कविता

शाख से टूटे पत्ते

शाख से टूटे कुछ पत्ते कुछ मुरझाये ,कुछ सूखे कुछ मिटटी में सने हुवे मुस्काती कलियों को देख रहे थे और अपनी किस्मत पे रो रहे थे . तभी एक बेदर्दी ने आकर कलियों को मसल डाला और एक गरीब बुढ़िया ने सूखे पत्तों को , अपनी झोली में भर डाला कलियों को मसलने वाला […]

कविता

कविता

लेखक के दिल के भाव तो, साहित्य कि भावनाओं में बहते हैं शब्द भी इन भावों से पिघल कर, लेखनी के वश में रहते है, साहित्य में अगर चमकना है, साहित्य की ‘किरण’ बन कर तो पहले माँ सरस्वती का गुणगान करें — लेखनी तो सरस्वती है, इसका न अपमान करें, सत्य लिखें सौम्य लिखे, […]

भाषा-साहित्य

जीवन में ‘साहित्य’ का योगदान

जीवन जन्म से लेकर अंतिम सांस तक चलता ही रहता है , लेकिन यह जीवन कैसा है, सम्मानित है, सुखी है शिष्ट है, श्रेष्ठ है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि जीवन भर आपने क्या सीखा क्या शिक्षा पायी, कैसा आचरण रखा और आपका जन जन से कैसा संपर्क रहा, हर व्यक्ति का […]

कविता

समुद्र का पानी

समुद्र का पानी खारा है तो क्या हुआ, सूरज की तपिश सह कर भी, बादल बन उड़ता है, टकराता है पत्थरों से,पहाड़ों से, फिर भी अमृत बन कर धरा पे बरसता है, मत भूलो की समुद्र के गर्भ में, कितने ही अनमोल मोती छिपे हैं, मत भूलो की समुद्र मंथन ने ही. हमें अमरत्व के […]

कविता

पोस्ट कार्ड

वो भी क्या ज़माना था — जब सिर्फ पांच पैसे का एक पोस्ट कार्ड , इंसानी रिश्तो का – कितना पक्का आधार था, मांमा चाचा ताऊ मौसा ,बिछड़ा दोस्त सहेली. सबके पोस्ट कार्ड का– बैचेनी से रहता इंतज़ार था, सब डाकिये की राह देखते थे – चिट्ठी आई है सुनने को आतुर रहते थे, और […]

कविता

है जय प्रकाश वह नाम जिसे इतिहास आदर देता है।

संपूर्ण क्रांति के जनक श्री लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी का आज जन्म दिवस है उनको मेरी और से विनत श्रद्धांजलि…… जग में तुम थे देश की शक्ति, तुम ही थे इस देश की आशा , यहाँ वहां सर्वत्र तुम्ही थे , देते सबको सम्पूर्ण दिलासा, प्रगति का आधार तुम्ही थे जन जीवन का आभार तुम्ही […]

कविता

हर सुख दुःख में साथ

मन की इच्छा हो तुम मेरे जीवन की अभिलाषा हो , धुंधले से मेरे शब्दों की, तुम स्पष्ट रूप परिभाषा हो, बागों में कलियों ने जो , मदहोश महक बिखराई है, लाजवाब सी वह सुगंध , अपने घर आँगन में छाई है, अधरों पर मुस्कान सदा हो, यही हमारे मन की कामना , जन्म जन्म […]

कविता

शिकायत

खामोश हूँ मैं , अब शिकायत नहीं होती, अब इस ज़माने में , किसी का ‘दिल’ समझने की ‘रिवायत ‘ ही नहीं होती , खामोश हूँ मैं , क्यों की मैं लड़ता नहीं झूठों के झमेले में पड़ता नहीं, मेरी ख़ामोशी ही मेरा उपचार है, ‘खता’ भूलने में ही उपकार है, मेरी यह ख़ामोशी ही […]

गीत/नवगीत

सावन से जीवन

नन्ही नन्ही सावन की बूंदे क्या मनमोहक रूप सजाती है सूक्षम सुषम शबनम सी बनकर , यह फूलों पे इतराती है, हंस हंस कर अपनी प्यारी, किस्मत पर कितना भरमाती है, फिर मेघ बरसते हैं अम्बर से, शुभ शीतल अमृत बरसाते है , तरसते मन को देते है सुकून, सुख चैन यहाँ सब पाते हैं […]

कविता

सावन भादों

दिनकर की स्वर्णिम किरणों ने, धरती का सुंदर रूप सजाया , काले मेघो ने सूरज के संग आँख मिचोली खेल रचाया, अब तो रिम झिम-रिम झिम बूँदें , अमृत बन कर बरस रहीं हैं, एक झलक प्रियतम की पाने, अँखियाँ जैसे तरस रहीं हैं, टिप टिप गिरती बूंदों ने , मनभावन संगीत रचाया है, मन […]