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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नाश करने पाप को पावक उबलना चाहिए देश प्रेमी का धड़कता दिल मचलना चाहिए | नाश भ्रष्टाचार का होना जरूरी है अभी हाल सारे देश का निश्चित बदलना चाहिए | घूस देते राज नेता वोट लेने...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    चाहती क्या तू ज़माना छोड़ दें ? ये सभी रिश्ते निभाना छोड़ दें ? बेवफा बनना सिखाता क्यूँ मुझे वक्त! मेरे राह आना छोड़ दें | जिंदगी में बेदना तुम ने दिया और तू मुझको सताना...

  • गजल

    गजल

    हर तरफ है खौफ का मंजर खुला रहनुमा का राज़ का तेवर खुला | बंद के पश्चात जब परिसर खुला आदमी के हाथ में खंजर खुला | सिन्धु से भारत घिरा है तीन सू किन्तु पश्चिम...

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    गजल

    हैरान हो गया बुझा व्यवहार देखकर अभिभूत हो गया दिली सत्कार देखकर अंग्रेज आये थे यहाँ व्यापार के लिए फिर रह गए थे माल का अम्बार देखकर नाराज़ थी प्रिया मेरी जब देर हो गई आनंद...

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    ग़ज़ल

    सिर्फ तकरीर ही सब कुछ नहीं, तद्वीर भी थी जो मिला उसमें भी इंसान की तक़दीर भी थी | चाह थी पर नहीं आना हुआ अबतक यहाँ पर हाथ थे मुक्त तो क्या? पैर में जंजीर...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    शुश्रुषण माँ बाप का करके, खरा हो जाना कर्ज माता का पिता का था, अदा हो जाना | पूजते है लोग तन मन से वही ढोंगी को ढोंग से संभव नहीं जग में खुदा हो जाना...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कर्म करना यहाँ’ निष्ठा से, धरम ही जाना भाग्य, प्रारब्ध, सभी को अब भरम ही जाना | मृत्यु के बाद कहाँ जाता, न जाने मानव आदमी रूप में’ विचरण को जनम ही जाना | कर्म फल...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कर्म का भोगते सिर्फ अन्जाम है दुःख सुख कर्म का मात्र ईनाम है | मुर्ख ही सोचते हैं धरा कष्ट मय मानते स्वर्ग में खूब आराम है | प्यार करके सभी प्यार से दूर क्यों इश्क...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इस देश का चुनाव है’ अपने शबाब में अब कौन शख्स है खरा’ इस इन्तखाब में ? जनता के’ सामने सभी’ माहिर जवाब में आदाब को भी’ छोड़ते’ नेता इताब में | आरोप अब लगा रहे’...

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    ग़ज़ल

    दिल को’ जिसने बेकरारी दी वही बेताब था जिंदगी के वो अँधेरी रात में शबताब था | मेरे जानम प्यार का ईशान था, महताब था चिडचिडा मैं किन्तु उसमे तो धरा का ताब था | स्वाभिमानी...