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  • भूखा बचपन

    भूखा बचपन

    जब भूखा हो बचपन तो फिर प्रगति की बात कहां भांती है, देख अस्वस्थ मासूमों को दुखती मेरी अपनी छाती है। भूखे प्यासे बच्चे भटकते हैं अली- गली और सड़कों पर, तन पर कपड़े नहीं है...

  • ईमानदारी और खुद्दारी

    ईमानदारी और खुद्दारी

    “ईमानदारी और खुद्दारी” सुप्रिया अपनी बेटी तान्या के साथ ओला कैब में एक दिन मॉल जा रही थी। मॉल जाकर दो-तीन घंटे उसने शॉपिंग की । बिलिंग काउंटर में जाकर अपना मोबाइल निकालने गई तो पता...

  • जीवन का पथ

    जीवन का पथ

    ‘जीवन का पथ’ बहुत लंबा है बंधु चलते चलते आते हैं इसमें कई मोड़, चलना तो पड़ेगा तुझको फिर भी विघ्नों और बांधाओं को तोड़। जो डर गया तू , जो रुक गया तू कैसे मिलेगी...

  • पूर्णता

    पूर्णता

    “पूर्णता” तुम रहते हो मन में मेरे बनके अभिलाषा, तुम ही हो मेरे अंतस की उदगारों की भाषा । तुम्ही बसे हो मेरी आंखों की रोशनी में तभी संसार है रंगीन । सांसों में हो मेरे...

  • चुन्नू मुन्नू

    चुन्नू मुन्नू

    नन्हे मुन्ने बच्चों को समर्पित……. ” चुन्नू मुन्नू” आओ खेलें चुन्नू मुन्नू मिलकर सब कोई खेल, बातें करें एक दूजे से बढ़ाएं आपस में मेल। बनाए स्वयं को तंदुरुस्त होगा बलशाली हमारा तन, खूब हंसे संग...

  • अपनी माटी

    अपनी माटी

    ” अपनी माटी ” आज निर्मला का मन थोड़ा उदास था। पता नहीं किस सोच में डूबी थी वह। अभी कुछ ही दिन पहले की तो बात है, अमेरिका से बेटे के आने की खुशी में...

  • हौसला

    हौसला

    “हौसला ” मैंने हमेशा समन्दर का एक कतरा समझा है ख़ुद को, फ़िक्र नहीं क्या एहमियत दी समुन्दर ने उस बुंद को । कहते हैं कतरे-कतरे से बनता है सागर और बुंद-बुंद से भरती है गागर,...

  • मां दुर्गे सुस्वागतम

    मां दुर्गे सुस्वागतम

    दुर्गति परिहारिणी असुर विनाशिनी महाशक्ति रूपिणी आओ बैठो अपने आसन में। जग कल्याणकारिणी दस भुज धारिणी सुंदर मृग नयनी चरण धरो धरा प्रांगण में। हस्त खडग शोभित रूप करें सबको मोहित जन जन में है चर्चित...

  • आत्मविश्वास

    आत्मविश्वास

    लघु कथा ” आत्माविश्वास ” आज भी सुबह सैर करने निकली तो मन आनंदित तथा ऊर्जावान था। भोर के सूर्योदय एवं उसकी रक्तिम आभा सदा ही मेरा मन मोह लेता है। भोर की शुरुआत अब तो...

  • निराला बचपन

    निराला बचपन

    ” निराला बचपन ” बचपन की वो शरारतें वो पहली बारिश में भीगना, मिट्टी की सोंधी सोंधी सुगंध उष्ण तन- मन को शीतल करना । मन ना माने कोई बंधन आज माटी घुले पानी में डुबकी...