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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सदियों के अरमान छुपाये बैठे हैं दिल में इक तूफान छुपाये बैठे हैं बाँट रहे हैं मिलजुलकर सब अपना ग़म इक हम हैं नादान, छुपाये बैठे हैं छीन न ले जाये दुनिया यह भी हम से...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दर्द से जिसका राब्ता न हुआ ज़ीस्त का उसको तज़रिबा न हुआ हाल-ए-दिल वो भी कर सके न बयाँ और मेरा भी हौसला न हुआ आरज़ू थी बहुत, मनाऊँ उसे उफ़! मगर वो कभी ख़फ़ा न...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    संग जितने पड़ें उतना ही सँवर जाते हैं हम वो आईने नहीं हैं जो बिखर जाते हैं सारे मंज़र जो ख्यालों में ठहर जाते हैं शाम ढलते ही निगाहों से गुज़र जाते हैं देखता मैं भी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मुझको सच कहने की बीमारी है इसलिए तो ये संगबारी है अपने हिस्से में मह्ज़ ख़्वाब हैं,बस! नींद भी, रात भी तुम्हारी है एक अरसे की बेक़रारी पर वस्ल का एक पल ही भारी है चीरती...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जानता हूँ, आपदाएँ शेष हैं। क्यों डरूँ,जब तक दुआएँ शेष हैं। जन्म लेते ही रहेंगे राम-कृष्ण, जब तलक धरती पे माँएँ शेष हैं। कोशिशें तो आप सारी कर चुके, अब तो केवल प्रार्थनाएँ शेष हैं। सूर्य...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    निगाहों में किसी की चंद-पल रुक कर चला आया परिंदा क़ैद का आदी नहीं था, घर चला आया सितमगर की ख़िलाफ़त में उछाला था जिसे हमने हमारे आशियाने तक वही पत्थर चला आया सभी क़समों, उसूलों,...



  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      धरा   है  घूर्णन  से  त्रस्त,  नभ   विषणन  में  डूबा  है दशा  पर  जग  की, ये  ब्रह्माण्ड  ही  चिंतन  में डूबा है हर इक शय  स्वार्थ  में आकंठ  इस  उपवन में डूबी है कली...

  • तंत्र के गणों का कर्त्तव्य

    तंत्र के गणों का कर्त्तव्य

    “”गर्व से बोलो,मैं भारतवासी हूँ। प्रत्येक भारतीय मेरा भाई है। भारतवासी मेरे प्राण हैं। भारत के देव-देवियाँ मेरे ईश्वर हैं, भारत का समाज मेरे बचपन का झूला है। मेरी जवानी की फुलवारी, मेरा पवित्र स्वर्ग है...