गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ईद   होली   न  कोई   दिवाली  रही। बाद  तेरे  हर  इक  रात काली  रही। ज़िन्दगी इस तरह कुछ निराली रही। ख़ुश रहा  हर घड़ी  ज़ेब खाली रही। रोज़   देती  रही   दर्द  मुझको  नया, पर बनी हर घड़ी भोली भाली  रही। सामने   जब  तलक  आप  मेरे  रहे, तब तलक ही भरी गुलसे डाली रही। हादसा इश्क़ का […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

पा नहीं सकता कहीं सम्मान है। खूबियों से गर कोई अंजान है। रोज़ चलता इक नया अभियान है। क्यूँ भला फिर हर बशर हलकान है। डर नहीं सकता किसी से वो कभी, इक खुदा पर जिसका भी ईमान है। ऐसा आखिर क्या हुआ है मुल्क में, उठ रहा जो हर तरफ तूफान है। खेलता हँसता […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कुछ मुहब्बत वफा की निशानी तो है। उसके चेहरे पे अब शादमानी तो है। तीरगी सब जहां की मिटानी तो है। रौशनी से धरा जगमगानी तो है। आबरू शायरी की बचानी तो है। इक ग़ज़ल फिर नई गुनगनाती तो है। कुछ न कुछ लग रहा है कहानी तो है। सामने देख कर हड़बड़ानी तो है। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इश्क़ सीने  में धर  गया  कोई। दर्द   ही  दर्द  भर  गया  कोई। आज होकर निडर गया  कोई। प्यार पाकर निखर गया  कोई। आग  सीने  में भर गया  कोई। फेर  करके  नज़र  गया  कोई। फिरनमकउसमें भरगया कोई। ज़ख्म नासूर  कर  गया  कोई। दिल में  मेरे  उतर  गया  कोई। तन बदन में  पसर गया  कोई। रेप  करके  […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

लफ़्फ़ाज़ों के हम नहीं, बन सकते हमराज़। करना  होगा  अब हमें , एक नया आग़ाज़। गाता अपना गीत  हूँ , रही अलग आवाज़। दुनिया में  सबसे अलग, है अपना अंदाज़। दिल की  बस्ती में कहीं, उमड़ा है  तूफान। आँसू बह बह  कर  रहे , सारा दर्द  बयान। संसद से  मैदान तक, हर  नेता  ग़मख्वार। फिरभी […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

बदअमनी का हर तरफ,लगा हुआ अम्बार। घोड़े  अपने   बेच  कर , सोता  चौकी दार। समझाये   कोई   मुझे , मँहगाई   का   राज़। आखिर क्यूँ मँहगा हुआ,चन्द दिनों में प्याज़। पाँव  बढ़ाते  ही  चलो, फूल मिलें या खार। मंज़िल तक पहुँचा नहीं,मान गया जो हार। दिल  में  मेरे  है  बसी , सुन्दर सी  तस्वीर जिससे मिलती है […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

सामने  जो   कयाम   हो   जाता। नज़रों नज़रों  सलाम  हो  जाता। जाम  का   इंतिजाम   हो  जाता। जश्न  का  एहतिमाम   हो  जाता। बज़्म  में  जो   सनम चले   आते, एक  ताज़ा   कलाम   हो  जाता। आ  गया  है  रक़ीब  महफ़िल  में, कुछ दुआ कुछ सलाम हो  जाता। दर्द  होता   अगर  कहीं   शामिल, फिर तो उम्दा  कलाम  हो  जाता। जब्त  […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

बाल न बांका हो कभी,  टूटे  ज़रा न आस। पालन हारे  पर  रखे ,  मानव  जो विश्वास। झेलेंगे   हमले  नये , खान   बाजवा  पाक। सूतक की  अब  मार से, हो जायेंगे खाक। पूरी ताक़त जोड़ कर,नहीं सके यदि जीत। दो हाथों  को जोड़कर , उसे बना लो मीत। टीम  हमारी आज है , दुनिया भर  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फ़र्ज़  सरकार का  अदा  न हुआ। सिर्फ बातों से कुछ भला न हुआ। खाक़ ग़ज़लें  कहेगा महफ़िल में, शायरी का   जिसे नशा  न हुआ। दूर  मुझसे  वो  हो  गया  लेकिन, दर्द  उसका  मगर जुदा  न हुआ। सब   दलीलें    मेरी  गयीं   मानी, पर मेरे  हक़  में फैसला न हुआ। लोग  उसको  ज़हीन  कहने लगे, मेरी […]