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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    यह खुश नसीबी’ ही थी’, कि तुमसे जिगर मिले हूराने’ ख़ुल्द जैसे’ मुझे हमसफ़र मिले | किस्मत कभी कभी ही’ पलटती है’ अपनी’ रुख डर्बी के ढेर में तेरे जैसे गुहर मिले | था बेसहारा’ गरीब,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जिंदगी में काम कुछ हो नाम के बज्मे नाज़े चूमा’ लूँ मैं जाम के | आँखों’ से आखें मिली, दिल खो गया याद कुछ है तो, तुम्हारे नाम के | डरता’ हूँ तेरी गली जाने से...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कभी तेरी भी’ चाहत हो, मिले आ जाये’ है मुझसे नज़ाकत से उठे घूँघट, तू’ शर्मा जाये’ है मुझसे | तकाज़ा-ए-निगह तेरी, पकड में हो मेरी जब भी पशेमां और उलझन में, तू’ घबरा जाए’ है...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    (१) राजा’ मंत्री हुआ करे कोई जनता’ से तो वफ़ा करे कोई | बात सबको खरी खरी बोलूँ द्वेष हो तो जला करे कोई | दिल्लगी तो कभी नहीं करता मर्जी’ उनकी हँसा करे कोई |...

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    ग़ज़ल

    बिल्ली चूहे का खेल, दिखाना कहे जिसे नेता प्रजा के बीच, तमाशा कहे जिसे वादा किया था तुमने मिलेंगे यहीं सदा लंबा है इंतज़ार, तमन्ना कहे जिसे दर्दे गरीब को कोई जानता नहीं यहाँ सहरा है...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    निर्दयी कंस सा’ दानव कोई मामा न हुआ सच यही बात कि उस सा कोई पैदा न हुआ | रोज़ ही हादसा’ क्यों हो रहा’ है रेल में’ अब रेल बन जायगा’ अब गोर, गर अच्छा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सब बताये न हुई इनको तसल्ली न सही दोस्त तो और बहुत, पर दिली वो भी न सही जिंदगी काट ली है सुख से सफलतापूर्वक दोस्त! तुम सा सभी आनंद, अमीरी न सही रहनुमा खाते हैं...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    प्यार से माँ की वो’ लोरी गुन्गुनानी फिर कहाँ राज कन्या राज रानी की कहानी फिर कहाँ ? तुम ही’ लायी थी बहारें जिंदगी में दिलरुबा तुम चली जब से गयी, वो जिन्दगानी फिर कहाँ ?...

  • कहानी – अहम् के गुलाम

    कहानी – अहम् के गुलाम

    रश्मि ने कलाई में बंधी घडी देखी।रात्रि के तीन बज रहा था।चारो तरफ निस्तब्तता छायी हुई थी।रश्मि को छोड़कर दुनियां में शायद सभी नर,नारी ,बाल ,वृद्ध गहरी नींद में सो रहे थे, लेकिन उसकी आँखों में...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तारीफ़ क्या करूँ तेरी आखों की नूर की देदिप्त अंग अंग है’ सुरलोक हूर की | वो नूर और ओज, सभी दिव्य देव के राजा या’ रंक चाह है’ दैविक जुहूर की | अभियान-स्वच्छता चली’ हर...