गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ख़बर आती रही छनछन। सुनी लेकिन बड़े बेमन। हमारा मुल्क है उस पर, हमें है वारना तनमन। हराना है नहीं मुमकिन, हिमायत में अगर जनमन। नहीं मुमकिन है बहकाना, सियासत जानता जनजन। कोई दीदार का प्यासा, उठाकर देख ले चिलमन। — हमीद कानपुरी

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

आपस में  लड़िये  नहीं, नई रोज़ इक जंग। जीवन  को  करिये नहीं, तरह तरह से तंग। पद की  खातिर हो गया, अपनों का गद्दार। फूल नहीं  मिलने उसे, मिलने हैं बस खार। लटकेंगे अब दार(फाँसी) पर,सारे बेईमान। क्षणभर की जो मौज को,बन जाते हैवान। दुविधा आ डालें नहीं , जीवन में व्यवधान। चहरे  पर  तेरे  […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

अवसर  खोता है  अगर , रहता है  नाकाम। चाहे  जितना हो  प्रखर , पड़ा रहे  गुमनाम। सत्य अहिंसा  पर टिके , उनके  सारे  काम। सच्चा पक्का  आज भी , गाँधी  का पैगाम। समय क़ीमती है बहुत, रखना उसका मान। कार्य करो सब समय पर,पाना गर सम्मान। आज   आमने   सामने ,  अमरीका   ईरान। संकट में जिससे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

प्यार  मुहब्बत  आम  करेंगे। दुनिया  भर  में  नाम  करेंगे। नफरत  जो  फैलाते  जगमें, रस्ता  उनका   जाम  करेंगे। हमें सफलता प्यारी अजहद, बढ़कर  आगे   काम  करेंगे।  दिल में मेरे  प्यार वतन का, रह कर  भी  गुमनाम करेंगे। साथ तुम्हारे   बीता  दिन  ये, साथ  तुम्हारे   शाम   करेंगे। — हमीद कानपुरी

कविता

अटल हमारे अटल तुम्हारे

अटल  हमारे  अटल  तुम्हारे। नहीं   रहे  अब   बीच  हमारे। जन जन  के  थे  राज दुलारे। अटल  हमारे  अटल  तुम्हारे। बेबाक    रहे   बोल  चाल  में। मस्ती  दिखती  चालढाल  में। अश्क   बहाते     घर  चौबारे। अटल  हमारे   अटल  तुुम्हारे। अगर कहीं कुछ  सही न पाया। राजधर्म  तब  जा  सिखलाया। इसीलिये   थे   सब  के   प्यारे। अटल   हमारे  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ईद   होली   न  कोई   दिवाली  रही। बाद  तेरे  हर  इक  रात काली  रही। ज़िन्दगी इस तरह कुछ निराली रही। ख़ुश रहा  हर घड़ी  ज़ेब खाली रही। रोज़   देती  रही   दर्द  मुझको  नया, पर बनी हर घड़ी भोली भाली  रही। सामने   जब  तलक  आप  मेरे  रहे, तब तलक ही भरी गुलसे डाली रही। हादसा इश्क़ का […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

पा नहीं सकता कहीं सम्मान है। खूबियों से गर कोई अंजान है। रोज़ चलता इक नया अभियान है। क्यूँ भला फिर हर बशर हलकान है। डर नहीं सकता किसी से वो कभी, इक खुदा पर जिसका भी ईमान है। ऐसा आखिर क्या हुआ है मुल्क में, उठ रहा जो हर तरफ तूफान है। खेलता हँसता […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कुछ मुहब्बत वफा की निशानी तो है। उसके चेहरे पे अब शादमानी तो है। तीरगी सब जहां की मिटानी तो है। रौशनी से धरा जगमगानी तो है। आबरू शायरी की बचानी तो है। इक ग़ज़ल फिर नई गुनगनाती तो है। कुछ न कुछ लग रहा है कहानी तो है। सामने देख कर हड़बड़ानी तो है। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इश्क़ सीने  में धर  गया  कोई। दर्द   ही  दर्द  भर  गया  कोई। आज होकर निडर गया  कोई। प्यार पाकर निखर गया  कोई। आग  सीने  में भर गया  कोई। फेर  करके  नज़र  गया  कोई। फिरनमकउसमें भरगया कोई। ज़ख्म नासूर  कर  गया  कोई। दिल में  मेरे  उतर  गया  कोई। तन बदन में  पसर गया  कोई। रेप  करके  […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

लफ़्फ़ाज़ों के हम नहीं, बन सकते हमराज़। करना  होगा  अब हमें , एक नया आग़ाज़। गाता अपना गीत  हूँ , रही अलग आवाज़। दुनिया में  सबसे अलग, है अपना अंदाज़। दिल की  बस्ती में कहीं, उमड़ा है  तूफान। आँसू बह बह  कर  रहे , सारा दर्द  बयान। संसद से  मैदान तक, हर  नेता  ग़मख्वार। फिरभी […]