गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सियासत में बाक़ी नहीं अब शराफत। कहाँ तक सुधारेगी उसको अदालत। दिखावे की हरगिज़ नहीं है इजाज़त। दिखाते फिरो मत यहाँ तुम नफासत। करेगा वतन की जो पूरी हिफाज़त। उसे ही मिलेगी अवामी हिमायत। उन्हे हार मिलती ज़माने में हर सू, समय की समझते नहीं जो नज़ाकत। मुहब्बत का जज़्बा रहेगा जो दिल में, रहेगी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फिर  मुझे  तेरी  ज़बानी    चाहिए। एक  सुन्दर  सी  कहानी    चाहिए। वाम दक्षिण हो चुका किस्सा बहुत, अब  मईसत   दरमियानी   चाहिए। भूल कर  किस्से  पराजय के सभी, फिर से किस्मत आज़मानी चाहिए। देश की जब आन का हो मसअला, देश  की  इज्ज़त  बचानी   चाहिए। काल कोरोना कभी जब खत्म हो, फिर से धरती जगमगानी  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

थक गये  जल्द  आज़ार  से। दिख रहे  सख्त   बीमार  से। देख   लेना  ज़रा  मुल्क  भी, जब  मिले  वक्त  व्यापार से। तूल  उनको  न  दो  भूलकर, हल करो  मसअले  प्यार से। हाथ खाली दिखे  भक्त सब, क्या मिला उनको दरबार से। बख़्श  दे  हो  सके  तो सुकूं, चाहिए  कुछ  न   संसार से। — हमीद कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुल्क भर  का  दुलारा  हुआ। जीत कर  खेल  हारा   हुआ। जीत  लाये  अदालत से जब, तब    हमारा   हमारा   हुआ। आमद ए यार जिस  दम हुई, खूबसूरत    नज़ारा     हुआ। क्या  हुआ  है पता  कीजिये, फूल क्यों  कर  शरारा हुआ। आप जब   से गये  छोड़कर, गर्दिशों   में   सितारा   हुआ। था बना  खिदमते खल्क को, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर क़दम पर  इश्क़ की  देती मुझे  दावत  भी थी। प्यार करने  का उसे पर  इक सबब सूरत   भी थी। अब ज़रा फुर्सत नहीं तो  किस तरह से हो निबाह, तब नहीं आया  मुझे  जब  ढेर सी  फुर्सत भी थी। मंज़िलों  की  थी  तलब  यूँ  साथ  हम  चलते रहे, हमको उससे हरक़दमपर यूँ बहुत ज़हमत […]

कविता

सीमा पर चढ़ आया दुश्मन

भूलो अपनी दलगत अनबन। सीमा  पर चढ़  आया दुश्मन। खतरे  में  है  अब घर आँगन। सीमा  पर चढ़  आया दुश्मन। बात   नहीं   पोशीदा  अब  ये, जान गया है इसको जन जन। मतदो मन बढ़ अपना भाषन। सीमा  पर चढ़  आया दुश्मन। खूँटी  टाँगो  आज  सियासत। आपसकीसबभूल  शिकायत। आज  पुकारे  फिर से  है  रन। सीमा  पर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सियासत में बाक़ी नहीं अब  शराफत। कहाँ तक  सुधारेगी  उसको अदालत। दिखावे की हरगिज़ नहीं है  इजाज़त। दिखाते फिरो मत यहाँ तुम  नफासत। करेगा  वतन की  जो  पूरी  हिफाज़त। उसे  ही    मिलेगी   अवामी  हिमायत। उन्हे  हार  मिलती  ज़माने  में  हर  सू, समय की  समझते  नहीं जो नज़ाकत। मुहब्बत  का जज़्बा  रहेगा जो दिल में, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वही  ज़िन्दगी  में   सफल  मीत मेरे। सही सोच जिसकी अटल  मीत मेरे। चलो चल  के  आते  टहल मीत मेरे। हुआ  गर  नहीं  मन  सरल मीत मेरे। सभी  चाहते  एक  आज़ाद  दुनिया, नहीं  चाहते  कुछ  दखल  मीत मेरे। कटेंगी  सुकूं  से  तेरी  चन्द   घड़ियाँ, सुनो  आज   मेरी  ग़ज़ल  मीत  मेरे। नहीं  कर   सकोगे  कोई  काम  पूरा, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खूबसीरत  से तुम बना  रखना। आदमी  साथ में  भला  रखना। याद  वादे   ज़रा  ज़रा   रखना। हाथ खाली न झुनझना रखना। भूलना   राह   मत  भलाई   की, ज़ह्न में सबका तुम भला रखना। जब खुदा कुछ तुम्हे नवाज़े तो, फिर बड़ा  खूब दायरा  रखना। दूसरों को   बुरा  न कहना तुम, सामने  अपने  आइना  रखना। राह  चुनना   सदा  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेबसी पर भी श्रमिक की हमको लिखना चाहिए। दर्द सीने  का कहीं  लफ़्ज़ों  में  ढलना  चाहिए। इक ज़रा सी चूक पर  मिलती सज़ा भारी बहुत, इक मिनट भी यूँ न गफ़लत में निकलना चाहिए। काम  हो  बेहद  ज़रुरी  ले  के  पूरी एहतियात, सोच  करके  खूब अब घर से निकलना चाहिए। अब रिवायत  दे न  पायेगी […]