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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रिंद,  साक़ी, मयकदे  की बात  हो, हो नाम मेरा जब नशे की बात  हो। जाईये न इस तरह की महफिलों में, लापता  जिनमें  पते   की बात  हो। दूरियां  उनसे   रखो   जिनके लिए, प्यार  करना  बस मज़े...

  • एक प्रयास ग़ज़ल का,,,

    एक प्रयास ग़ज़ल का,,,

    अपनी कीमत निकाल कर रखना, सिर्फ  इज़्ज़त संभाल कर रखना। वो  गिरे  जब  भी  तेरे  हक में हो, ऐसा  सिक्का  उछाल कर रखना। फिर  तो  उसको यकीन आएगा, तू  कलेजा  निकाल  कर रखना। अब  गुज़ारा  नहीं ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दर्द  दिल  का सताए तो किससे कहें। मीत  जब  याद आए तो किससे कहें। जितना  नज़दीक  था यार पहले मेरा, दूर  से  अब  बुलाए  तो किससे  कहें। है  ये कैसा  नशा  बिन पिये जब  मेरे, ये ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कैसी पलकों में है ये नमी कुछ तो है। अब  लगे ज़िंदगी में कमी कुछ तो है। बेवज़ह  कोन  जीता  है इसको  यहां, आदमी  के  लिये  ज़िंदगी कुछ तो  है। चढ़ के उतरे कभी फिर उतर...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    वो  होता  नहीं  हमारा क्यों, रुठा किस्मत का तारा क्यों! आते नहीं एक दिन मिलने, फिर करते हो इशारा क्यों! हम  दोनो का इक दूजे बिन, अब होता नहीं गुजारा क्यों! चांदनी  बिन  चांद को तुमने,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    चारों और अंधेरा देखा दूर  बहुत सवेरा देखा! मज़बूरों का फुटपाथों पे, मैने  रेन- बसेरा देखा! बिखरे सब परिवार मिले, तेरा  देखा,  मेरा देखा! ससंद  के  गलियारों में, मक्कारों का डेरा देखा! ऐरे-गेरे जितने भी मिले,...

  • गीत

    गीत

    मेरी विधा से इतर एक प्रयास,,,,,,, दिन के बाद रात का आना ये सच है, ये अटल भी है, तेरे इसी आज में शामिल, आने वाला कल भी है, हकीकत पर जीवन की रुककर कुछ विचार...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कौन मुर्दा, कौन जिंदा है, यहां पर, कौन कितना नेक बंदा है, यहाँ पर! छीन ली इज्जत ये, किसने नारियों की, आजकल इंसा दरिंदा है, यहाँ पर! मन के काले, तन के उजले हैं सभी अब,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दर्द के आसपास,, रहने दे, थोडा दिल को उदास,, रहने दे! कोई क़ातिल नहीं तुम्हारे सिवा, बेसबब ये तलाश,, रहने दे! अपने हिस्से में तीरगी ही सही, उनके हिस्से उजास, रहने दे! छोड़ दो कल पे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हादसों, किस्मतों के ये मारे, हुए, रुप फिर भी थे अपने संवारे, हुए! एक अरसा हुआ ज़िंदगी में यहां, वक्त हमको भी अच्छा गुज़ारे, हुए! हैं फकीरों से सब उसके दर पे यहां, हाथ सबके मिले...