कविता

कविता

कहीं बंद  कहीं  हड़ताले   हैं आतंकित  विरोध  की  चाले  हैं , कहीं  आगजनि  कहीं  लूट  मार , हस्पताल  न  पहुंचे  कई  बीमार , स्कूल  बंद  ,बाज़ार  बंद , कारखानों  पे  लगे  ताले  हैं , जाकर  पूछो  उनके  दिल  से , जो  दैनिक  मजदूरी  वाले , उन  मुंहों  के  छिन  गए  निवाले यह  कैसी  विरोध  की  […]

कविता

शुभ दीपावली

यह अमावस तो दीपावली की रात है श्री राम जी का आगमन होगा लक्ष्मी गणेश जी की पूजा होगी हर तरफ चांदनी ही चांदनी होगी तमस की रात चांदनी से जगमगाएगी हर घर आँगन में दीप माला होगी फिर अमावस भी पूनम में बदल जाएगी इसी का तो हमें इंतजार है अम्बर से चंदा भी […]

गीत/नवगीत

यदा यदा हि धर्मस्य

यदा यदा हि धर्मस्य फिर चरितार्थ होना चाहिए इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए पाप अत्याचार से फिर भरने लगें है घड़े भ्रष्टाचारी दानव ने खोखलीं कर दी जड़ें पापियों का अब फिर यहाँ संहार होना चाहिए यदा यदा हि धर्मस्यफिर चरितार्थ होना चाहिए इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना […]

कविता

सावन से जीवन

नन्ही नन्ही सावन की बूंदे क्या मनमोहक रूप सजाती है सूक्षम सुषम शबनम सी बनकर , यह फूलों पे इतराती है, हंस हंस कर अपनी प्यारी, किस्मत पर कितना भरमाती है, फिर मेघ बरसते हैं अम्बर से, शुभ शीतल अमृत बरसाते है , तरसते मन को देते है सुकून, सुख चैन यहाँ सब पाते हैं […]

कविता

 मासूमियत से मशरूफियत

इस दुनिया में मासूमियत से जब हम- मशरूफियत की और बढ़ते हैं लगता है हर रिश्ते के मायने बदल जाते हैं पहले ज़रा सी चोट लगने पर भी रोते थे अब दिल पे ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराते हैं यारो संग उठना बैठना और खाना पीना , जश्न में हंसना नाचना और गाना बजाना अब […]

भाषा-साहित्य

. ‘जीवन में साहित्य का योगदान’– ‘हिंदी हैं हम’

जीवन जन्म से लेकर अंतिम सांस तक चलता ही रहता है, लेकिन यह जीवन कैसा है, सम्मानित है, सुखी है शिष्ट है, श्रेष्ठ है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि जीवन भर आपने क्या सीखा क्या शिक्षा पायी, कैसा आचरण रखा और आपका जन जन से कैसा संपर्क रहा, हर व्यक्ति  का जीवन एक सा नहीं […]

कविता

मैं कौन ??? भूल गया इंसान

अपनी दोस्ती और रिश्तेदारियां अपनी मज़बूरी और जिम्मेवारिया अपने व्यवसाय की परेशानियां कुछ समाज के नाम पर बेड़ियाँ कुछ धार्मिक औपचारिकताएं सरकारी कायदे कानून की भरमारियाँ अगर कुछ नहीं तो कुदरत की आपदाएं इतना कुछ झेलते इंसान की संवेदनाएं— चूर चूर हो जाती हैं — इतना टूट जाता है यह कमजोर इंसान न जाने कितने […]

कविता

उथल पुथल

हम अक्सर कहते हैं… इस दुनिया में इतनी उथल पुथल क्यों है कोई किसी की नहीं सुनता हर कोई अपनी राह चलता है…. कोई सामंजस्य नहीं है.. ज़रा सोचो.. हमारा शरीर भी तो हमारी दुनिया है.. क्या इसमें उथल पुथल नहीं होती हर अव्यय अपनी चाल चलता है.. मन कुछ कहता है, दिल कुछ चाहता […]

कविता

कविता

गर उदास रहता हूँ तो भी कोई हाल नहीं पूछता, आज ज़रा सा मुस्कुरा दिया तो सब वजह पूछते हैं किसी के गम में शरीक होना इनकी फितरत नहीं सब मुफ्तखोरी का माल उड़ाने का सबब ढूंढते हैं जब बीमार था लाचार था, तब मदद को कोई न आया आज ‘जश्न’ है तो सब “उस””काउंटर […]

कविता

जाने किस सफर गया

वह जो लिखते थे मेरी बिखरी ज़ुल्फो पे ग़ज़ल आज यह भी न पूछा कि तुम उलझी क्यों हो, पूनम का चाँद कहते थे मेरे इस हंसीं चेहरे को कभी यह भी न पूछा कि तुम बिफरी क्यों हो, ‘तेरी आँखे के सिवा इस दुनिया में रखा क्या है ‘- कहने वाले ने न जाना […]