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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    प्यार का हर शर्त अब मंजूर है प्यार तेरा मेरा’ तो मक्दूर है | आज थोड़ा चाय पानी आम है आजकल ये घूस तो दस्तूर है | देश का सब माल भरते अपने’ घर दीखते नेता...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    प्रेम में डूबना खुमारी है प्रेम पागल बशर पुजारी है | जानता हूँ समाज कहते हैं तेरी तारीफ चाटुकारी है | मैं किया प्यार बावफा तुझ से तेरा इंकार बेइमानी है | जिंदगी में उदास था...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    शील मानव का सही पहचान है स्वार्थ हिंसा से भरा शैतान है | अंध विश्वासों का’ उन्मूलन करो एक ही तरकीब अब विज्ञान है | रहनुमा तो सामने जाते नही फ़ौज करते जान की कुर्बान है...

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    ग़ज़ल

    जगत में बारहा आता रहा हूँ खुदा का मैं बहुत प्यारा रहा हूँ | वफ़ा में प्यार मैं करता रहा हूँ निभाया प्यार मैं सच्चा रहा हूँ | मिले मुझसे यहाँ सब प्यार से यार मुहब्बत...

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    ग़ज़ल

    चारो तरफ की’ मार से’ दुश्मन बिखर गए जांबाज़ सैनिकों की’ दिलेरी से’ डर गए | हर एक ने लिखा नया’ इतिहास जंग में दश दश को’ मारकर वहां’ से कूच कर गए | जब भाग...

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    ग़ज़ल

    जौंक-ओ-मीर शायरी है अभी नज़्म के एक लेखनी है अभी | नज्र में उनकी’ तीरगी है अभी वो बची ख़ाक, जिंदगी है अभी | बेवफा बात जो की’ कढ़वी दो गुनी जान फूँकती है अभी |...

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    ग़ज़ल

    छुआ है होंठ को हमने इशारे में किया इज़हार जानम ने इशारे में | नयन की चाह थी देखूँ उन्हें जी भर किया वो काम आँखों ने इशारे में | लिया है अंगडाई प्रेयसी ने जब...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    समझना यही था कि क्या चाहते थे प्रजा न्याय को माँगना चाहते थे | किसी में हुआ कुछ, अलग ही किसी में सभी एकसा फैसला चाहते थे | फसल की दरें देहकाँ को मिला था गुमाश्ता...

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    ग़ज़ल

    घर द्वार/ नहीं कर्ज/ में’ दिलगीर/ गर आये सुन कष्ट नयन मेरे भी’ आंसू से भर आए | सब शत्रु का’ छक्का छुड़ा रणभूमि हिलाई ललकारते’ शमशीर उठाकर वो’ घर आए | मायूस न हो, दूर...

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    ग़ज़ल

    पर्व है शुभ, लगा गुलाल हमें रब ! अभी करने’ दे धमाल हमें | अब तलक हम नहीं हुए काबिल वज्म से तू नहीं निकाल हमें | अनुसरण तो तुझे किये ऐ रब! योग्य साँचे में’...