गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

यूँ नहीं डरा करो। मस्त हो जिया करो। होश में रहा करो। नाप कर पिया करो। ज़ुल्म रोक दो ज़रा, ज़ालिमों हया करो। बेबसी जहाँ दिखे, जा वहाँ दया करो। अब कहीं छिड़क नमक, घाव मत हरा करो। — हमीद कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दूध  से  जो  कभी  जला  होगा। छाछ  भी  फूँक  पी  रहा  होगा। काम  छोटे  करो ज़रा  मिलकर, काम  कोई    तभी  बड़ा   होगा। साथ  चलता   न  जो  बुराई  के, साथ  उसके  नहीं   बुरा   होगा। तब लगेगा ज़रा अधिक दमखम, हाथ  परचम  अगर  बड़ा  होगा। कारवां छोड़ कर  गया  जो कल, आज दर दर  भटक  रहा  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर घड़ी  भींच कर  मत रखो  मुट्ठियाँ। हद से ज़्यादा  नहीं  ठीक हैं सख्तियाँ। नौकरी   कर   चुके   फ़र्ज़   पूरे‌   हुये, खूब जमकर करो अब मियाँ नेकियाँ। लीडरों  ने  किया  इतना मज़दूर हित, कानपुर  में न  बाक़ी रहीं  चिमनियाँ। चार   पैसे  कमा   कर  बहकने  लगे, मयक़दे  में खनकने  लगीं  प्यालियाँ। वो  बताता फिरे  खामियाँ जा ब […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बा ख़बर   आदमी। बा असर   आदमी। बे असर    ही  रहे, बे ख़बर   आदमी। लड़ रहा रात दिन, इक समर आदमी। कुछ नहीं कर सके, है  लचर   आदमी। चाहता   हर  कोई, खुशनज़र आदमी। आदमी    का  बने, हम सफर आदमी। — हमीद  कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

यारों  अब ये  रोना  धोना  छोड़ो  भी। भरभर आँखें आँसू  बोना  छोड़ो  भी। मनचाहा इंसाफ किसीको मिलताकब, इस पर बेमतलब का रोना छोड़ो  भी। इक सीमा में बँधकर जीना ठीक नहीं, बातों  बातों  आपा  खोना  छोड़ो भी। दौरे  बेचैनी  का  मतलब  समझो कुछ, गाफिल होकरके अब सोना छोड़ो भी। तालीम अभी तुम बच्चों को अच्छी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सिर्फ दावे नहीं बड़े करना। कुछ पिलर भी नये खड़े करना। एकता फिर नहीं रहे कायम, दल में हरगिज़ न दो धड़े करना। ढील से काम सब बिगड़ते हैं, आज से कुछ नियम कड़े करना। नाम बदनाम हो ज़माने में, काम ऐसे नहीं सड़े करना। मसअले जब हमीद जा उलझें, आदमी मोतबर खड़े करना। — […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खेतों  में   हरियाली  आये। भारत में  खुशहाली  आये। दहकां मन तब हर्षित होता, जब   गेहूँ   में  बाली  आये। तनमनजान फिदा है उसपर, ओढ़ रिदा जो  काली  आये। नजराने  की  चाह  बहुत थी, हाथ  मगर  वो  खाली आये। सच्चा   लीडर   पाना  चाहा, लीडर  लेकिन  जाली  आये। हालत  उपवन  की खस्ता है, अच्छा   कोई    माली  आये। […]

इतिहास

एक अजीम शायर – राहत इन्दौरी

राहत क़ुरैशी उर्फ राहत इन्दौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 को इंदौर में हुआ था।  उनके पिता का नाम रफअत उल्लाह क़ुरैशी और माँ  का नाम मकबूलुन निशा बेगम था। उनकी 2 बड़ी बहनें हैं जिनके नाम तकीरेब और तहज़ीब हैं। उनका बड़े भाई का नाम अकील और  छोटे भाई का नाम आदिल है।  शुरुआती  […]

मुक्तक/दोहा

नोबल पुरस्कार विजेता साहित्यकार रविन्द्र नाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि

अनुपम कवि  टैगोर थे, माना कुल संसार। भारत को उनसे मिला, नोबल का उपहार। प्रतिभा उनमें थी बड़ी, लेखन था पुरजोर। चमके  तारे की  तरह, नोबल   पा  टैगोर। — हमीद कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

नीरज पुण्य तिथि (19 जुलाई) पर विनम्र श्रद्धांजलि

एक अनुपम  गुलाब  थे  नीरज। शायरी  की  किताब  थे  नीरज। प्यार को प्यार ही  कहा  हरदम, गीत  का  आफताब  थे  नीरज। मान उनको   खिताब क्या   देते, चलताफिरता खिताब थे नीरज। बात  कीजै    अगर  रवानी  की, एक  बहता  चिनाब  थे  नीरज। फिल्म के गीत हों कि डायस हो, हर  जगह  कामयाब थे  नीरज। इक खनक […]