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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तारीफ़ क्या करूँ तेरी आखों की नूर की देदिप्त अंग अंग है’ सुरलोक हूर की | वो नूर और ओज, सभी दिव्य देव के राजा या’ रंक चाह है’ दैविक जुहूर की | अभियान-स्वच्छता चली’ हर...

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    ग़ज़ल

    प्यार की राह तो दुश्वार है आसां होना आशिकों, ये भी मयस्सर नहीं यजदां होना | आज इंसान की किस्मत है परीशाँ होना कोशिशें भी करे मुस्किल है गुलिस्ताँ होना | रात मेरी, नई राहें मेरी,...

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    ग़ज़ल

    तुम नहीं सुनते कहानी मेरी हो रही बंजर जवानी मेरी | क्या कहे तुमको जबानी मेरी खत्म अब सब वो रवानी मेरी | धीरे’ धीरे बह गया पानी सब रह गयी केवल निशानी मेरी | क्या...

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    ग़ज़ल

    नया युग आ गया है अब, असहमति को मिटाना है नया भारत नया ढाँचा, बनेगा वह निराला है | वे’ जो नाराज़ हैं उनको, मनाना है दुबारा अब सभी को साथ लेकर अब हम्ही को दम...

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    ग़ज़ल

    टूटी हुई गृहस्थी बसाने की बात कर अब आपसी रियाज़ निभाने की बात कर भाषण की आग में जले घर द्वार जिन्दगी अब छोड़ सब तू आग बुझाने की बात कर रोते विलखते जीस्त में दुख...

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    ग़ज़ल

    जिक्र तेरी सुन्दरता और फिर बयाँ उनका कौन कौन है सच्चा दोस्त इम्तिहाँ उनका | वज्मे शाह में मय का है अकीद बंदोवस्त राजदां था’ जो तेरा, अब है’ राज़दां उनका | ये धरा है उनकी,...

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    ग़ज़ल

    उद्योग हो, भरोसा भी बेहद, अथाह हो मंजिल मिले उसी को सबल जिनमे चाह हो | इंसान की स्वतन्त्र, इबादत की राह हो इंसान के प्रकाश, ज्यों उजली निगाह हो | इंसान है समान, खुदा की...

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    ग़ज़ल

    हम करे कुछ भला नादान बुरा कहते हैं जख्म पर के दवा को वो जफ़ा कहते हैं | मंत्री बन कर वो फँसाया सभी चोरों को फिर एडवोकेट बने चोर के, क्या कहते हैं ? जो...

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    ग़ज़ल

    वो बेरुखी हबीब की’ दिल के सितम हुये रिश्ते तमाम छिन गए’ आशिक अलम हुये | संचार का विकास किया जिंदगी सुगम दुर्वोध बाधा विघ्न सभी ओर कम हुए | तलवार जख्मी’ ज्यूँ हुया सैनिक हताश...

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    ग़ज़ल

    स्वच्छता योजना पहले ही बनाए होते स्वच्छ भारत सजा ये देश निराले होते | एक हो योजना, हर स्थान हो भोजनशाला सांसदों तर्ज हो तो घर मे उजाले होते | * भोजनालय हो सुलभ सस्ता, है...