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  • कविता

    कविता

    गाँव के सन्नाटे में जब खिलती है चाँदनी रात कौन पूछे ?किससे कुशलात खिलखिलाते आँगन हो गये हैं मूर्छित पगडंडियां झाँक आतीं हैं उस मोड़ तक जहाँ से हँसी के कहकहे इठलाते हुए समा जाते थे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    भूख का भूगोल अब पढ़ना कठिन है डूबना आसान पर तरना कठिन है मूर्ति की पूजा करो या जाप भी दुखी के संग चार पग चलना कठिन है चीखती है भुखमरी मुख फाड़ कर यूँ खेद...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कच्चे घरों में रिश्ते पक्के होते थे हों जैसे भी परिवार अच्छे होते थे॥ सीखते थे उम्र भर गुण बुजुर्गों से लिए दिल में दुलार बच्चे होते थे ॥ मिल-बाँट कर खाते थे आधी रोटी थाली...

  • गुरु पूर्णिमा

    गुरु पूर्णिमा

    गुरु पूर्णिमा एक पर्व ही नहीं जीवन का यथार्थ है इसे हृदय से मनाएँ भले ही फिर मंदिर में दीपक न जलाएँ सोचो अगर गुरु परंपरा न होती तो ज्ञानियों की नई पौध कौन उगाता ……....

  • सफल उड़ान

    सफल उड़ान

    रख दिया हाथ सिर पर किसी ने तो साया बन गया मुसकाया देख कर मुझको तो हँसना आ गया रखा पाँव पर पाँव किसी के तो चलना आ गया पकड़ कर उंगली दिखाई चौखट दुनिया रंगना...

  • देखो,बरस रहा है पानी…

    देखो,बरस रहा है पानी…

    बादलों से आता पेड़ों को गुदगुदाता प्रेम गीत गाता देखो,सुबह से बरस रहा है पानी । फुहारी साड़ी ले आता पलकों से सहलाता सोई हसरतें जागता उदास मौसम को भगाता देखो, बिन थके लरज़ रहा है...

  • गीतिका : चाँद आया था…..

    गीतिका : चाँद आया था…..

    चाँद आया था मेरे साथ-साथ बाग में विस्मित हो जा छुपा रंगों की फाग में ॥ उछलता रहा रात भर वो वल्लरियों में थका हारा जा गिरा झरनों के झाग में ॥ उड़तीं रहीं तितलियाँ पराग...