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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ए इनायत है खुदा की जो गुलामी मिट गई बन गए हम दोस्त, ज़हमत दुश्मनी भी मिट गई | पल पलों की जिंदगी में ये जवानी मिट गई दिल लगाकर जो खुदा ने की, खुदाई मिट...

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    ग़ज़ल

    पाक आतंकी कभी बाज़ आएँ क्या बारहा दुश्मन से’ धोखा खाएँ क्या ? गोलियाँ खाते ज़माने हो गये राइफल बन्दूक से घबराएँ क्या ? जान न्योछावर शहीदों ने की’ जब सरहदों को हम मिटाते जाएँ क्या...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तंज़ सुनना तो विवशता है, सुनाये न बने दर्द दिल का न दिखे और दिखाए न बने पाक से हम करें क्या बात बिना कुछ मतलब क्यों करे श्रम जहाँ कि बात बनाए न बने क्या...

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    ग़ज़ल

    दीप रिश्तों का बुझाया जो, जला भी न सकूँ प्रेम की आग की ये ज्योत बुझा भी न सकूँ हो गया जग को पता, तेरे मेरे नेह खबर राज़ को और ये पर्दे में छिपा भी...

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    ग़ज़ल

    तुम्हारी ख्वाहिशें इतनी कि पूरा करने’ दम निकले मे’री भी ख्वाहिशों का जो ज़नाज़ा निकले’, कम निकले | किया था जिंदगी जिसके हवाले, वो अलग निकले न विश्वास और निष्ठा, बेवफा मेरे सनम निकले | पिया...

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    ग़ज़ल

    यह खुश नसीबी’ ही थी’, कि तुमसे जिगर मिले हूराने’ ख़ुल्द जैसे’ मुझे हमसफ़र मिले | किस्मत कभी कभी ही’ पलटती है’ अपनी’ रुख डर्बी के ढेर में तेरे जैसे गुहर मिले | था बेसहारा’ गरीब,...

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    ग़ज़ल

    जिंदगी में काम कुछ हो नाम के बज्मे नाज़े चूमा’ लूँ मैं जाम के | आँखों’ से आखें मिली, दिल खो गया याद कुछ है तो, तुम्हारे नाम के | डरता’ हूँ तेरी गली जाने से...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कभी तेरी भी’ चाहत हो, मिले आ जाये’ है मुझसे नज़ाकत से उठे घूँघट, तू’ शर्मा जाये’ है मुझसे | तकाज़ा-ए-निगह तेरी, पकड में हो मेरी जब भी पशेमां और उलझन में, तू’ घबरा जाए’ है...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    (१) राजा’ मंत्री हुआ करे कोई जनता’ से तो वफ़ा करे कोई | बात सबको खरी खरी बोलूँ द्वेष हो तो जला करे कोई | दिल्लगी तो कभी नहीं करता मर्जी’ उनकी हँसा करे कोई |...

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    ग़ज़ल

    बिल्ली चूहे का खेल, दिखाना कहे जिसे नेता प्रजा के बीच, तमाशा कहे जिसे वादा किया था तुमने मिलेंगे यहीं सदा लंबा है इंतज़ार, तमन्ना कहे जिसे दर्दे गरीब को कोई जानता नहीं यहाँ सहरा है...