गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

समझना यही था कि क्या चाहते थे प्रजा न्याय को माँगना चाहते थे | किसी में हुआ कुछ, अलग ही किसी में सभी एकसा फैसला चाहते थे | फसल की दरें देहकाँ को मिला था गुमाश्ता सभी फायदा चाहते थे | गरीबी कभी देश से ख़त्म होगी? अभागा सभी आसरा चाहते थे | परेशान थे […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

घर द्वार/ नहीं कर्ज/ में’ दिलगीर/ गर आये सुन कष्ट नयन मेरे भी’ आंसू से भर आए | सब शत्रु का’ छक्का छुड़ा रणभूमि हिलाई ललकारते’ शमशीर उठाकर वो’ घर आए | मायूस न हो, दूर करो सारी’ निराशा गर आपको’ आश्रय न मिले आप घर आए | सरहद में’ हमारे सभी’ सैनिक है’ निरापद […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

पर्व है शुभ, लगा गुलाल हमें रब ! अभी करने’ दे धमाल हमें | अब तलक हम नहीं हुए काबिल वज्म से तू नहीं निकाल हमें | अनुसरण तो तुझे किये ऐ रब! योग्य साँचे में’ तेरे ढाल हमें | क्या किया अब तलक, न हमको पूछ मुर्ख हैं हम, न कर सवाल हमें | […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

अब तक विकास के लिए’ क्या क्या किया गया कमजोर वास्ते तो’ जरा सा किया गया | सबका विकास, हाथ सभी का, यही तो मंत्र तारीफ से गरीब में’ प्यारा किया गया | हर बार इंतखाब में’ वादा है’ इज्दियाद (बढ़ चढ़ कर ) पूरा नहीं हुआ जो’ भी’, वादा किया गया | नास्तिक ने’ […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

गुल की’ खुशबू तैरती गुलजार का वक्त है माली के इक उपहार का | सावधानी से सही कहना यहाँ कान होता है इसी दीवार का | अस्पतालों में दवाई की कमी है परेशानी सभी उपचार में | प्रेयसी की चुप्पी’ कहती प्यार है जो जुबाँ का अनकहा इकरार का | वो जुवान अपनी अभी खोली, […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

चुनावी फित्न तो सोचा हुआ है हमारे साथ तो धोखा हुआ है | लुटेरा देश से भागा हुआ है पहरे वाला अभी सोया हुआ है| अभी कोई नहीं विश्वास लायक ज़माना अब बुरा आया हुआ है | अहंकार अब न करना, शत्रु शातिर न सोचो शत्रु तो हारा हुआ है | हजारों जिंदगी क्षण में […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

न्याय का दीन इंतजार करें दोस्त को दोस्त एतवार करें| फक्त सच को तुरंत व्यक्त करें आप हमको न बेकरार करें | देश रक्षा में सावधान रहे देश द्रोही न शर्मसार करें | देश मजबूत है, बिकाऊ’ नहीं रहनुमा देश उस्तुवार करें | अब चुनावों में दागदार न हो भ्रष्ट को आप नागवार करें | […]

पद्य साहित्य

ग़ज़ल

भर गया दिल प्रेम से दिलदार का अब नहीं कोई वजह इनकार का | सिर्फ हर्षोल्लास पर्वों में नहीं, मान मर्यादा रखो त्यौहार का | आपकी तस्वीर सीने पर रखी चाह मेरी आपके दीदार का | यह जटिल फंडा समझना है कठिन संत का संसार से बेजार का | फंड का कुप्रयोग होता ही रहा […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

दुनिया सभी देखी यहाँ, इसके सिवा देखा कहाँ ए जिंदगी जग में कटी, जग छोड़ अब जाना कहाँ ? अज्ञान है इंसान मणि को मानते भगवान वह कंकड़ नगीना को पहन भगवान को पाया कहाँ ? भगवान का लेकर सहारा जो मचाया लूट है बदनाम जो रब को किया, इंसान वो रोया कहाँ ? विश्वास […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

हुआ है प्यार तो वे चश्म से इकरार करते है छुपाकर प्यार दिल में, क्यों जुबां से वार करते है ? हमेशा एक ही वादा किया करते कुटिल नेता भली भोली प्रजा हर बात पर इतवार करते हैं | ज़माने में सियासत बिक गयी गुंडों के’ हाथों में वो’ जबरन और की गुजरान पर अधिकार […]