कविता

एक मरता हुआ दर्द

कितनी दुःखद है स्थितियां, हर कोई दौड़ रहा है यहाँ! महज एक नोकरी को, अनगिनत कतारे लगी है… धक्का मुक्की, मारा मारी, बड़ी मोटी फीस.. ऊपर से अगणित इम्तिहान तरह तरह के सवाल जिनसे कभी वास्ता ही न रहा ! सब पार करते करते जब पहुचता है मंजिल के निकट! तभी कोई स्वार्थ लोलुप । […]

कविता

मातृशक्ति को नमन(महिला दिवस विशेष)

“नमन” “एक तेरे होने से ही, महका-महका मैं करता हूँ । भाग दौड़ दिन भर करके भी, एक याद रुख- घर करता हूँ। बंधा हुआ हूँ नेह -ड़ोर से, बंधी-पतंग हो जैसे ड़ोर से। दिन भर कितना व्यस्त तुम्हारा, कितना-समर्पण;कितना-सहारा। त्याग,सेवा कि प्रतिमूर्ति हो, जहाँ कमी है क्षतिपूर्ति हो। एक तेरे होना; रौनक- घर में […]

कविता

“तेरी याद”

“तेरी याद” “तेरी याद में जाने कैसी आज उदासी छायी है, दिल बैठा खामोश मगर अब, बात जुबॉ पर आयी है। दिन जैसे-तैसे गुजरा पर , कैसे रात बीतेगी अब… बैचेनी का सबब देख-लो , जीते जी घुट जाते है। सभी जनों के बीच से कैसे, हर बार; हम ही लूट जाते है। कैसे तेरी […]

कविता

किसान की व्यथा

दुःख उसने कभी किसे कहा था पीड़ा हर-पल झेल रहा था । जीवन भर स्वाधीन रहा….. शासन भी है खेल रहा !! अगणित बार धरा मुसकाई, हाड़-तोड़ जी जान लगाई सुख कि खेती हरी-भरी थी…. बरदों की जोड़ी खड़ी थी हर-पल उसका साथ निभाते… खेत जोतते फिर घर आते, उसके दुःख में वो भी न […]

कविता

बासंती गीत – ऋतुराज बसंत

भीनी भीनी महक में डूबा, मन मतवाला बना पतंगा। प्रेम भंवर में रचा बसा है, भंवरों का गुंजार मचा है। आम्र शिखा पर कुहके कोयल, नदी बह रही- कल-कल; कल-कल। झर बेरी से लाल-लाल; कितने-कितने ही, गिर जाते अगणित मीठे फल; – प्रतिपल-प्रतिपल। जिम्मेदारी विटप निभाते, सुंदर बन सबको मुसकाते, ऋतु-ऋतु बारी बारी से; एक […]

कविता

आओ मिलकर याद करें

आओ मिलकर याद करें ; कुछ दिल से भी फरियाद करे हम खुश बैठे अपने घर पर; वे सीमाओं पर अड़े रहे। हम अपने घर में सोते है , वे देख दशा अब रोतें है, भाई भाई को काट रहे ; माता का आँचल बाँट रहे। कुत्ते संग झूला झूल रहे, माँ बाप की सेवा […]

कविता

किसान की व्यथा

दुःख उसने कभी किसे कहा था??? पीड़ा हर-पल झेल रहा था । जीवन भर स्वाधीन रहा….. शासन भी है खेल रहा !! अगणित बार धरा मुसकाई, हाड़-तोड़ जी जान लगाई | सुख कि खेती हरी-भरी थी…. बरदों की जोड़ी खड़ी थी | हर-पल उसका साथ निभाते… खेत जोतते फिर घर आते, उसके दुःख में वो […]

हास्य व्यंग्य

आदमी ने कुत्ते को काटा

“” आदमी ने कुत्ते को काटा “ सुनने में बड़ा अजीब लगेगा पर सच है। सुबह सवेरें जब मैं घूमने निकला तो देखा रोज मेरे पैरों में स्पूर्ति भर देने और हाथ में पत्थर उठा लेने को मजबूर कर देने वाला अपनी गली का स्वामी आज खामोश था ! अब उसने भोकना भी बंद कर […]

कविता

मैं गरीब हूँ

हाँ! मैं गरीब हूँ, गरीब हूँ मैं….सच है नहीं मेरे पास ऐसी कोई चीज – जिससे तुम मेरी तरफ हाथ बढ़ाओ., जियूँगा में अकेला ही…. मुझे चाह नहीं महलों की, मैं अपनी झोंपड़ी में ही खुश हूँ…. क्या करू अच्छा नसीब नहीं है मेरा, बदनसीब हूँ….में गरीब हूँ…. साथ मत दो चाहे तुम मेरा…. मैं […]

कविता

कामना

हर कोई कितने जन्मों में; पाता है जीवन मानव का, सब कष्टों को सहते सहमे; पाता है जीवन मानव का, कितने ही फिर भी बतलाते; क्यों पाया??जीवन मानव का! इतनी परीक्षा कठिन पार-कर; जब पाया है जीवन -सुन्दर, क्यों इतने कष्टों में डालते; पार लगा-दो विनती सुनकर, हे भगवन!हे सुख के सागर! गले लगालो; हमको […]