गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अपना चेहरा न ग़मगीं बनाया करो। वक्त  कोई  भी  हो  मुस्कुराया करो। साथ चाहे न चलकर के जाया करो। रास्ता   ठीक  लेकिन  बताया  करो। इस तरफ भी कभी यार आया करो। सिर्फ मुझको नहीं  घर बुलाया करो। मत  सवालात  उन पर  उठाया करो। दोस्तों   को  नहीं   आज़माया  करो। हर शिकायत को हँसकर भुलाया करो। जब  […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

अब मत हरगिज़ ढूढिये, पहले वाली बात। चाल चलन बदले सभी,बदल गये हालात। ख़ुद्दारी  को  भूलकर , करते  हैं  फरियाद। करने में  कुछ भी  नया, नानी आती  याद। बुझी बुझी है ज़िन्दगी,लाये कुछ जो ओज। पूरी  शिद्दत  से  उसे, आज  रहे  हैं  खोज। कैसे  भी  हालात  हों, करिये  नित  संघर्ष। इसकेबिन मुमकिन नहीं,मानवका उत्कर्ष। सभी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अभी मर्ज़  की  कुछ  दवाई  नहीं है। कहीं भी  ‌यूँ लाजिम ढिलाई  नहीं है। मुखालिफ़  वही हैं  नई  योजना  के, कि हिस्से  में जिनके मलाई  नहीं है। नई  खूबियों  का  पता हो  भी कैसे, नई  खेप   जिसने   उठाई  नहीं  है। बहुत देर  तक साथ देगा  नहीं फिर, जो कपड़े की उम्दा सिलाई नहीं है। भला […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मत  बैरी  जग को  बतलाना। जब शाम ढले तब आ जाना। नाम  वतन का  यार  डुबाना। इससे  तो अच्छा  मर  जाना। शायद   है   कोरोना   कारण, चेहरों पर इक भय  अंजाना। लड़ना भिड़ना ठीक नहीं अब, पहले दुश्मन  को  समझाना। हम सबसे क्या कुछ ‌कहता‌ है, शहरी  पौधों   का  मुरझाना। — हमीद कानपुरी

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

अब मत हरगिज़ ढूढिये, पहले वाली बात। चाल चलन बदले सभी,बदल गये हालात। ख़ुद्दारी  को  भूलकर , करते  हैं  फरियाद। करने में  कुछ भी  नया, नानी आती  याद। बुझी बुझी है ज़िन्दगी,लाये कुछ जो ओज। पूरी  शिद्दत  से  उसे, आज  रहे  हैं  खोज। कैसे  भी  हालात  हों, करिये  नित  संघर्ष। इसकेबिन मुमकिन नहीं,मानवका उत्कर्ष। सभी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुली आँख से ख़्वाब देखा करेंगे। उन्हें हर  तरह मिल के पूरा करेंगे। सही बात कहना  तो जारी रहेगा, न बेजा मगर कोई शिकवा करेंगे। सजाते    रहेंगे   सजाते    रहे  हैं, चमनमें सुमनबन केमहका करेंगे। वतन के  लिए जान देंगे यक़ीनन, वतनको कहींभी न‌ रुसवा करेंगे। अदूचढ़केआयाजोअबसरहदोंपर, उसे बीच  से  चीर  टुकड़ा  करेंगे। — […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वक्त  बदला तो  सूरत बदल  जाएगी। एक दिन  ये जवानी भी ढल  जाएगी। खुद  पे  इतना  न इतराइये  अनवरत, रफ्ता  रफ्ता  कहानी  बदल  जाएगी। ज़िन्दगी  की कहानी  है डगमग ज़रा, रब ने चाहा तो फिरसे संभल जाएगी। एक पल को भी गाफिल‌ ज़रा जो हुए, हाथसे फिर सफलता फिसल जाएगी। ज़िन्दगी  मौत की  है अमानत  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बदगुमानी  से  भरी  कुछ  शोखियां अच्छी लगीं। उसके मुंह से  हर तरह की गालियां अच्छी लगीं। खूबियां अच्छी लगीं कुछ  खामियां अच्छी लगीं। साथ उसका  जब मिला रुसवाइयां अच्छी लगीं। आज  चेहरे  पर  उतरतीं   धारियां  अच्छी  लगीं। उसके चेहरे  की सभी अब  झाइयां अच्छी लगीं। लाख कमियां हैं मगर कुछ खूबियां अच्छी लगीं। प्यार  में  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जो वतन  के लिए सर कटाते रहे। याद तादेर  सब को वो आते रहे। वो हमें  हम उन्हें  घर बुलाते  रहे। फूल उल्फत के यूँ हम खिलाते रहे। इस तरह  भी नज़र  वो बचाते रहे। खुद को चिलमन के पीछे छुपाते रहे। याद  करते   रहे  औ  भुलाते  रहे। रेत पर नाम लिखकर मिटाते रहे। हुस्न […]

कविता

अटल हमारे अटल तुम्हारे

अटल हमारे अटल तुम्हारे। नहीं रहे अब बीच हमारे। जन जन के थे राज दुलारे। अटल हमारे अटल तुम्हारे। बेबाक रहे बोल चाल में। मस्ती दिखती चालढाल में। अश्क बहाते घर चौबारे। अटल हमारे अटल तुम्हारे। अगर कहीं कुछ सही न पाया। राजधर्म तब जा सिखलाया। इसीलिये थे सब के प्यारे। अटल हमारे अटल तुम्हारे। […]