गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुशनुमा जिंदगी नहीं आती, ग़र तेरी दोस्ती नहीं आती। गीत लिखता हूं शेर कहता हूं, मत कहो शायरी नहीं आती। मैं तरफदार हरदम सच का हूं, झूठ की पैरवी नहीं आती। मौत आती है रोज़ ही मुझ तक, इक मगर ज़िंदगी नहीं आती। चांद आता है संग में हरदम, तन्हा क्यूं चांदनी नहीं आती। सिर्फ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जश्न सारा का सारा हुआ आपका, हर हमारा सहारा हुआ आपका। डूबने को मेरे कितने मझधार हैं, तैरता हर किनारा हुआ आपका। चांँद से मांग ली मैंने अपनी दुआ, टूटता हर सितारा हुआ आपका। एक मांँ ही तो हिस्से में बस चहिये, दौलतों का पिटारा हुआ आपका। याद जो हों बुरी बस हो मेरे लिये, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बह रहा है सराब से पानी, खुद के अपने हिसाब से पानी। आँख सूखी है इन दिनों लेकिन, गिर रहा क्यूं है ख़्वाब से पानी। ऐसी नज़दीकियां थी कांटों से, रिस रहा है गुलाब से पानी। ज़िन्दगी वो सवाल है जिसके, बह रहा हर ज़वाब से पानी। डूब जाता ज़रूर दरिया में, कम है मेरे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कुछ ज़मीं, कुछ आस्मांँ दोनों तरफ़, बंट गया है ये जहांँ दोनों तरफ़। झूठ, सच दोनों से अपना राब्ता, फंस गई है ये ज़ुबाँ दोनों तरफ़। मौत का पर्चा दिखाकर ज़िंदगी, ले रही है इम्तेहाँ दोनों तरफ़। राख के हैं ढ़ेर, जलती बस्तियाँ, रह गया है बस धुआंँ दोनों तरफ़। भागती राहें सभी खामोश हैं, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हाथ अपने उठा के बैठा हूं, रब से अर्जी लगा के बैठा हूं। नींद उनको कहीं न लग जाए, ख़्वाब सारे जगा के बैठा हूं। दर्द दिल का कहीं न पढले वो, इसलिए मुस्करा के बैठा हूं। आजमाना न तिश्नगी मेरी, मैं समुंदर सुखा के बैठा हूं। जितनी तूने कमाई जीवन भर, उतनी तो मैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इश्क से बढ़कर ज़माने में दुआ कुछ भी नहीं। इश्क़ मज़हब,इश्क़ ही रब, है खुदा कुछ भी नहीं। रोज़ ख़्वाबों में मुलाकातें हमारी हो रही, मत कहो कि अब हमारा राबता कुछ भी नहीं। मौत की हर दिन लड़ाई लड रहा हूं ज़िंदगी, आगे इसके तेरा मुझसे सामना कुछ भी नहीं। जी रहे हो ज़िंदगी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ले कितनी दूर जाओगे अब तिश्नगी रख दो, अपने से थोड़ी दूर अपनी बेबसी रख दो‌। जीने के लिए सांसों का सौदा करें चलो, चंद सांसें ही सांसों के लिए पेशगी रख दो। कब तक ये सितारे फ़लक पे तन्हा रहेगें, इस शब में इनके साथ चांद, चांदनी रख दो। कल रात मेरे पास आके […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

क्या नयी है, क्या पुरानी आखिरी है, ये तेरा किस्सा, कहानी आखिरी है। जान जिसने दी वतन के वास्ते, अब नहीं है, ये जवानी आखिरी है। अपनी ताकत पे न कर झूठा गुमां, एक ताकत आसमानी आखिरी है। तू भले खातों में रख अपना हिसाब, जोड़ रब का मुंहजबानी आखिरी है। शर्मों, हया के बांध […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेसबब दीपक जलाया धूप में, और सितारों को बुलाया धूप में। दिन उजाले छोड़कर सोता रहा, रात आई और जगाया धूप में। कैसा नकली ये ज़माना हो गया, कुछ कहा और कुछ दिखाया धूप में। इश्क़ भी झुलसा हुआ जैसा लगे, फिर किसी ने दिल लगाया धूप मे सिर्फ बेटा इसलिए नाराज़ है, बाप ने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कागज़, कलम, सियाही है, रचना की अगुआई है। वो जो हवा में उड़ता है, जुमला सिर्फ हवाई है। बहुत खुशी का है मौका, ग़ज़ल, गीत से ब्याही है। गीत जो आग लगाते थे, अब तो राख उड़ाई है। इतना ही सब लिखते हैं, जिसमें खूब कमाई है। लिखना नहीं है,बिकना है, कहां बची कविताई है। […]