं  बड़ी ऋतु है  सुहानी। महफ़िल है सजी शेरो सुख़न की है रवानी। अब  बात  कोई  उनसे  नहीं होगी ज़बानी। जो लिख न  सके कोई ...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    आज़ादी का  अपहरण , करे जहाँ सरकार। तर्क  बगावत  का  वहाँ , पाता  है  आधार। ज़र  के  भूखे  भेड़िए , चन्द ज़मीर  फरोश। पै दर पै दिखला रहे , फिर से अपना जोश। अगर चाहिए ज्ञान...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जश्न सब  ज़िन्दगी  के मनाया करो। बाँसुरी  चैन की  मिल बजाया करो। सख़्त मेहनत करो मुस्कुराओ सदा, मुश्किलों  को हँसी  में उड़ाया करो। भाई को  भाई से  जो मिलाते मिलें, हौसला उन सभी  का बढ़ाया करो।...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    आत्म प्रसंशा  से  नहीं, बनती  है  पहचान। सब करते तारीफ जब,तब मिलता सम्मान। पुख्ता  होती  है तभी,‌ रिश्तों  की  बुनियाद। प्यार मुहब्बत की अगर,उसमें  डालो खाद। चेला अब मिलता नहीं, मिलते सब उस्ताद। चाहत हो  जब...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जो हमको ज़माने से अब तक मिला है। ज़माने   को   हमने   वही  तो  दिया है। कहीं  कुछ  बुरा  तो  यक़ीनन   घटा हैे। मेरा  दिल  सवेरे  से  कुछ  अनमना है। बयां  उसका  पूरा   सियासत   भरा  है। वो...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    आ के बैठा  हूँ किनारे आ सको तो पास आओ। मन तुझे ही बस पुकारे आ सको तो पास आओ। एक पल सोया नहीं हूँ  रात भर जागा तेरे बिन, हैं  गवाही   में  सितारे  आ सको...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बड़ी  बे  अदब  है   चुनावी  सियासत। बुराई  की  करते  फिरें  सब  हिमायत। सियासत में बाक़ी नहीं अब  शराफत। कहाँ तक  सुधारेगी  उसको अदालत। दिखावे की हरगिज़ नहीं है  इजाज़त। दिखाते फिरो मत यहाँ तुम  नफासत। करेगा ...

  • बजट के बतोले

    बजट के बतोले

    नहीं मिल सका आम जनता को कुछभी, हमें   बस   सुनाये    बजट   के   बतोले। किया   तेल   महँगा   भरी   ज़ेब  अपनी, हमें   कुछ  न  भाये   बजट   के  बतोले। बताये   है   शेयर   का  बाज़ार  गिरकर, तनिक  भी   न ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    साथ  तेरा  अगर   पायेंगे  दूर तक। तब यक़ीनन सनम जायेंगे दूर तक। उलझनों से निजी  जब उबर पायेंगे, देख तब  ही कहीं  पायेंगे  दूर तक। कल तलक जोहुआ वोहुआ सोहुआ, अब न धोखे मियाँ खायेंगे  दूर...