Author :

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दिन करता है रात की  चुगली, इक, दूजे के  साथ की चुगली। छिपते  नहीं  हैं, लाख  छुपाएं, शक्ल  करे हालात की चुगली। कोई   भी    संतुष्ट    कहां   है, जीत  गए तो  मात की चुगली। सावन ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तू   मिले, तेरा  घर  मिले  मुझको, ज़िंदगी  फिर  अगर  मिले मुझको। पत्थरों   को   बना   दूं,  इंसा  सा, काश   ऐसा  हुनर   मिले  मुझको। छांव   मिलती  रही  सदा जिनकी, अब  नहीं वो  शज़र  मिले मुझको। मेरे   लहजे   ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बीते  दिन को  याद करता  हूं सिहर जाता हूं मैं, कुछ कदम चलता हूं जाने क्यूं ठहर जाता हूं मैं। हंसके पीता हूं ज़हर जो ज़िंदगी देती रही, रोज़ जीता हूं यहां मैं, रोज़ मर जाता...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इश्क़ में और  आशिकी में  हम, गुम हैं अपनी ही शायरी में हम। एक  तारीख  जैसे  लिख्खें  हैं, खुद हमारी  ही  डायरी में हम। धूप में  जलते  ग़म  नहीं  होता, क्यूं जले रोज़  चांदनी  में  हम।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    पार दरिया के मेरा है घर मगर सबसे अलग, हर घड़ी तूफान  का रहता है डर सबसे अलग। झूठ, मक्कारी, दगा फितरत में मेरी है नहीं, बोलता  हूं सच  ये मेरा है हुनर सबसे अलग। लाग ...

  • गीतिका

    गीतिका

    कौन  है  चोर  कैसे  हम  जाने, कौन  सिरमौर  कैसे  हम जाने। झूठे अभिमान  के पीछे  उसके, किसका है ज़ोर कैसे हम जाने। ऐसे रिश्तें हैं आजकल जिनका, ओर  न  छोर  कैसे  हम  जाने। फर्क  दोनों  में ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जब  इश्क़ के असर में रहा। बहुत सबकी नज़र  में  रहा, यार  मेरे  पत्थर, पर  उनके, संग  शीशे  के  घर  में  रहा। सांस चली  जिस  पल  तक, केवल  मौत  के डर  में रहा। रब का साथ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कुछ अपने हैं पराए कुछ  खड़े हैं, मगर जो  साथ दे  बस वो  बड़े हैं। कभी भी वो नहीं  माने किसी की, ज़रासी बात  थी ज़िद पर अड़े हैं। उखडकर वो  सभी  बाहर मिलेगें, सभी मुर्दें ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जाने कितने सवाल रखता है। खूब सिक्के उछाल रखता है। यार मतलब से भरी दुनिया में, कौन किसका ख़्याल रखता है। जो उठाकर के आंख देखे हमें, कौन इतनी मज़ाल रखता है। वक्त भी ये बड़ा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    है बहुत आजकल ये थकी ज़िंदगी। जिंदगी की तरह न लगी जिंदगी। शाख से टूट कर गिर न जाए कहीं, है पके फल सी अब ये पकी ज़िंदगी। बचपने से जवानी तो सोई रही, अब बुढ़ापे...