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  • अपूर्ण मकसद !

    अपूर्ण मकसद !

    जिंदगी का मकसद क्या है ? अनादि काल से यह प्रश्न अनुत्तरित खड़ा है, उतर किसी ने न जाना न किसीने इसका उत्तर दिया l क्या खाना ,सोना और फिर मर जाना यही  जीव की नियति...

  • चक्रव्यूह !

    चक्रव्यूह !

      इस जिंदगी का क्या भरोसा कब शाम हो जाय , भरी दोपहरी में कब सूरज डूब जाय …. उम्मीद के पतले  सेतु के सहारे मकड़ी सा  आगे कदम बढ़ा रहे है और खुद के बुने...

  • उत्तर दो हे सारथि !

    उत्तर दो हे सारथि !

    उत्तर दो हे सारथि ! जीवन-संग्राम के मध्यस्थल में इस काया रथ में बैठकर ……, मेरा मन-अर्जुन पूछता है विवेक–सारथि कृष्ण से , हे ज्ञान-सारथि ,सुनो ! मुझमें उठ रहे अनंत,अतृप्त जिज्ञासाओं को, क्या तुम शांत...

  • हक़–ओ-इन्साफ़

    हक़–ओ-इन्साफ़

      क़ाज़ी भी है मजबूर , क़ातिल को बचाना है एक तरफ हक़ हैं , दूसरे हुज़ूरे आला है |   एमाँल-ए-शैतान ने , डुबोयी थी कश्ती मझधार में बच गए कुल्ज़ुमे सरसर  से, रब की...