गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कर    शरारत   मुस्कुराएगा   कभी। अश्क बनकर झिलमिलाएगा कभी। पास  आकर  दूर   जाएगा।  कभी। ख्वाब  में  आकर  सताएगा  कभी। दूर   से    ठेंगा   दिखाएगा   कभी। बात  दिल की  आ सुनाएगा कभी। रूठने  का   है अलग अंदाज कुछ, दूर  ज़्यादा   रह न  पाएगा  कभी। तीरगी  का   दूर   होना   लाजिमी, बल्ब  कोई   आ  जलाएगा  कभी। इश्क़ का  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वक्त  का  है   ये  तकाज़ा   साथ आना  चाहिए। एकजुट  हो   देश  को   बेहतर  बनाना  चाहिए। बेसबब  हरगिज़  नहीं  उसको  छुपाना  चाहिए। प्यार  जिसको  हो उसे  जाकर  जताना चाहिए। कर न  पायेगा  यहाँ  अब  कोई भी उसपर यकीं, रोज़  जिसको  इक  नया यारो  फसाना  चाहिए। इक दिये की  जो हिफाज़त  कर न पाए  उम्रभर, कह  रहे  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वही  ज़िन्दगी  में   सफल  मीत मेरे। सही सोच जिसकी अटल  मीत मेरे। चलो चल  के  आते  टहल मीत मेरे। हुआ  गर  नहीं  मन  सरल मीत मेरे। सभी  चाहते  एक  आज़ाद  दुनिया, नहीं  चाहते  कुछ  दखल  मीत मेरे। कटेंगी  सुकूं  से  तेरी  चन्द   धड़ियाँ, सुनो  आज   मेरी  ग़ज़ल  मीत  मेरे। नहीं  कर   सकोगे  कोई  काम  पूरा, […]

गीतिका/ग़ज़ल

राह में जो गिरा है उठाते चलो

ख़ूं से अपने वतन को सजाते चलो। ख़ूबसूरत इसे तुम बनाते चलो। ग़म जहाँ हो खुशी तुम लुटाते चलो। जश्न हर ज़िन्दगी का मनाते चलो। जीत का जश्न खुलकर मनाते चलो। पस्तियों के निशां सब मिटाते चलो। हमसफर अब उसे भी बनाते चलो। राह में जो गिरा है उठाते चलो। बस्तियाँ प्यार की तुम बसाते […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वो कभी मार से नहीं होता। काम जो प्यार से नहीं होता। आज तकनीक़ का ज़माना है, वार तलवार से नहीं होता। घाव होता जो लफ़्ज़ से यारो, घाव तलवार से नहीं होता। घाव करते हैं फूल गहरा जो, घाव वो खार से नहीं होता। काम पूरा हमीद वो करते, काम जो चार से नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चार  सू  महफ़िल  सजाते  जायेंगे। गीत   ग़ज़लें    गुनगुनाते   जायेंगे। साथ सबको  अपने ले के  जायेंगे। दर सभी का  खट खटाते  जायेंगे। आज प्रैक्टिस खूब उनकी सबकरें, दाँव  कल  जो  आज़माये  जायेंगे। रौशनी की  है ज़रूरत   हर जगह, अब दिये हर   सू  जलाये  जायेंगे। इस करोना  काल में  इस  ईद  में, क्या नये   कपड़े  खरीदे  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ज़ह्र  आलूद  बयां   देने    निकलते   क्यूँ  हैं। जह्र लफ़्ज़ों  का ज़बां से  वो उगलते क्यूँ  हैं। जिनकी ताबीर किसी तौर न मुमकिनलगती, ख़्वाब आ आ के मेरी आँख में पलते क्यूँ हैं। रोज़   बदनामियाँ  जुड़तीं   हैं बही  खाते में, वो बयां फिर  भी  लगातार  बदलते  क्यूँ  हैं। ज़ह्न पर आज मुसल्लत है करोना  की […]

स्वास्थ्य

विश्व हास्य दिवस

विश्व हास्य दिवस विश्व भर में मई महीने के पहले इतवार को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत योगा लाफ्टर मूवमेंट के संस्थापक डा. मदन कटारिया ने पहली बार मुम्बई में  11जनवरी 1998 को की थी। दुनिया भर में इस समय  तकरीबन 8000 लाफ्टर क्लब सक्रिय हैं।जहाँ लोग हँसकर अपने तनाव कम करते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय हास्य […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

देख कर उस को  हुआ  बीमार‌  मैं। स्वस्थ हरगिज़ अब नहीं हूँ  यार मैं। आँख  में  जादू  लड़कपन  से रहा, काम  की  है  आँख बस बेकार मैं। कल जिसे दुनिया सराहे दमबदम, उस कहानी  का बनूँ  किरदार  मैं। एक चाहत  रह गयी दिल  में यही, उसकी उल्फत का बनूँ हक़दार मैं। कमसिनीमें आँख उससे जा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

काँटों से जतन करके दामन को  बचाना है। फूलों से  अगर तुमको  घर बार  सजाना है। इक दीप बना खुद को गर दीप  जलाना है। कुछ करके जतन जग का अँधियार मिटाना है। कुछ देर  को ठहरा है  कुछ देर में जाना है। दरवेश सिफत इंसां कुछ वक़्त  बिताना है। आती न समझ मुझको उसकी […]