कविता

कलम

कलम कहती है बहुत कुछ कुछ दिल की बातें जब लेती है यह सुन शब्दों से आलिंगन कर एहसासों के मोतियों को पिरो लेती है। कलम देखती है वो सब कुछ जो दिखाया जाता है कभी अनदेखी, अनदेखा भी दिल दहलाने वाली वारदातों को भी लिख देती है। कलम लेखक की ताकत होते हुए भी […]

कविता

कविता

प्यार प्रकृति से जो कर ले प्यार को सही पहचानेगा नील गगन से तारे तोड़कर क्या खोएगा क्या पायेगा प्यार अविरल धारा में हैं प्यार प्रकृति प्रवाह में है प्यार सीखें परिंदों से हम प्यार सीखे प्रकृति से हम। विनाश किया प्रकृति का हमने विक्राल बनाया तौबा न की हमने हम क्या जाने प्यार होता […]

पुस्तक समीक्षा

लघुकथा संवाद

नमस्कार मित्रों, कुछ समय पहले ही आदरणीया कल्पना भट्ट दीदी द्वारा लिखित किताब ” लघुकथा सम्वाद ” मिली। मैं इस किताब को पूरे इत्मीनान से पढ़ना चाहती थी इस कारण कुछ दिन पहले मैंने इस किताब को पढ़ना शुरू किया और आज इस किताब को जब पूरा पढ़ लिया तब एक लंबी सांस के साथ […]

कविता

होली

वसन्त से शुरू होते रंग होली तक गीले हो जाते टेसू के पानी में घूल जाते इत्र की खुशबू फूलों की पंखुडियों से मिश्रित रंग चढ़ जाता है विविध रंगों का हो जाता आसमाँ इंद्रधनुषी सोच समां जाती है रंगो में हुरियारे में ढ़ोल-नगाड़े ताशे-झाँझ धमार की गूँज नव-यौवन होते पुल्लकित यह सिर्फ रंग तो […]

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा – पटना वाला प्यार (कहानी संग्रह)

पुस्तक : पटना वाला प्यार विधा- कहानी संग्रह लेखक- अभिलाष दत्त प्रकाशक-समदर्शी प्रकाशन संस्करण- अक्टूबर,2018 मूल्य – ₹150/- अभिलाष दत्त द्वारा लिखी हुई इस पुस्तक में कुल 10 कहानियाँ हैं। इस संग्रह को पढ़ते हुए यह मेहसूस ही नही हुआ कि मैं कोई कहानी पढ़ रही हूँ, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कोई किशोर […]

बाल कविता

नमकीन पसीना

चले मेला आओ भालू भाई पहनो सूट, बूट और टाई देखो बाहर शीत लहर है ठण्डी हवा चारो पहर है आप हो मेले के महाराजा खेल होगा और बजेगा बाजा आओ आओ जल्दी आओ मेहनत के बाद रबड़ी खाओ आज में हम तो जीते हैं भालू कहाँ अब दीखते हैं यह तो मैं खुद को […]

लघुकथा

आत्मघात (लघुकथा)

अब्दुल बहुत दिनों बाद घाटी में अपने घर आया था  | उसने चारों तरफ  देखा, घर में उसकी बूढी अन्धी दादीजान के अलावा कोई न दिखा |  वह अन्दर- बाहर, पड़ोस में भी देख आया, “आखिर सब कहाँ गए? ” उसने अपनी दादीजान से पूछा |     “अभी-अभी आया है, पहले कुछ खा ले | […]

कविता

करें मिलकर अभिनंदन का अभिनंदन

आओ मिलकर करें हम सब अपने पूर्वजों का अभिनंदन बीज मिटटी में जो बो गए हैं करें मिलकर उनका हमसब वंदन संस्कृति की नींव, ज्ञान का सागर बड़ों का सम्मान, वासुदेव कुटुंब कितना कुछ छोड़ गए हैं करें मिलकर उनका हमसब चिंतन भौतिक युग के हो गए हम समय काल का चक्र जो चला है […]

लघुकथा

दृढ़ संकल्प

अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे शांति की नज़र अख़बार की सुर्ख़ियों पर पड़ी। दलित महिला पर गाँव वालो का अत्याचार… ये कोई नई बात नहीं थी, आये दिन महिलाओं पर केंद्रित कोई न कोई अप्रिय घटना अख़बार की सुर्ख़ियो में आती ही रहती है। उसने अपना ध्यान हटाया। पर यह तो उसके अपने गाँव सारंगपुर की […]

बाल कविता

हम बालक

हम बालक छोटे अज्ञानीक्यों करे कोई छल बताओ हमको पसंद है चॉकलेट टॉफीक्यों खा जाते बड़े लोग बताओ हम बालक जब मांगे खिलौनेदेते हैं हमको क्यों यह ताने पढ़ो लिखो वक़्त न आयेगा लौटकरक्या बचपन लौटकर आएगा बताओ हम बालक सब प्रेम से रहते क्यों कहते लोग हमें बंदर करते जब बडे कोई मनमानीक्यों नहीं कहती […]