गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आंँधियों से लड़ रहा है दीप इक जलता हुआ, हौसलों से जीत मुमकिन पाठ ये पढता हुआ। साथ मेरे चल के देखो पाओगे मंज़िल सदा, वक्त गुज़रा पास से इक बात ये कहता हुआ, जिसकी लहरों में किनारे और हैं मंझधार भी, वो समंदर मेरे भीतर हर घड़ी बहता हुआ। कल गुलाबों की बड़ी नज़दीकियांँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मेरे साथ चलेंगे क्या? रस्ते और मिलेंगे क्या? बहलाएंगे, फुसलाएंगे, रहबर भी छलेंगे क्या? मन है सारे राज खोल दूं, लेकिन होंठ हिलेंगे क्या? जाकर पूछो परवानों से, शम्मा संग जलेंगे क्या? मुरझाए इन बागों में, वापस फूल खिलेंगे क्या? पथराईं हैं आँखें ‘जय’, देखें, ख़्वाब फलेंगे क्या? — जयकृष्ण चाँडक ‘जय’

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दर्द आस – पास में है, मरहम एक गिलास में है। सुनकर ये अच्छा लगा कि, खुशी मेरी तलाश में है। ज़िन्दगी है इक मेरी पर, अलग-अलग लिबास में है। सारे के सारे दुश्मन मेरे, दोस्तों के ख़ास में है। पीछे हरदम रहने वाले, आगे होने के प्रयास में है। मरे हुए एहसास सभी के, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आस से गुज़रो, पास से गुज़रो। शिद्दत वाली, प्यास से गुज़रो। मत रोज़ ही, त्रास से गुज़रो। नाचो – गाओ, रास से गुज़रो। आती – जाती, साँस से गुज़रो। आम नहीं ‘जय’, ख़ास से गुज़रो। — जयकृष्ण चांडक ‘जय’

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मजबूरियों के साथ हूँ , मैं बेबसों में हूंँ, जीने की आरज़ू है मगर उलझनों में हूंँ। लब पर भी मेरा नाम है दिल में भी हूँ सनम, शामिल कुछ इस तरह मैं तेरी आदतों में हूँ। ये इश्क़ हुआ जबसे बुरा दिल का हाल है, ऐसी उड़ी है नींद के बस रतजगों में हूँ। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

रब की ये मंज़ूरी भी हो सकती है। आधी हसरत पूरी भी हो सकती हैं, पहले व्यर्थ समझ छोड़ा हमने जिसको, आज वो बात ज़रुरी भी हो सकती है। राम रखे रखतें हैं हरदम मुख में जो, हाथ में उनके छुरी भी हो सकती है। दिन काले गुज़रेगें बस हिम्मत रक्खो, आज रात सिंंदूरी भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

झोपड़ी हो या महल, घर, एक जैसे हो ग‌ए, घास की छत, संगमरमर, एक जैसे हो ग‌ए। बात मतलब की चली तो दोस्ती क्या दुश्मनी, फूल, कांटे, कांच, पत्थर, एक जैसे हो ग‌ए। देश के ख़ातिर कटें जब बात आई दोस्तों, हिंदू या मुस्लिम का हो सर, एक जैसे हो ग‌ए। राह में सब साथ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दिन की है कभी और है कभी रात की चिंता, इस बात को छोड़ा तो है उस बात की चिंता। ठंड से ठिठुर रहे हैं शेष गर्मियां भी है, फिर भी तो लोग कर रहे बरसात की चिंता। ख़ुद में ही मगन हैं सभी, हैं भावशून्य भी, किसको है किसी के यहां जज़्बात की चिंता। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुशनुमा जिंदगी नहीं आती, ग़र तेरी दोस्ती नहीं आती। गीत लिखता हूं शेर कहता हूं, मत कहो शायरी नहीं आती। मैं तरफदार हरदम सच का हूं, झूठ की पैरवी नहीं आती। मौत आती है रोज़ ही मुझ तक, इक मगर ज़िंदगी नहीं आती। चांद आता है संग में हरदम, तन्हा क्यूं चांदनी नहीं आती। सिर्फ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जश्न सारा का सारा हुआ आपका, हर हमारा सहारा हुआ आपका। डूबने को मेरे कितने मझधार हैं, तैरता हर किनारा हुआ आपका। चांँद से मांग ली मैंने अपनी दुआ, टूटता हर सितारा हुआ आपका। एक मांँ ही तो हिस्से में बस चहिये, दौलतों का पिटारा हुआ आपका। याद जो हों बुरी बस हो मेरे लिये, […]