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  • कहानी – पुत्रमोह

    कहानी – पुत्रमोह

    पुत्रमोह ही तो था कि बेटे की लालच में किशोरीलाल ने दुबारा शादी करने का फैसला लिया था । उसकी बीवी को पिछले महीने फिर से बेटी हुई, अब किशोरीलाल की चार लड़कियां हो गयी थी...

  • कुछ रहे बाकी

    कुछ रहे बाकी

    कुछ रहे ना रहे पर ,उम्मीदों का दिया जलता रहे बाकी ! गिरकर उठने की जद में , स्वाभिमान रहे बाकी ! मैं खुद को जिता सकती हूँ , ये अभिमान रहे बाकी ! हर ख़ुशी...


  • झूठ का बोलबाला है

    आपके यदि एक भी दुश्मन नहीं हैं तो आप दिल जीतने में माहिर नहीं बल्कि झूठ बोलने में माहिर हैं ! क्युकिं झूठ पर बनी दुनिया को सच की हथोडी से मारना, बेहद मुश्किल काम है ! सच को सामने लाने की कोशिश में कई लोगों को नाराज़ हो जाते हैं, मैं नहीं चाहती कि जिस झूठ...

  • कविता- बेफिक्रे

    कविता- बेफिक्रे

    ना किसी के जाने का डर ना रूठने मनाने की चिंता ना किसी को पाने व्याकुल ना खोने से दुश्वार जीवन थकना हारना दूर था अपनो पर ऐतबार था बेफिक्री के आलम थे बेफिक्रे थे जब...

  • कविता – दे कोई दुहाई

    कविता – दे कोई दुहाई

    नयनों की पुकार है उस आंख वाले को जो नासमझ बना है जो निशब्द आगे बढ़ा है। नजर ना आया जिसे नयनों का गर्म नीर नजरअंदाज किया जिसने चोट खाती हुई पीर। वेदना के क्षण भूला...

  • नि:शब्द संसार

    नि:शब्द संसार

    तुम शब्द हो और मैं अर्थ तुम हो तो मैं हुं शब्द बिन अर्थ बेकार निशब्द संसार तुम प्रीत हो और मैं जोगन तुम हो तो जीवन रोशन प्रीत बिन जोगन निराधार निशब्द संसार तुम सुर...

  • लडकियां बोलने लगी हैं

    सहमकर सिर नीचे झुकाना बोलने में हिचकिचाना आँखों में ही डर जाने वालीं लडकियां बोलने लगी हैं ! जितनी दबी उतनी उठ गयी जितनी डरी उतनी संभल गयी खुलकर जीने की चाह में लडकियां बोलने लगी...


  • लघुकथा- नयी राह

    नैना आज बहुत गुस्से में थी, हाथ में लिया आधा गिलास पानी भी उसके गले से नीचे नहीं उतर रहा था और हर बार की तरह वजह थे वह घटिया लोग जो अपने आप को नैना का...