गीतिका/ग़ज़ल

होली में

है अजब सब का हाल होली में। रंग   से   लाल   गाल  होली  मैं। करते  फिरते  धमाल  होली  में। बदली बदली सी चाल होली में। हों अगर खुश  खयाल होली में। फिर न हो कुछ बवाल होली में। खूब गोरा  है तन  बदन  उनका, हो गयी  लाल  खाल  होली  मे। आज मौसम हँसी ठिठोली का, मन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जाम उल्फत का अपनी पिला दो हमें। प्यार   करते   हैं  कैसे  बता   दो  हमें। इक नये  अब जहां  में बसा  दो  हमें। राज़  उल्फत  के  सारे  बता  दो  हमें। कह रहे हो जो मुजरिम सज़ा दो हमें। ज़ुर्म  क्या   है मगर  ये  बता  दो हमें। बीच में  आज चिलमन  गवारा  नहीं, खूबसूरत   नज़ारा   दिखा   दो  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

शादी की  रात खूब  सजाया  गया  मुझे। ताउम्र  उसके  बाद   रुलाया  गया  मुझे। कल खूब ज़ुल्म जोर दिखाया गया मुझे। सोते  से  रात  आके  जगाया  गया मुझे। करके   इशारा   दूर  भगाया  गया  मुझे। महफ़िल से  जानबूझ  हटाया गया मुझे। जबतक रक़ीब था न कोई छू सका ज़रा, अपना  बना के  खूब  सताया  गया मुझे। करने […]

कविता

सियासत—- रियासत—- विरासत

बाँटती  जो   फिर  रही  है   धर्म  के  आधार  पर, खूब जमकर हमलड़ेंगे उस सियासत के खिलाफ। हर तरफ फैला रही जो  मज़हबी  फितना फसाद, सेकुलर परचम उठेगा उस रियासत के खिलाफ। ना अहल आगे  बढ़ाती  अहलियत  जो  भूलकर, आखिरी दम तक  रहेंगे उस विरासत के खिलाफ। — हमीद कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खूब  पीता  शराब‌  है   फिर‌ भी। उसका लीवर खराब है फिर भी। मुफ़लिसी  में  पली  बढ़ी  है  वो, हुस्न पर  लाजवाब  है  फिर भी। अब  रियासत  नहीं  रही  बाक़ी, बाइ  नेचर   नवाब  है  फिर  भी। गो  ख़ुदा  ने   बहुत   नवाज़ा  है, उसकी नीयत ख़राब है फिर भी। लोग  आते   न  बाज़   शेखी  से, ज़िन्दगी इक  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सुकूं से  भरें कुछ  जहां और  भी है। जो रखते हैं अम्नो अमां और भी हैं। महज एक बाजी ही हारा है ये दिल, भरे तीर  तरकश  कमां और भी हैं। अगरएकमंज़िल फतहकर चुके हो, तुम्हारे  लिए आसमां  और  भी हैं। फतहयाब होना  अगर चाहते  हो, यहाँ की तरह के जहां और भी हैं। अकेले  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

नूर घर आ बसा नहीं होता। द्वार पर गर दिया नहीं होता। इश्क़ दिल में दबा न होता जो, प्यार हरगिज़ मिला नहीं होता। प्यार की फूटती नहीं कोपल, दिलसेजो दिल मिला नहीं होता। राख शोला दबा न रखती जो, आग का सिलसिला नहीं होता। बात कहता नहीं अगर सच्ची, आईना आईना नहीं होता। अक्ल […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

गांधी जी  हर  दृष्टि से , थे अनुपम  इंसान। गांधी  भारत  के  लिए, एक  बड़ा वरदान। सूरज उगकर सुब्ह को,होय शामको अस्त। जलता हरपल आग में, लेकिन रहता मस्त। अच्छा जो मख़लूक  से, करता  है  बर्ताव। रब देता  हरदम  उसे , सब से  ऊँचा भाव। दहकां को कुछ दे रही,दिल्ली की सरकार। दूर तलक दिखते […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बात  अच्छे  से ‌ बना ली  जाएगी। अब  नहीं  टोपी उछाली  जाएगी। हर तरह  सूरत सम्भाली  जाएगी। पर किसी को दी न ग़ाली जाएगी। कोई  तो  सूरत  निकाली जाएगी। मर्ज़ की  अच्छी  दवा ली जाएगी। काम कोई फिर बिगड़ना ही नहीं, गर बुजुर्गों  की दुआ ली  जाएगी। जान देकर  भी ज़रुरत पर हमीद, देश की  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

किसी नाखुदा के न आगे झुकेंगे। खुदा के रहे हैं खुदा के रहेंगे। न कल हम दबे थे न अब हम दबेंगे। न कल हम डरे थे न अब हम डरेंगे। बड़ा काम करने का दिल में इरादा, नया एक इतिहास रच कर रहेंगे। ज़माने में जिनका है ईमान पक्का, हवादिस के आगे वही बस […]