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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दुख और कष्टों को भुलाना सीख लें दुख दौर में भी मुस्कुराना सीख लें | रब ने दिया है वुद्धि, इस्तेमाल हो आजीविका विधिवत कमाना सीख लें | दुनिया नहीं इतना बुरा, यह मान लो आपत्ति...

  • कविता

    कविता

    आरक्षण – एक भष्मासुर आरक्षण एक भष्मासुर है जिनलोगों ने इसकी सृष्टि की शिव जी की भांति वही आज उससे बचने के लिए इधर उधर भाग रहे हैं, अपने कर्मों पर पछता रहे हैं | काम...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रिश्तों’ का रंग बदलता ही’ गया तेरे बाद रौशनी हीन अलग चाँद दिखा तेरे बाद | जीस्त में कुछ नया’ बदलाव हुआ तेरे बाद मैं नहीं जानता’ क्यों दुनिया’ खफा तेरे बाद | हरिक त्यौहार में’...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दुश्मनों को मिटा’ देना यही’ काल अच्छा है खुद करो भूल, अदू को सज़ा’ ख्याल अच्छा है | रक्षा की आड़ में’ इल्जाम कमाल अच्छा है झूठ को सत्य बताना भी’ धमाल अच्छा है नाम है...

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    ग़ज़ल

    ए इनायत है खुदा की जो गुलामी मिट गई बन गए हम दोस्त, ज़हमत दुश्मनी भी मिट गई | पल पलों की जिंदगी में ये जवानी मिट गई दिल लगाकर जो खुदा ने की, खुदाई मिट...

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    ग़ज़ल

    पाक आतंकी कभी बाज़ आएँ क्या बारहा दुश्मन से’ धोखा खाएँ क्या ? गोलियाँ खाते ज़माने हो गये राइफल बन्दूक से घबराएँ क्या ? जान न्योछावर शहीदों ने की’ जब सरहदों को हम मिटाते जाएँ क्या...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तंज़ सुनना तो विवशता है, सुनाये न बने दर्द दिल का न दिखे और दिखाए न बने पाक से हम करें क्या बात बिना कुछ मतलब क्यों करे श्रम जहाँ कि बात बनाए न बने क्या...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दीप रिश्तों का बुझाया जो, जला भी न सकूँ प्रेम की आग की ये ज्योत बुझा भी न सकूँ हो गया जग को पता, तेरे मेरे नेह खबर राज़ को और ये पर्दे में छिपा भी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तुम्हारी ख्वाहिशें इतनी कि पूरा करने’ दम निकले मे’री भी ख्वाहिशों का जो ज़नाज़ा निकले’, कम निकले | किया था जिंदगी जिसके हवाले, वो अलग निकले न विश्वास और निष्ठा, बेवफा मेरे सनम निकले | पिया...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    यह खुश नसीबी’ ही थी’, कि तुमसे जिगर मिले हूराने’ ख़ुल्द जैसे’ मुझे हमसफ़र मिले | किस्मत कभी कभी ही’ पलटती है’ अपनी’ रुख डर्बी के ढेर में तेरे जैसे गुहर मिले | था बेसहारा’ गरीब,...