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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    शुश्रुषण माँ बाप का करके, खरा हो जाना कर्ज माता का पिता का था, अदा हो जाना | पूजते है लोग तन मन से वही ढोंगी को ढोंग से संभव नहीं जग में खुदा हो जाना...

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    ग़ज़ल

    कर्म करना यहाँ’ निष्ठा से, धरम ही जाना भाग्य, प्रारब्ध, सभी को अब भरम ही जाना | मृत्यु के बाद कहाँ जाता, न जाने मानव आदमी रूप में’ विचरण को जनम ही जाना | कर्म फल...

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    ग़ज़ल

    कर्म का भोगते सिर्फ अन्जाम है दुःख सुख कर्म का मात्र ईनाम है | मुर्ख ही सोचते हैं धरा कष्ट मय मानते स्वर्ग में खूब आराम है | प्यार करके सभी प्यार से दूर क्यों इश्क...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इस देश का चुनाव है’ अपने शबाब में अब कौन शख्स है खरा’ इस इन्तखाब में ? जनता के’ सामने सभी’ माहिर जवाब में आदाब को भी’ छोड़ते’ नेता इताब में | आरोप अब लगा रहे’...

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    ग़ज़ल

    दिल को’ जिसने बेकरारी दी वही बेताब था जिंदगी के वो अँधेरी रात में शबताब था | मेरे जानम प्यार का ईशान था, महताब था चिडचिडा मैं किन्तु उसमे तो धरा का ताब था | स्वाभिमानी...

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    ग़ज़ल

    अभी किसी को’ भी’ नेता पे’ एतिकाद नहीं प्रयास में असफल लोग नामुराद नहीं | किये तमाम मनोहर करार, सब गए भूल चुनाव बाद, वचन रहनुमा को’ याद नहीं | गरीब सब हुए’ मुहताज़, रहनुमा लखपति...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तारीफ़ से हबीब कभी तर नहीं हूँ मैं मुहताज़ के लिए कभी पत्थर नहीं हूँ मैं | वादा किया किसी से निभाया उसे जरूर इस बात रहनुमा से तो बदतर नहीं हूँ मैं | वो सोचते...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    थकी थकी सी’ दिखी थी, तनाव ऐसा था नकारना था’ कठिन वह, दबाव ऐसा था | कभी नहीं मिले’ भरपेट खाद्य निर्धन को गरीबी’ से सभी’ पीड़ित, अभाव ऐसा था | उथल पुथल हुआ सामान के...

  • नई सोच -कहानी

    नई सोच -कहानी

    नई सोच दीपा की शादी 10 वर्ष की उम्र में ही दीपंकर से हो गई थी | गांवकी रीति-रिवाजों के अनुसार वह 16 वर्ष की उम्र तक मायके में ही रही | उसके बाद उसका गौना...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रहनुमा दूंढते हैं’ माल कहाँ सत्ता’ कुर्सी समान हाल कहाँ | प्यार में तेरे’ मैं हुआ बेहाल मेरे’ तक़दीर में विसाल कहाँ | रात दिन व्यस्त हैं सभी सैनिक देखते हैं कि कब बवाल कहाँ |...