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  • औरत की आज़ादी का मतलब

    औरत की आज़ादी का मतलब

    ‘हमें चाहिए आज़ादी’, ‘हम लेकर रहेंगे आज़ादी’, किसे नहीं चाहिए आज़ादी? हम सभी को चाहिए आज़ादी। सोचने की आज़ादी, बोलने की आज़ादी, विचार की आज़ादी, प्रथाओं से आज़ादी, परम्पराओं से आज़ादी, मान्यताओं से आज़ादी, काम में आज़ादी,...

  • पायदान…  

    पायदान…  

    सीढ़ी की पहली पायदान हूँ मैं जिसपर चढ़कर समय ने छलाँग मारी और चढ़ गया आसमान पर मैं ठिठक कर तब से खड़ी काल चक्र को बदलते देख रही हूँ, कोई जिरह करना नहीं चाहती न कोई...

  • महाशाप…

    महाशाप…

    किसी ऋषि ने   जाने किस युग में   किस रोष में   दे दिया होगा सूरज को महाशाप नियमित, अनवरत, बेशर्त   जलते रहने का   दूसरों को उजाला देने का,   बेचारा सूरज   अवश्य होत होगा निढाल   थक कर बैठने का   करता होगा प्रयास   बिना जले   बस कुछ पल   बहुत चाहता होगा उसका मन,   पर शापमुक्त होने का उपाय   ऋषि से बताया न होगा,...

  • कैसी ज़िन्दगी? (10 ताँका)

    कैसी ज़िन्दगी? (10 ताँका)

    1. हाल बेहाल मन में है मलाल कैसी ज़िन्दगी? जहाँ धूप न छाँव न तो अपना गाँव! 2. ज़िन्दगी होती हरसिंगार फूल, रात खिलती सुबह झर जाती, ज़िन्दगी फूल होती!   3. बोझिल मन भीड़ भरा...

  • बन्दूक-बन्दूक का खेल

    बन्दूक-बन्दूक का खेल

    नक्सलवाद और मजहबी आतंकवाद में सबसे बड़ा बुनियादी फ़र्क उनकी मंशा और कार्यकलाप में है। आतंकवादी संगठन हिंसा के द्वारा आतंक फैला कर सभी देशों की सरकार पर अपना वर्चस्व बनाये रखना चाहते हैं। इनकी मांग न तो...

  • फ़ौजी-किसान  

    फ़ौजी-किसान  

    1. कर्म पे डटा कभी नहीं थकता फ़ौजी-किसान! 2. किसान हारे ख़ुदकुशी करते, बेबस सारे! 3. सत्ता बेशर्म राजनीति करती, मरे किसान! 4. बिकता मोल पसीना अनमोल, भूखा किसान! 5. कोई न सुने किससे कहे हाल...

  • मर गई गुड़िया..

    मर गई गुड़िया..

    गुड़ियों के साथ खेलती थी गुड़िया ता-ता थइया नाचती थी गुड़िया ता ले ग म, ता ले ग म गाती थी गुड़िया क ख ग घ पढ़ती थी गुड़िया तितली-सी उड़ती थी गुड़िया ! ना-ना ये...



  • नीयत और नियति…

    नीयत और नियति…

    नीयत और नियति समझ से परे है एक झटके में सब बदल देता है, ज़िन्दगी अवाक्! काँधे पर हाथ धरे चलते-चलते पीठ में गहरी चुभन अनदेखे लहू का फ़व्वारा काँधे पर का हाथ काँपता तक नहीं,...