गीतिका/ग़ज़ल

गजल

जब भी देखता हूँ आईने में अपना चेहरा, न जाने क्यूँ मुझे यह शख्स अनजान सा लगता है, जानता हूँ मैं की यह प्रतिरूप है मेरा, फिर भी क्यूँ मुझे मेहमान सा लगता है, मेरा ही बन कर सदा रहता है मेरे संग, फिर क्यूँ मुझे घर वीरान सा लगता है, सदा बसाया था इसे […]

कविता

बिखरे शब्द

बिखरे शब्द बार बार दिखते थे टकराते थे मेरी कलम से फिर न जाने क्यों लौट जाते थे, शायद मैं ही उन्हें पहचान न पाया न ही उन्हें कुछ तोड़ मरोड़ पाया . शब्द तो अपने में सच्चे थे, शायद हम ही शायरी के आगे बच्चे थे, लेकिन जैसे ही तुम्हारा ख्याल आया कुछ बिखरे […]

कविता

जय प्रकाश

है जय प्रकाश वह नाम जिसे इतिहास आदर देता है। जग में तुम थे देश की शक्ति, तुम ही थे इस देश की आशा , यहाँ वहां सर्वत्र तुम्ही थे , देते सबको सम्पूर्ण दिलासा, प्रगति का आधार तुम्ही थे जन जीवन का आभार तुम्ही थे , काली अंधियारी रातों में जीवन का प्रकाश तुम्ही […]

कविता

कविता

कहीं बंद  कहीं  हड़ताले   हैं आतंकित  विरोध  की  चाले  हैं , कहीं  आगजनि  कहीं  लूट  मार , हस्पताल  न  पहुंचे  कई  बीमार , स्कूल  बंद  ,बाज़ार  बंद , कारखानों  पे  लगे  ताले  हैं , जाकर  पूछो  उनके  दिल  से , जो  दैनिक  मजदूरी  वाले , उन  मुंहों  के  छिन  गए  निवाले यह  कैसी  विरोध  की  […]

कविता

शुभ दीपावली

यह अमावस तो दीपावली की रात है श्री राम जी का आगमन होगा लक्ष्मी गणेश जी की पूजा होगी हर तरफ चांदनी ही चांदनी होगी तमस की रात चांदनी से जगमगाएगी हर घर आँगन में दीप माला होगी फिर अमावस भी पूनम में बदल जाएगी इसी का तो हमें इंतजार है अम्बर से चंदा भी […]

गीत/नवगीत

यदा यदा हि धर्मस्य

यदा यदा हि धर्मस्य फिर चरितार्थ होना चाहिए इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए पाप अत्याचार से फिर भरने लगें है घड़े भ्रष्टाचारी दानव ने खोखलीं कर दी जड़ें पापियों का अब फिर यहाँ संहार होना चाहिए यदा यदा हि धर्मस्यफिर चरितार्थ होना चाहिए इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना […]

कविता

सावन से जीवन

नन्ही नन्ही सावन की बूंदे क्या मनमोहक रूप सजाती है सूक्षम सुषम शबनम सी बनकर , यह फूलों पे इतराती है, हंस हंस कर अपनी प्यारी, किस्मत पर कितना भरमाती है, फिर मेघ बरसते हैं अम्बर से, शुभ शीतल अमृत बरसाते है , तरसते मन को देते है सुकून, सुख चैन यहाँ सब पाते हैं […]

कविता

 मासूमियत से मशरूफियत

इस दुनिया में मासूमियत से जब हम- मशरूफियत की और बढ़ते हैं लगता है हर रिश्ते के मायने बदल जाते हैं पहले ज़रा सी चोट लगने पर भी रोते थे अब दिल पे ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराते हैं यारो संग उठना बैठना और खाना पीना , जश्न में हंसना नाचना और गाना बजाना अब […]

भाषा-साहित्य

. ‘जीवन में साहित्य का योगदान’– ‘हिंदी हैं हम’

जीवन जन्म से लेकर अंतिम सांस तक चलता ही रहता है, लेकिन यह जीवन कैसा है, सम्मानित है, सुखी है शिष्ट है, श्रेष्ठ है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि जीवन भर आपने क्या सीखा क्या शिक्षा पायी, कैसा आचरण रखा और आपका जन जन से कैसा संपर्क रहा, हर व्यक्ति  का जीवन एक सा नहीं […]

कविता

मैं कौन ??? भूल गया इंसान

अपनी दोस्ती और रिश्तेदारियां अपनी मज़बूरी और जिम्मेवारिया अपने व्यवसाय की परेशानियां कुछ समाज के नाम पर बेड़ियाँ कुछ धार्मिक औपचारिकताएं सरकारी कायदे कानून की भरमारियाँ अगर कुछ नहीं तो कुदरत की आपदाएं इतना कुछ झेलते इंसान की संवेदनाएं— चूर चूर हो जाती हैं — इतना टूट जाता है यह कमजोर इंसान न जाने कितने […]