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  • हिंद का गांव

    हिंद का गांव

    शरीर बसा दूर देश में किंतु मन में बसा हिंद के गांव है, जहां की बोली में सरलता और जीवन में सहजता का भाव है। माटी की पगडंडी पर जब बारिश की पहली बूंदें गिरती है...

  • मर्दानगी

    मर्दानगी

    “हेलो.. अनीता.. जब से तुम मायके गई हो तब से मैं यहां परेशान हूं। तुम तो वहां सब के संग बहुत खुश हो न? तुम्हें क्या फर्क पड़ता है मैं परेशान हूं कि नहीं।” चिढ़ते हुए...

  • पहली गलती

    पहली गलती

    ” मेम साहब.. हम पर झूठा इल्जाम मत लगाओ। आप की कान की बाली खो गई है तो मैं इसमें क्या करूं? मुझे क्यों चोर ठहरा रही हो? मैं आपके यहां चोरी करने नहीं आती, काम...

  • राधा मैं हारी

    राधा मैं हारी

    सुन लो पुकार मेरी, कहती है राधा बेचारी। अब न बनूंगी मैं राधा, बनके राधा मैं हारी।। सुनो हे गिरधारी मुरली मनोहर अगले जन्म तुम्हें है राधा बनना, बनूंगी मैं कृष्ण कन्हैया तुम्हारा सही जो पीर...

  • कद्रदान

    कद्रदान

    तीन बहनों में मंझली नवीना का नैन नक्श अति साधारण है परंतु गुणों का भंडार। पढ़ने में सबसे होशियार। सभी कामों में निपुण, चाहे घर में खाना बनाना हो या बाजार से जाकर राशन पानी, सब्जियां...

  • मन का हौसला

    मन का हौसला

    जिसके मन में हो हौसला, डरे न वह देखकर फासला। चाहे जितनी दूर हो मंजिल, कर ही लेता है वह हासिल। चाहे चंदा न चमके नभ में, तमस पसरा हो चाहे पथ में। निडर कभी उससे...

  • सबसे चटख रंग

    सबसे चटख रंग

    हर वर्ष की तरह इस बार भी होली आई रंगों की बहार लेकर। रंगो के संग संग खुशियों की बहार भी आई है। भर पिचकारी लोग एक दूजे पर रंग उड़ेल रहे हैं। रंगो से सराबोर...

  • निश्छल प्रेम

    निश्छल प्रेम

    भ्रमर कहे कुसुम के कानों में करती हो तुम हमसे प्रेम निच्छल, पर मैं तो हूं बादल एक आवारा ठहरे न एक जगह मन चंचल। फूलों फूलों पर बैठ लेकर मधुरस बांधा मैंने सबको अपने प्रेम...

  • ईगो

    ईगो

    “ईगो” कस्तूरबा अस्पताल के प्राइवेट वार्ड के रूम नंबर 10 के सामने आकर दीक्षा के कदम सत: ही रुक गए। अपनी सासू मां सुहासिनी के बेड के पास ही कुर्सी पर सलिल बैठा हुआ था। सलिल...

  • कौवा चला हंस की चाल

    कौवा चला हंस की चाल

    कौवा चला हंस की चाल, चुगे दाना मोती। बदल कर अपनी वेशभूषा, पहना कुर्ता धोती।। पहना कुर्ता धोती, अब कोई न पहचान पाता। बैठा जाकर हंस सभा में, अपना मुखड़ा छुपाता। मुख से कुछ बोले न,...