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  • कहमुकरी

    कहमुकरी

    हाथो   हाथ   लिये   है   फिरती। दूर  कभी  ना   खुद  से   करती। पाकर   उसको   रहती   गलगल, कासखि साजन, नासखि मोबल। — हमीद कानपुरी परिचय - हमीद कानपुरी पूरा नाम - अब्दुल हमीद इदरीसी वरिष्ठ प्रबन्धक, सेवानिवृत पंजाब...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    बदअमनी का हर तरफ,लगा हुआ अम्बार। घोड़े  अपने   बेच  कर , सोता  चौकी दार। समझाये   कोई   मुझे , मँहगाई   का   राज़। आखिर क्यूँ मँहगा हुआ,चन्द दिनों में प्याज़। पाँव  बढ़ाते  ही  चलो, फूल मिलें या खार।...

  • गजल

    गजल

    सामने  जो   कयाम   हो   जाता। नज़रों नज़रों  सलाम  हो  जाता। जाम  का   इंतिजाम   हो  जाता। जश्न  का  एहतिमाम   हो  जाता। बज़्म  में  जो   सनम चले   आते, एक  ताज़ा   कलाम   हो  जाता। आ  गया  है  रक़ीब  महफ़िल ...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    बाल न बांका हो कभी,  टूटे  ज़रा न आस। पालन हारे  पर  रखे ,  मानव  जो विश्वास। झेलेंगे   हमले  नये , खान   बाजवा  पाक। सूतक की  अब  मार से, हो जायेंगे खाक। पूरी ताक़त जोड़ कर,नहीं...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    फ़र्ज़  सरकार का  अदा  न हुआ। सिर्फ बातों से कुछ भला न हुआ। खाक़ ग़ज़लें  कहेगा महफ़िल में, शायरी का   जिसे नशा  न हुआ। दूर  मुझसे  वो  हो  गया  लेकिन, दर्द  उसका  मगर जुदा  न हुआ।...

  • बालमन

    बालमन

    जोश सब  में भरे  बालमन। शाद दिल को करे बालमन। खौफ रखता  परे  बालमन। कब किसी से  डरे बालमन। प्रेम की  जब हवा आ  लगे, फूल  जैसा   झरे  बालमन। प्रेम का  खाद  पानी  मिले, खूब जमकर...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    लफ्फाज़ी  होती  रही , हुई  तरक़्क़ी  सर्द। समझ नहीं  ये पा  रहे , सत्ता  के  हमदर्द। अबलाओं पर ज़ुल्म कर, बनते हैं जो मर्द। निन्दा जमकर  कीजिये , मिलेंं जहाँ बेदर्द। डंका अब बजने लगा ,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    उस पे  मुझको तनिक भी भरोसा नहीं। जिस ने  अच्छा  कभी  भी परोसा नहीं। तुम  जिन्हे  चाहते  हो  मिटाना  यहाँ, वो  बड़े  सख्त  जां  हैं  समोसा नहीं। अनमनी सी करे जो भी कोशिश यहाँ, कामयाबी  का ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नशीली तेरी जब नज़र साथ होगी। मुहब्बत की तब रहगुज़र साथ होगी। रहेगी ये मस्ती यूँ ही ज़िन्दगी भर, क़दम दर क़दम हमसफ़र साथ होगी। न तन्हा रहूँगा कभी ज़िन्दगी में, तेरी याद आठो पहर साथ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नफ़रतों  के   दर  हिलाना  चाहता हूँ। मुल्क को फिर  जगमगाना चाहता हूँ। दिल नहीं हरगिज़ दुखाना  चाहता हूँ। वो   मनायें    मान  जाना   चाहता हूँ। जश्न   सारे    ही   मनाना  चाहता हूँ। गीत  ग़ज़लें   खूब   गाना ...