मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

बदअमनी का हर तरफ,लगा हुआ अम्बार। घोड़े  अपने   बेच  कर , सोता  चौकी दार। समझाये   कोई   मुझे , मँहगाई   का   राज़। आखिर क्यूँ मँहगा हुआ,चन्द दिनों में प्याज़। पाँव  बढ़ाते  ही  चलो, फूल मिलें या खार। मंज़िल तक पहुँचा नहीं,मान गया जो हार। दिल  में  मेरे  है  बसी , सुन्दर सी  तस्वीर जिससे मिलती है […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

सामने  जो   कयाम   हो   जाता। नज़रों नज़रों  सलाम  हो  जाता। जाम  का   इंतिजाम   हो  जाता। जश्न  का  एहतिमाम   हो  जाता। बज़्म  में  जो   सनम चले   आते, एक  ताज़ा   कलाम   हो  जाता। आ  गया  है  रक़ीब  महफ़िल  में, कुछ दुआ कुछ सलाम हो  जाता। दर्द  होता   अगर  कहीं   शामिल, फिर तो उम्दा  कलाम  हो  जाता। जब्त  […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

बाल न बांका हो कभी,  टूटे  ज़रा न आस। पालन हारे  पर  रखे ,  मानव  जो विश्वास। झेलेंगे   हमले  नये , खान   बाजवा  पाक। सूतक की  अब  मार से, हो जायेंगे खाक। पूरी ताक़त जोड़ कर,नहीं सके यदि जीत। दो हाथों  को जोड़कर , उसे बना लो मीत। टीम  हमारी आज है , दुनिया भर  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फ़र्ज़  सरकार का  अदा  न हुआ। सिर्फ बातों से कुछ भला न हुआ। खाक़ ग़ज़लें  कहेगा महफ़िल में, शायरी का   जिसे नशा  न हुआ। दूर  मुझसे  वो  हो  गया  लेकिन, दर्द  उसका  मगर जुदा  न हुआ। सब   दलीलें    मेरी  गयीं   मानी, पर मेरे  हक़  में फैसला न हुआ। लोग  उसको  ज़हीन  कहने लगे, मेरी […]

गीतिका/ग़ज़ल

बालमन

जोश सब  में भरे  बालमन। शाद दिल को करे बालमन। खौफ रखता  परे  बालमन। कब किसी से  डरे बालमन। प्रेम की  जब हवा आ  लगे, फूल  जैसा   झरे  बालमन। प्रेम का  खाद  पानी  मिले, खूब जमकर फरे बालमन। ठान ले  बात  कोई  अगर, फिर  न  टारे  टरे बालमन। — हमीद कानपुरी

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

लफ्फाज़ी  होती  रही , हुई  तरक़्क़ी  सर्द। समझ नहीं  ये पा  रहे , सत्ता  के  हमदर्द। अबलाओं पर ज़ुल्म कर, बनते हैं जो मर्द। निन्दा जमकर  कीजिये , मिलेंं जहाँ बेदर्द। डंका अब बजने लगा , उसकाभी घनघोर। एक ज़माने  तक रहा , जो इक नामी चोर। हम सब ज़िम्मेदार हैं,सिर्फ नहीं इक आध। भूख […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

उस पे  मुझको तनिक भी भरोसा नहीं। जिस ने  अच्छा  कभी  भी परोसा नहीं। तुम  जिन्हे  चाहते  हो  मिटाना  यहाँ, वो  बड़े  सख्त  जां  हैं  समोसा नहीं। अनमनी सी करे जो भी कोशिश यहाँ, कामयाबी  का  उस की  भरोसा  नहीं। हौसला   तोड़ते   हों  ज़रा  जो   कहीं, उन  खयालात  को  पाला पोसा नहीं। कामयाबी  मिलेगी  उसे  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

नशीली तेरी जब नज़र साथ होगी। मुहब्बत की तब रहगुज़र साथ होगी। रहेगी ये मस्ती यूँ ही ज़िन्दगी भर, क़दम दर क़दम हमसफ़र साथ होगी। न तन्हा रहूँगा कभी ज़िन्दगी में, तेरी याद आठो पहर साथ होगी। मुकद्दर में साहिल जो रब ने लिखा है, समन्दर की तो हर लहर साथ होगी। डरेंगे नहीं फिर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

नफ़रतों  के   दर  हिलाना  चाहता हूँ। मुल्क को फिर  जगमगाना चाहता हूँ। दिल नहीं हरगिज़ दुखाना  चाहता हूँ। वो   मनायें    मान  जाना   चाहता हूँ। जश्न   सारे    ही   मनाना  चाहता हूँ। गीत  ग़ज़लें   खूब   गाना  चाहता हूँ। मैक़दे  की   चाभियाँ  दे  दीं सभी यूँ, ज़र्फ़  उनका   आज़माना  चाहता हूँ। थक गया हूँ अनवरत रहते  […]