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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रोज़ मेरे सपनों में आया करता है, नींदों में वो घर बनाया करता है। ये कैसी फितरत है उसकी पूछो ना, हंसते- हंसते मुझे रुलाया करता है। इन वीरान, अंधेरी काली रातों में, आस का दीपक...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कभी अपने लिए कुछ शौक पाल जीना था, मौत का ज़िंदगी से डर निकाल जीना था। क्यूं अपने मन को मार इतने दिनों जीता रहा, क्या तुझको थी ये ख़बर कितने साल जीना था। बाद तेरे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दिल को जोड़, नफ़रत छोड़। पास है मंज़िल, सरपट दौड़। झूठ, दिखावा, लगी है होड़। मेहनत कर, पत्थर फोड़। चल सीधे ही, बड़े हैं मोड़। गीता पढ ले, सार निचोड़। गद्दार क‌ई हैं, गला मरोड़। धर्म...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दिन करता है रात की  चुगली, इक, दूजे के  साथ की चुगली। छिपते  नहीं  हैं, लाख  छुपाएं, शक्ल  करे हालात की चुगली। कोई   भी    संतुष्ट    कहां   है, जीत  गए तो  मात की चुगली। सावन ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तू   मिले, तेरा  घर  मिले  मुझको, ज़िंदगी  फिर  अगर  मिले मुझको। पत्थरों   को   बना   दूं,  इंसा  सा, काश   ऐसा  हुनर   मिले  मुझको। छांव   मिलती  रही  सदा जिनकी, अब  नहीं वो  शज़र  मिले मुझको। मेरे   लहजे   ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बीते  दिन को  याद करता  हूं सिहर जाता हूं मैं, कुछ कदम चलता हूं जाने क्यूं ठहर जाता हूं मैं। हंसके पीता हूं ज़हर जो ज़िंदगी देती रही, रोज़ जीता हूं यहां मैं, रोज़ मर जाता...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इश्क़ में और  आशिकी में  हम, गुम हैं अपनी ही शायरी में हम। एक  तारीख  जैसे  लिख्खें  हैं, खुद हमारी  ही  डायरी में हम। धूप में  जलते  ग़म  नहीं  होता, क्यूं जले रोज़  चांदनी  में  हम।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    पार दरिया के मेरा है घर मगर सबसे अलग, हर घड़ी तूफान  का रहता है डर सबसे अलग। झूठ, मक्कारी, दगा फितरत में मेरी है नहीं, बोलता  हूं सच  ये मेरा है हुनर सबसे अलग। लाग ...

  • गीतिका

    गीतिका

    कौन  है  चोर  कैसे  हम  जाने, कौन  सिरमौर  कैसे  हम जाने। झूठे अभिमान  के पीछे  उसके, किसका है ज़ोर कैसे हम जाने। ऐसे रिश्तें हैं आजकल जिनका, ओर  न  छोर  कैसे  हम  जाने। फर्क  दोनों  में ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जब  इश्क़ के असर में रहा। बहुत सबकी नज़र  में  रहा, यार  मेरे  पत्थर, पर  उनके, संग  शीशे  के  घर  में  रहा। सांस चली  जिस  पल  तक, केवल  मौत  के डर  में रहा। रब का साथ...