Author :

  • कविता – मन की गहराई

    कविता – मन की गहराई

    कविता – मन की गहराई मन के अंदर की उथल पुथल कोई बाहर वाला क्या समझेगा कब किस वक़्त क्या महसूस हो कैसे कोई जानेगा । राज़ छुपे हैं कैसे-कैसे पसन्द ना हो कांटे जैसे मन...




  • हिंदी से नाता टूट सा गया है

    हिंदी से नाता टूट सा गया है

    राष्ट्रभाषा पर नूतन विचार पढ़ने और आगे बढने से पहले आप यह जानें कि राज्यभाषा, राजभाषा, राष्ट्रभाषा और मातृभाषा क्या हैं ? हममें से अभी 80 प्रतिशत लोग यह नहीं बता पायेंगें क्योंकिं हिंदी से नाता...


  • कहानी – पुत्रमोह

    कहानी – पुत्रमोह

    पुत्रमोह ही तो था कि बेटे की लालच में किशोरीलाल ने दुबारा शादी करने का फैसला लिया था । उसकी बीवी को पिछले महीने फिर से बेटी हुई, अब किशोरीलाल की चार लड़कियां हो गयी थी...

  • कुछ रहे बाकी

    कुछ रहे बाकी

    कुछ रहे ना रहे पर ,उम्मीदों का दिया जलता रहे बाकी ! गिरकर उठने की जद में , स्वाभिमान रहे बाकी ! मैं खुद को जिता सकती हूँ , ये अभिमान रहे बाकी ! हर ख़ुशी...


  • झूठ का बोलबाला है

    आपके यदि एक भी दुश्मन नहीं हैं तो आप दिल जीतने में माहिर नहीं बल्कि झूठ बोलने में माहिर हैं ! क्युकिं झूठ पर बनी दुनिया को सच की हथोडी से मारना, बेहद मुश्किल काम है ! सच को सामने लाने की कोशिश में कई लोगों को नाराज़ हो जाते हैं, मैं नहीं चाहती कि जिस झूठ...