बाल कविता

बाल गीत – ताऊ जी 

दिन भर कितना लाड़ लड़ाते ताऊ जी नई कहानी रोज़ सुनाते ताऊ जी। भूलें चाहे पापा जी टॉफ़ी लाना दूध जलेबी खूब खिलाते ताऊ जी। चाचा कहते पढ़ ले, पढ़ ले , ओ मोटी ! उनको अच्छे से धमकाते ताऊ जी। कठिन पढ़ाई मुझको जब भी दुखी करे बड़े प्यार से सब समझाते ताऊ जी। […]

गीत/नवगीत

गीत – रत्न छुपे अनमोल सखी

रत्न छुपे अनमोल सखी ! मन के तहखाने में । इक गुड़िया है थिरक-थिरक कर नाचा करती है , रोती-गाती कभी पीर भी बाँचा करती है। ज़िद्दी-सी रूठे, थक जाऊँ उसे मनाने में….. सुधियों की माला है अनगिन धवल-धवल मोती आखर हैं पुखराज लोरियाँ संग लिए सोती गुंथ उलझी है वक्त लगेगा ,माँ ! सुलझाने […]

शिशुगीत

शिशु गीत

1 खेल रहे थे मुन्नू राजा लेकर खूब खिलौने प्यारे दिखे दूर से चुन्नू भैया झट से लगे छुपाने सारे । 2 कुछ कच्चे ,कुछ पक्के लाए ख़रबूज़े कितने मन भाए लगीं डाँटने मुझको अम्माँ गमले में जो बीज लगाए । 3 टिक-टिक करती चले घड़ी कहीं न जाए वहीं खड़ी ठीक-ठीक जब समय बताए […]

कविता

शुभ कामना !

बहुरंगी दुनिया भले , रंग भा गए तीन , बस केसरिया , सित, हरित ,रहें वंदना लीन | रहें वंदना लीन ,सीख लें उनसे सारी , ओज ,शूरता ,त्याग , शान्ति हो सबसे प्यारी | धरा करे शृंगार ,वीर ही रस हो अंगी , नस-नस में संचार ,भले दुनिया बहुरंगी ||१   अक्षत आशाएँ रहें […]

कुण्डली/छंद

कुछ कुंडलियाँ

दिन ने खोले नयन जब , बड़ा विकट था हाल , पवन, पुष्प, तरु, ताल, भू , सबके सब बेहाल | सबके सब बेहाल, कुपित कुछ लगते ज्यादा , ले आँखों अंगार, खड़े थे सूरज दादा | घोल रहा विष कौन, गरज कर जब वह बोले , लज्जित मन हैं मौन, नयन जब दिन ने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : अब उनको समझाऊँ कैसे

अब उनको समझाऊँ कैसे, रूठे श्याम मनाऊँ कैसे ।1 दुनिया लेकर रंग खड़ी है, दामन आह ! बचाऊँ कैसे ।2 खोटे सिक्के सी ख़ुद्दारी , हो गई आज चलाऊँ कैसे ।3 मन उड़ अम्बर छूना चाहे , फेर धरा पर लाऊँ कैसे।4 खूब नशा तेरी चाहत का, होश भला मैं पाऊँ कैसे ।5 ~~~डॉ. ज्योत्स्ना […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : सोचा क्या अपना बनाने से पहले

सोचा क्या अपना बनाने से पहले तो अब सोच लेना भुलाने से पहले ।१ नाज़ुक ,बहुत हैं ये चाहत की कलियाँ ठहर ,बिजलियों को गिराने से पहले ।२ तेरे सिवा कौन दुनिया में फिर भी , मैं क्यों मान जाऊँ मनाने से पहले ।३ समझ लेना कुछ भी नहीं होगा हासिल, नफरत की हुंडी भुनाने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : सच कहती हूँ !

  साथ तुम्हारा करता है मग़रूर मुझे दिल से अपने अब मत करना दूर मुझे बाबुल तेरी उँगली थामे घूम फिरी तब लगती थी ये दुनिया मश्कूर मुझे माँ तेरी जाई के पंखों में दम है, सच कहती हूँ ! क्यों समझा मजबूर मुझे घर तेरा और माँ-बाबू जी हैं मेरे कर लो ये बँटवारा […]

हाइकु/सेदोका

माहिया

  काँटों में कलियाँ हैं बिटिया की बतियाँ मिसरी की डलियाँ हैं ।१ क्या थी कुव्वत मुझ में बाँट दिया रब ने माँ ! बिटिया में , तुझ में । २ क़िस्से दिन रातों के संग खिलौने हैं मीठी सी बातों के । ३ मिलने की आस बँधी झूम उठी बगिया फूलों से ख़ूब लदी […]

कुण्डली/छंद

कुंडलियाँ

१ कठिनाई के सामने, झुके न जिनके माथ। जोड़े हैं उनको सदा, क़िस्मत ने भी हाथ।। क़िस्मत ने भी हाथ, बढ़ाकर दिया सहारा मंज़िल ने ख़ुद राह, दिखाकर उन्हें पुकारा खिले ख़ुशी के फूल, सरस बगिया मुस्काई सदा हुई निर्मूल, टिकी है कब कठिनाई ।। २ मिलता कब किसको यहाँ, केवल सुख उपहार ग्रीष्म, शीत, […]