गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

रब की ये मंज़ूरी भी हो सकती है। आधी हसरत पूरी भी हो सकती हैं, पहले व्यर्थ समझ छोड़ा हमने जिसको, आज वो बात ज़रुरी भी हो सकती है। राम रखे रखतें हैं हरदम मुख में जो, हाथ में उनके छुरी भी हो सकती है। दिन काले गुज़रेगें बस हिम्मत रक्खो, आज रात सिंंदूरी भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

झोपड़ी हो या महल, घर, एक जैसे हो ग‌ए, घास की छत, संगमरमर, एक जैसे हो ग‌ए। बात मतलब की चली तो दोस्ती क्या दुश्मनी, फूल, कांटे, कांच, पत्थर, एक जैसे हो ग‌ए। देश के ख़ातिर कटें जब बात आई दोस्तों, हिंदू या मुस्लिम का हो सर, एक जैसे हो ग‌ए। राह में सब साथ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दिन की है कभी और है कभी रात की चिंता, इस बात को छोड़ा तो है उस बात की चिंता। ठंड से ठिठुर रहे हैं शेष गर्मियां भी है, फिर भी तो लोग कर रहे बरसात की चिंता। ख़ुद में ही मगन हैं सभी, हैं भावशून्य भी, किसको है किसी के यहां जज़्बात की चिंता। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुशनुमा जिंदगी नहीं आती, ग़र तेरी दोस्ती नहीं आती। गीत लिखता हूं शेर कहता हूं, मत कहो शायरी नहीं आती। मैं तरफदार हरदम सच का हूं, झूठ की पैरवी नहीं आती। मौत आती है रोज़ ही मुझ तक, इक मगर ज़िंदगी नहीं आती। चांद आता है संग में हरदम, तन्हा क्यूं चांदनी नहीं आती। सिर्फ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जश्न सारा का सारा हुआ आपका, हर हमारा सहारा हुआ आपका। डूबने को मेरे कितने मझधार हैं, तैरता हर किनारा हुआ आपका। चांँद से मांग ली मैंने अपनी दुआ, टूटता हर सितारा हुआ आपका। एक मांँ ही तो हिस्से में बस चहिये, दौलतों का पिटारा हुआ आपका। याद जो हों बुरी बस हो मेरे लिये, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बह रहा है सराब से पानी, खुद के अपने हिसाब से पानी। आँख सूखी है इन दिनों लेकिन, गिर रहा क्यूं है ख़्वाब से पानी। ऐसी नज़दीकियां थी कांटों से, रिस रहा है गुलाब से पानी। ज़िन्दगी वो सवाल है जिसके, बह रहा हर ज़वाब से पानी। डूब जाता ज़रूर दरिया में, कम है मेरे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कुछ ज़मीं, कुछ आस्मांँ दोनों तरफ़, बंट गया है ये जहांँ दोनों तरफ़। झूठ, सच दोनों से अपना राब्ता, फंस गई है ये ज़ुबाँ दोनों तरफ़। मौत का पर्चा दिखाकर ज़िंदगी, ले रही है इम्तेहाँ दोनों तरफ़। राख के हैं ढ़ेर, जलती बस्तियाँ, रह गया है बस धुआंँ दोनों तरफ़। भागती राहें सभी खामोश हैं, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हाथ अपने उठा के बैठा हूं, रब से अर्जी लगा के बैठा हूं। नींद उनको कहीं न लग जाए, ख़्वाब सारे जगा के बैठा हूं। दर्द दिल का कहीं न पढले वो, इसलिए मुस्करा के बैठा हूं। आजमाना न तिश्नगी मेरी, मैं समुंदर सुखा के बैठा हूं। जितनी तूने कमाई जीवन भर, उतनी तो मैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इश्क से बढ़कर ज़माने में दुआ कुछ भी नहीं। इश्क़ मज़हब,इश्क़ ही रब, है खुदा कुछ भी नहीं। रोज़ ख़्वाबों में मुलाकातें हमारी हो रही, मत कहो कि अब हमारा राबता कुछ भी नहीं। मौत की हर दिन लड़ाई लड रहा हूं ज़िंदगी, आगे इसके तेरा मुझसे सामना कुछ भी नहीं। जी रहे हो ज़िंदगी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ले कितनी दूर जाओगे अब तिश्नगी रख दो, अपने से थोड़ी दूर अपनी बेबसी रख दो‌। जीने के लिए सांसों का सौदा करें चलो, चंद सांसें ही सांसों के लिए पेशगी रख दो। कब तक ये सितारे फ़लक पे तन्हा रहेगें, इस शब में इनके साथ चांद, चांदनी रख दो। कल रात मेरे पास आके […]