गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

नींद में भी देखता, कोई बुलाता है मुझे जोर से आवाज देकर, ज्यूँ जगाता है मुझे | गुनगुनाता आप अपने, मेरे मन पाखी कभी जानता हूँ, वो मधुर गाना सुनाता है मुझे | सुख, खुशी, रस से भरी इक जिंदगी ही चाहिए हर दफा जानम खुशी-झूले झुलाता है मुझे | सर्वदा जानम किया उद्यम सदा, […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

उम्र का यह ढलान है प्यारे यह बुढ़ाई थकान है प्यारे | नग्न भूखे किसान है प्यारे झोपड़ी ही मकान है प्यारे | बात करते अवास्तविक हर दम आसमानी उड़ान है प्यारे | म्यान तलवार साज सज्जा सब यह लड़ाका निशान है प्यारे | सब दबंगों का’ बोल बाला है भेद करना विधान है प्यारे […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

प्यास दिल का अभी तो बुझा ही नहीं इश्क क्या है पता भी चला ही नहीं | गर शिकायत मैं रब से करूं, तो कहूं जिंदगी तो मिली, सुख मिला ही नहीं | ढूंढता था दवा इश्क का मैं यहां इस दवा खाने’ में तो दवा ही नहीं | जीत उसने लिया साम या दाम […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

वही बेसुरा गीत गाने लगे सभी भाव उसके पुराने लगे | जनाधार जब टूटता ही गया निराली कहानी सुनाने लगे | दिलों में भरा है जहर रहनुमा जहर सिक्त भाषण पिलाने लगे | अमन गीत अब चाहिए देश को सभी देशवासी जताने लगे | पराजित विपक्षी परेशां सभी विजय दुन्दुभी ये बजाने लगे | अभी […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

मौसमी हवा बनी तूफान इन दिनों सब शत्रु के मकान है’ वीरान इन दिनों | हैवान को मिला सभी’ सम्मान इन दिनों अक्षम बशर का हो रहा’ गुणगान इन दिनों | कोई कभी नहीं किया’ अच्छा अवाम का बेकार में ही’ मानते एहसान इन दिनों | देखो जहाँ वहीँ लूटी इज्जत गरीब की दुष्कर्म का […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

तमाम दीन हँसाने को ईद आई है इलाह प्रेम सिखाने को ईद आई है | चमन दिलों का उजड़ता गया सदा यहाँ पर दिलों का बाग़ सजाने को ईद आई है | सबाह गर्म हवा और शाम भी तीखी शबाब आग बुझाने को ईद आई है | सभी दिलों में भरा नफरतों के बादल दिलों […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

विरल है लोग करते जो रहबरी अब करेगी कुछ नया यह लेखनी अब | नया कुछ यह जमाना मांगता है अमीरी की मिटा दो दुश्मनी अब | मिलाया धूल में मेरा भरोसा करे कोई इशारा जिंदगी अब | किया जो कुछ नहीं स्वीकार रब को मनाने रब, करें क्या आदमी अब | किया विश्वास पूरी […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

रोकना अब नहीं यह सफर दोस्तों अब मिले कोई इक हमसफर दोस्तों | देख लो जिंदगी के कहर दोस्तों हर कदम पर मिला है जहर दोस्तों | ज़ख्म जिसने दिया, खूब नजदीक था वो इनायत सभी बेअसर दोस्तों | छोड़कर अब कहाँ जायँ संसार में आपके ही तो है’ मेरा शहर दोस्तों | साम या […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

अलग अलग बात करते सब, नहीं जाने ये’ जीवन को ये’ माया मोह का चक्कर है’ कैसे काटे’ बंधन को| किए आईना’दारी मुग्ध नारी जाति को जग में नयन मुख के सजावट बीच भूले नारी’ कंगन को | सुधा रस फूल का पीने दो’ अलि को पर कली को छोड़ कली को नाश कर अब […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

जनता’ दिलगीर है’ शासन अभी गंभीर नहीं देश है जनता’ का’ नेता की’ ये’ जागीर नहीं | अंध विश्वास कि सब भाग्य से’ मिलते हमको कर्म फल जो मिले’ इस जन्म में’ तकदीर नहीं | तेरे’ आने से’ मुझे मिलता’ है’ आनंद बहुत चाहता है तो’जा’ पैरों में’ तो’ जंजीर नहीं | नीति कहती कि […]