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  • शुभ दीपावली

    शुभ दीपावली

    यह अमावस तो दीपावली की रात है श्री राम जी का आगमन होगा लक्ष्मी गणेश जी की पूजा होगी हर तरफ चांदनी ही चांदनी होगी तमस की रात चांदनी से जगमगाएगी हर घर आँगन में दीप...

  • यदा यदा हि धर्मस्य

    यदा यदा हि धर्मस्य

    यदा यदा हि धर्मस्य फिर चरितार्थ होना चाहिए इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए पाप अत्याचार से फिर भरने लगें है घड़े भ्रष्टाचारी दानव ने खोखलीं कर दी जड़ें पापियों का अब फिर...

  • सावन से जीवन

    सावन से जीवन

    नन्ही नन्ही सावन की बूंदे क्या मनमोहक रूप सजाती है सूक्षम सुषम शबनम सी बनकर , यह फूलों पे इतराती है, हंस हंस कर अपनी प्यारी, किस्मत पर कितना भरमाती है, फिर मेघ बरसते हैं अम्बर...



  • मैं कौन ??? भूल गया इंसान

    मैं कौन ??? भूल गया इंसान

    अपनी दोस्ती और रिश्तेदारियां अपनी मज़बूरी और जिम्मेवारिया अपने व्यवसाय की परेशानियां कुछ समाज के नाम पर बेड़ियाँ कुछ धार्मिक औपचारिकताएं सरकारी कायदे कानून की भरमारियाँ अगर कुछ नहीं तो कुदरत की आपदाएं इतना कुछ झेलते...

  • उथल पुथल

    उथल पुथल

    हम अक्सर कहते हैं… इस दुनिया में इतनी उथल पुथल क्यों है कोई किसी की नहीं सुनता हर कोई अपनी राह चलता है…. कोई सामंजस्य नहीं है.. ज़रा सोचो.. हमारा शरीर भी तो हमारी दुनिया है.....

  • कविता

    कविता

    गर उदास रहता हूँ तो भी कोई हाल नहीं पूछता, आज ज़रा सा मुस्कुरा दिया तो सब वजह पूछते हैं किसी के गम में शरीक होना इनकी फितरत नहीं सब मुफ्तखोरी का माल उड़ाने का सबब...


  • अवनति

    अवनति

    जहाँ होते थे पहले लहलहाते खेत आज वहां कंक्रीट के जंगल हैं, पहले वहां खुले विचरते थे कुछ दुधारू पशु और किसान आज वहां तंग कमरों में, बसते हैं कुछ इंसान और कुछ हैवान, पूर्व और...