गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल 

आदमी  गर   ज़हीन   है   तो है। सबको उसपर  यक़ीन  है  तो है। सोचता   वक़्त  से  बहुत   आगे, सोच  उसकी   नवीन  है   तो है। तर्क  गढ़ता   नये   नये   हर दम, ज़ह्न  उसका   महीन   है   तो है। आदमी  कर  जमा  समाज  बना, आदमी   पुर   यक़ीन  है   तो  है। दूर का पास का  पता  कुछ नहीं, खुद  में  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर  तरफ  पैदा  करे  डर   कौन है। माॅब लिंचर  यां  सितमगर  कौन है। हार को स्वीकारता  हरगिज़ न जो, दिलकेअन्दर का सिकन्दर कौन है। कहकहों के सब यहाँ तालिब दिखे, देखता   ग़मगीन   मंजर   कौन  है। दूसरों  की   ग़म गुसारी   के  लिए, पार  करता  अब समन्दर  कौन है। जग  भलाई  के  लिए इस  दौर में, तालिबे  […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

आत्म प्रसंशा  से  नहीं, बनती  है  पहचान। सब करते तारीफ जब,तब मिलता सम्मान। पुख्ता  होती  है तभी,‌ रिश्तों  की  बुनियाद। प्यार मुहब्बत की अगर,उसमें  डालो खाद। चेला अब मिलता नहीं, मिलते सब उस्ताद। चाहत हो  जब ज्ञान की , करते गूगल याद। जीने  वाले  जी  गये , जीवन  अपना  यार। जीवन  पर तो  मौत की, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ज़हनो दिल को संवारती आँखें। आरती   सी    उतारती   आँखें। अब भी लगतीं पुकारती आँखें। तेरी  दिलकश  शरारती  आँखें। देख  उनको  सुकून  मिलता है, मैल  दिल  का  बुहारती आँखें। एक मुद्दत  गुज़र गयी  लेकिन, याद अब तक पुकारती आँखें। भूल सकता  नहीं  हमीद उन्हे, एकटक  वो  निहारती  आँखें। — हमीद कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बाढ़   में   सब  बहा   देखते   देखते। क्या से क्या  हो गया  देखते   देखते। सुब्ह निकला जला राह अपनी चला, शाम  तक  जा  ढला  देखते  देखते। इश्क़ जबसे हुआ तनबदन खिलगया, हो   गयी    चंचला    देखते    देखते। आमने   सामने   कार  से   जा  लड़ा, हों   गया    हादसा    देखते    देखते। देख  उनकी  तरफ  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

समय  से  न पहले  यूँ  जाया  करो। नहीं  इस   तरह  से   सताया  करो। ज़रूरत  पे कुछ  काम आया  करो। न ज़्यादा  किसी को  सताया  करो। यूँ ही मिल के मुझसे न जाया  करो। कभी  घर  भी अपने  बुलाया करो। फ़क़त  बात  ही  मत  बनाया करो। वतन मिल के अपना सजाया करो। न  मर्ज़ी   अगर  हो  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खूब  सराहूँ  अज़मत को। अल्ला  तेरी   रहमत  को। चलनी  भीतर   दूध   दुहें, कोस रहे  हैं  किस्मत को। सच को सच  ही कहता है, दाद  तेरी   है  हिम्मत को। अच्छी  दुल्हन  चाहें  सब, ढूंढ  रहे  पर   दौलत  को। फाँसी    दो   चौराहे   पर, लूट  रहे  जो  अस्मत को। सूरत   पर  सब   मरते  हैं, कौन   सराहे   सीरत  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अश्क बहाकर आँख भिगोना। छोड़ो   अब  ये   रोना   धोना। हँसते    रहना   बाहर   बाहर, अन्दर  अन्दर  छुपकर  रोना। अश्क नहीं  बाहर  से दिखते, भीग रहा पर दिल का कोना। रहना  जिसको  जग में आगे, सीखे कब वो अवसर खोना। खून   पसीना  एक  करे जो, जीते  जग  में  वो  ही सोना। — हमीद कानपुरी 

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

सभी  दिखावा  कर  रहे , दिल से करें न काम। मिशन विज़न सब खेल हैं, फकत चाहते नाम। कूड़ा करकट तो फकत , टुकड़ा टुकड़़ा  शैल। छीन  रहा  है  ज़िन्दगी , मानव  मन का  मैल। जाति वाद नस नस बसा , बहुत  पुराना रोग। निकट इलेक्शन देखकर , चोले  बदलें लोग। भीगे   भीगे   ही  रहे […]

मुक्तक/दोहा

हिन्दी इक वरदान

दुनिया  के हर  देश में , बढ़ा रही है शान। भारतवालों  के लिए , हिन्दी इक वरदान। जोर शोर  से हो रहा,हर सू अब जयगान। हिन्दी  तेरे   महल  में , मोदी सा  दरबान। दुनिया भर में बढ़ रहा, हिन्दी का सम्मान। चाहे  वो  इग्लैण्ड  हो ,  चाहे  हो जापान। मिलकर सब करते रहे, हिन्दी का […]