गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

अलग अलग बात करते सब, नहीं जाने ये’ जीवन को ये’ माया मोह का चक्कर है’ कैसे काटे’ बंधन को| किए आईना’दारी मुग्ध नारी जाति को जग में नयन मुख के सजावट बीच भूले नारी’ कंगन को | सुधा रस फूल का पीने दो’ अलि को पर कली को छोड़ कली को नाश कर अब […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

जनता’ दिलगीर है’ शासन अभी गंभीर नहीं देश है जनता’ का’ नेता की’ ये’ जागीर नहीं | अंध विश्वास कि सब भाग्य से’ मिलते हमको कर्म फल जो मिले’ इस जन्म में’ तकदीर नहीं | तेरे’ आने से’ मुझे मिलता’ है’ आनंद बहुत चाहता है तो’जा’ पैरों में’ तो’ जंजीर नहीं | नीति कहती कि […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

हुक्म की तामील करना कोई’ बेदाद नहीं बादशाही सैनिकों से कोई’ फ़रियाद नहीं | “देशवासी की तरक्की हो” पुराना नारा है नई बोतल, सुरा में तो’ ईजाद नहीं | भक्त था वह, मूर्ति पूजा की लगन से उसने द्रौण से सीखा सही वह, द्रौण उस्ताद नहीं | देश है आज़ाद, हैं आज़ाद भारतवासी किन्तु दकियानूसी’ […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

मुफलिस भी है इंसान, *लयान मांगता है * सुख, चैन छोटा बड़ा सभी अब सम्मान मांगता है | काम करो भूला दो, वो था पूर्व जमाना आज का सभी जवान पहचान मांगता है | शूरवीर लड़ते, करते सीमा की रक्षा सरहद पर तैनात जवां जान मांगता है | प्रचंड पाखंडी है, कपटी है,नेता सब नेता […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

देश है उपवन खिले गुल से महकना चाहिए देश भक्तों के ह्रदय पल पल मचलना चाहिए | दिल की’ दरिया में अभी अब कुछ नहीं है भावना नेह के सद्भाव से हर दिल धड़कना चाहिए | शोर है चारों दिशाओं में नहीं अब शांति है शांति से सब वृक्ष में पक्षी चहकना चाहिए | अब […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

भरी बन्दूक, तुम गोली चला देना अभी अबला नहीं नारी, दिखा देना | अगर अब शत्रु टेढ़ी आँख से देखे सड़क पर शत्रु की लाशें बिछा देना | कभी फिर देश पर हमला करे कोई उन्हें अपराध के सममिति सजा देना | उठाया अस्त्र जब पीछे नहीं मुड़ना दहलता दुश्मनों के दिल हिला देना | […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

सब तन्हा इस धरा पर, संग जाता कौन है ? कौन जाने स्वर्ग से भी साथ आया कौन है ? खोज में है संत साधू किस धरा पर स्वर्ग है भाँग पीते हाथ मलते स्वर्ग पाया कौन है ? सार सब ग्रंथों का’ इक ईश्वर नहीं है दूसरा किन्तु दावा कौन करता, धर्म अच्छा कौन […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

स्वतंत्र देश ने’ पुख्ता विधान पाया है नवीन देश ने’ इक संविधान पाया है | कठीन काम था’ इस संविधान को लिखना तमाम दोस्त यहाँ वुद्धिमान पाया है | गुलाम देश था’ अंग्रेज की गुलामी की भविष्य इसका अभी शानदार पाया है | उमंगी देश तो’ उत्कर्ष पर पहुंचा है उड़ान के लिए’ इक आसमान […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

सभी कर्म फल पीछे’ तकदीर पहले मिले बाद में दंड, तकसीर पहले | तबाही या’ संहार जग का करे कौन वही जो किया सिर्फ तामीर पहले | यहाँ जिंदगी देखना है बहुत बाकि अभी जान लो सिर्फ तासीर पहले | लिखूं क्या मैं’ सन्देश, परदेश में वो रखूं ख़त में सब हाले तहरीर पहले | […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

गर पियोगे शराब बे मौक़ा नाम होगा खराब बे मौक़ा | सोच कर बात सर्वदा करना दुःख देता जबाब बे मौक़ा | धैर्य की है सदा कमी उसमे वो दिखाते हैं’ ताब बे मौक़ा | आपसी खींच तान में होता बीच में इन्तिखाब बे मौक़ा | मुल्क में एक हो कडा शासक चार क्यों हो […]