गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

अब हरिक जन में हौसला होगा जात अभिमान तोड़ना होगा | देश में एक रूपता लाने कौम आधार एक सा होगा | राह में मुश्किलें जो’ भी आए बारहा विघ्न लांघना होगा | भेदभावों की’ नीति वर्जन कर साम्यता पाठ सीखना होगा | पाकि का सिर कुचलना’ निश्चित है पाकि शमशीर तोड़ना होगा | शत्रु […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

अब नेक राजधर्म निभाने की’ बात कर सब मुफलिसों को’ अन्न खिलाने की’ बात कर | शोषित हुए शताब्दियों से लोग, अब तलक अब उन गिरे हुए को उठाने की’ बात कर | अब धूर्तता न कर तू’, न कर तू इधर उधर उजड़े गरीब घर को’ बसाने की’ बात कर | इस पाकि* ने […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

रहनुमा को सदा मस्तियाँ चाहिए खूबसूरत मधुर तितलियाँ चाहिए | लीन है मयकशी में बशर जो, उन्हें गोश्त सेंका हुआ, मछलियाँ चाहिए | सामने वार करने से’ जो डरे अस्त्र बदले उन्हें चूड़ियाँ चाहिए | भारती का बड़ा दिल है’ करती क्षमा शुद्ध दिल से लिखे अर्जियाँ चाहिए | लात के भूत को दंड हो […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

पार्टियों में द्वेष ज्यों बढ़ता रहा दुश्मनी का भी जहर घुलता रहा | माल सब गोदाम में भरते गए बारहा गोदाम सब जलता रहा | बस्तियां अब हो गई खाली सभी दुश्मनी का फूल फल फलता रहा | बेटियाँ जब भी कहीं जलती रही सिसकियों का सिलसिला यूं चलता रहा | इस चमन को तो […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

प्यार का हर शर्त अब मंजूर है प्यार तेरा मेरा’ तो मक्दूर है | आज थोड़ा चाय पानी आम है आजकल ये घूस तो दस्तूर है | देश का सब माल भरते अपने’ घर दीखते नेता सभी अक्रूर है | वेश है कंगाल का आपाद तक रूप भिक्षुक माल तो भरपूर है | आज तक […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

प्रेम में डूबना खुमारी है प्रेम पागल बशर पुजारी है | जानता हूँ समाज कहते हैं तेरी तारीफ चाटुकारी है | मैं किया प्यार बावफा तुझ से तेरा इंकार बेइमानी है | जिंदगी में उदास था मैं प्रिय जीस्त को तू ने ही सँवारी है | तू है’ तो जिंदगी बहुत धनवान बिन तेरे जिंदगी […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

शील मानव का सही पहचान है स्वार्थ हिंसा से भरा शैतान है | अंध विश्वासों का’ उन्मूलन करो एक ही तरकीब अब विज्ञान है | रहनुमा तो सामने जाते नही फ़ौज करते जान की कुर्बान है | देश को सब रहनुमाओं ने लुटा देश का तकदीर नौजवान है | सैनिकों की देन की तुलना नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

जगत में बारहा आता रहा हूँ खुदा का मैं बहुत प्यारा रहा हूँ | वफ़ा में प्यार मैं करता रहा हूँ निभाया प्यार मैं सच्चा रहा हूँ | मिले मुझसे यहाँ सब प्यार से यार मुहब्बत गीत मैं गाता रहा हूँ | खुदा की यह खुदाई है बहुत प्रिय खुदाई देखने आता रहा हूँ | […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

चारो तरफ की’ मार से’ दुश्मन बिखर गए जांबाज़ सैनिकों की’ दिलेरी से’ डर गए | हर एक ने लिखा नया’ इतिहास जंग में दश दश को’ मारकर वहां’ से कूच कर गए | जब भाग दौड़ खूब मची, सबकी नज़र बचा वो शत्रु भागकर दगा’ देकर किधर गए ? चारो तरफ है’ फांद किधर […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

जौंक-ओ-मीर शायरी है अभी नज़्म के एक लेखनी है अभी | नज्र में उनकी’ तीरगी है अभी वो बची ख़ाक, जिंदगी है अभी | बेवफा बात जो की’ कढ़वी दो गुनी जान फूँकती है अभी | माधुरी तो शबाब है, पीओ रात बाकी है’ मयकशी है अभी | राज नैतिक लड़ाई’ जैसी हो आपसी गाढ़ी’ […]