लघुकथा

वैधव्य

आज रामी ने अपने बहु बेटे को अलग   से अपना घर बसाने का कह दिया।बेटा जीगू ने अपने बापू की शक्ल भी नहीं देखी थी वह बहुत ही छोटा था जब उसके पिता की गर्दन तोड़ बुखार में मौत हो गई थी।उसको बड़े ही प्यार से उसकी मां रामी ने पाला पोसा था। जब वह […]

कविता

धूप छांव

जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार आनी जानी हैं ये माया तुम हो या हो हम कभी कभी हंसी के फुहारे कभी बहे गुम के आंसू सुख में जो न बहके दुःख में टूटे न कोई तो जीवन  बने सफल टूट न जाएं […]

सामाजिक

अपने अपने राम

जब भी कुमार विश्वास के प्रोग्राम का विज्ञापन देखती हूं जिसमे बड़े बड़े शब्दों में लिखा हैं”अपने अपने राम” पढ़ती हूं तो वाकई में खयाल आता हैं,राम अपने अपने कैसे? मैने उनका प्रोग्राम देखा तो नहीं हैं लेकिन मेरे हिसाब से भी राम सबके अपने अपने ही होते हैं ।   वैसे देखें तो बचपन […]

सामाजिक

डिजिटल डिटॉक्स

आजकल सुबह होती हैं मोबाइल में बजते अलार्म से और वहीं पर फोन हाथ में ले कर दिन शुरु होता हैं।दिन में जो भी काम हम करें किंतु ध्यान तो आपने फोन पर ही रहता हैं।फिर लेते हैं हाथ में अखबार और वह भी पूरा पढ़ा भी नहीं जाता और टीवी शुरू हो जाता हैं […]

कविता

घमासान

क्यों हो रहीं हैं घुटन क्यों डर रहा हैं मन कहीं तो हो रहा हैं इंसानियत पर जुल्म घुट घुट के मार रहें हैं लोग या मर मर के जी रहे हैं लोग मासूमों के हाल बुरे हैं सपने देखने वाले सो कहां पा रहें हैं आग सैलाब की लपटों में जुलसे जा रहें हैं […]

लघुकथा

जो करे सेवा उसे मिले मेवा

एक छोटा सा गांव था ,दो बेटों के साथ रेवती बहुत आराम से रह रही थी।दोनों बेटों को बहुत प्यार से पाला था उसने।जो जमीन उसके पति के निधन के समय उसके पास थी उसी पर खेती कर बच्चों का पालन पोषण और पढ़ाई लिखाई  और घर को  बड़ी  किफायत से चलाया  था उसने। जब […]

सामाजिक

जड़ों में तेल देना इसे कहते हैं

छोटे थे तब एक कहानी सुनी थी।एक भरापुरा परिवार था।दादा,दादी मां और पिताजी के अलावा चाचा,चाची और उन का बेटा और हम चार,दो भाई और दो बहनें।घर में सारा दिन ही मेला सा लगा रहता था। मां और चाचीजी दोनों सारा दिन रसोई और घरकाम में व्यस्त रहती थी।सभी बच्चों को पढ़ाने का कार्यभार चाचाजी […]

कविता

पड़ाव

ढल रही थी सांझ सी उम्र की लाली  भी गहरी होती जा रही थी समझदारी की लकीरें बालों में भी शुरू हो चुकी थी बिखरनी चांदी चाल जो थी नटखट झरने सी वह नदी सी गंभीर बहने लगी थी संभल नहीं पा रही थी जिम्मेवारी की जोलियां उठा के अपने ही बदन को चलना होता […]

राजनीति

वैश्विक प्रश्नों में अपने देश की उपलब्धियां

भारत की वैश्विक रूतबा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा हैं, इस बात में कोई शक नहीं हैं।ये बात अभी आए हुए यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की दो दिन की मुलाकात से साबित हो रही हैं।वे पहले दिन गुजरात में पहुंचे तो,जैसे उनका स्वागत हुआ ये देख  सराहना करतें हुए बोले कि उनका स्वागत हुआ […]

कहानी

कहानी प्यार की

सीमा और विमल के प्यार के चर्चे उनके पूरे ग्रुप में खूब थे।दो दिल एक जान थे दोनों,कभी  भी कुछ भी असहमति वाली बात उन लोगों के बीच होती ही नहीं थी। उनकी जोड़ी एक आदर्श जोड़ी थी।ऊंचा लंबा  गोरा चीट्टा विमल कमदेव का रूप था तो गोरी चंपा वर्णी,हिरनी सी आंखो वाली,गुलाब की पंखुड़ी […]