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  • (तरही ) ग़ज़ल

    (तरही ) ग़ज़ल

    कभी दुख कभी सुख, दुआ चाहता हूँ इनायत तेरी आजमा चाहता हूँ वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ तेरे इश्क की इम्तिहा चाहता हूँ जो भी कोशिशे की हुई सब विफल अब हूँ बेघर मैं अब...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रूठा रूठा रहता है जानम, कुछ बात बताये तो हम उसे (उन्हें)मनाये कैसे, साजन पास कभी आये तो | है अभिमानी ताकत के मद में, करता केवल मन का धैर्य रखेगा क्या वह गर, कोई उसको...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इन्तिखाबों में फैसला क्या है देर करने में’ फायदा क्या है | शत्रु नादान बोलते क्या है उनका’ महफूज़ मशवरा क्या है ? देर क्यों है चुनाव राज्यों में घोषणा में मुआमला क्या है | साफ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हमारे देश को सुन्दर बनाना है ख़ुशी से इक तराना गुनगुनाना है| अभागा औ धनी अंतर मिटा देना सभी के साथ मिलकर मुस्कुराना है | नई शिक्षा नया पथ का सृजन करना निराश्रय जो उन्हें आश्रय...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    वज़ीरों में हुआ आज़म, बना वह अब सिकंदर है विपक्षी मौन, जनता में खमोशी, सिर्फ डरकर है | समय बदला, जमाने संग सब इंसान भी बदले दया माया सभी गायब, कहाँ मानव? ये’ पत्थर हैं |...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कहीं वही तो’ नहीं वो बशर दिल-ओ-दिलदार जिसे तलाशती’ मेरी नज़र दिल-ओ-दिलदार | हवा के’ झोंके’ ज्यों’ आते सदा सनम मेरे नसीम शोख व महका मुखर दिल-ओ-दिलदार | सूना उसे कई’ गोष्टी में’, फिर भी’ प्यासा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सटीक बात की, आक्षेप बाँधनू क्या है ये बातचीत में खरसान बैर बू क्या है? नया ज़माना नया है तमाम पैराहन अगर पहन लिया वो वस्त्र, फ़ालतू क्या है | हसीन मानता हूँ मैं उसे, नहीं...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जान लो पत्थर में होती जान है कंकड़ों में दीखते भगवान है | ईँट पत्थर जोड़कर बनता भवन जिंदगी में आदमी सामान है | हो गया पत्थर सभी मानव यहाँ आदमी में अब कहाँ ईमान है...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दुख और कष्टों को भुलाना सीख लें दुख दौर में भी मुस्कुराना सीख लें | रब ने दिया है वुद्धि, इस्तेमाल हो आजीविका विधिवत कमाना सीख लें | दुनिया नहीं इतना बुरा, यह मान लो आपत्ति...

  • कविता

    कविता

    आरक्षण – एक भष्मासुर आरक्षण एक भष्मासुर है जिनलोगों ने इसकी सृष्टि की शिव जी की भांति वही आज उससे बचने के लिए इधर उधर भाग रहे हैं, अपने कर्मों पर पछता रहे हैं | काम...