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  • संकल्पिता

    संकल्पिता

    “माँ, देखो न! जीतू ने फिर से गुलाब का फूल तोड़ लिया, आप उसे मना क्यों नहीं करतीं” “अरे बेटी, वो भगवान् को ही तो चढ़ाता है न…फिर घर में भी कितनी सुगंध बनी रहती है”!...


  • बागों बुलाती है सुबह

    बागों बुलाती है सुबह

    रात पर जय प्राप्त कर जब, जगमगाती है सुबह। किस तरह हारा अँधेरा, कह सुनाती है सुबह। त्याग बिस्तर नित्य तत्पर, एक नव ऊर्जा लिए लुत्फ लेने भोर का, बागों बुलाती है सुबह। कालिमा को काटकर,...


  • अनोखा उपहार

    अनोखा उपहार

    “सुनो नीलू डियर, आज शाम को माँ-पिताजी से मिलने चलना है, मैं जल्दी आऊँगा, तुम तैयार रहना…” कहते हुए आशीष दफ्तर के लिए निकल गया। पति के जाते ही नीलिमा प्रसन्न-मन घर के काम-काज जल्दी-जल्दी निपटाने...

  • कभी तो दिन वो आएगा

    कभी तो दिन वो आएगा

    कभी तो दिन वो आएगा, सभी के अपने घर होंगे। मिलेंगी रोटियाँ सबको, न सपने दर-बदर होंगे। मिलेंगे बाग खेतों से, न होगी बीच में खाई पलायन गाँव छोड़ेंगे, सदय पालक शहर होंगे। रखेंगे रास्ते पक्के,...

  • जब से कर ने गही लेखनी

    जब से कर ने गही लेखनी

    जब से कर ने गही लेखनी शीश तान चल पड़ी लेखनी बिन लाँघे देहरी-दीवारें दुनिया भर से मिली लेखनी खूब शिकंजा कसा झूठ ने मगर न झूठी बनी लेखनी हारे छल-बल, रगड़ एड़ियाँ कभी न लेकिन...

  • द्वार दिल के

    द्वार दिल के

    द्वार दिल के, तुमने पहरे तो बिठाए अब अकेलापन तुम्हें ही, खा न जाए बाँट सकता ख़ुशबुएँ गुलशन तभी जब गुल हरिक परिवार का, खुल मुस्कुराए पेड़ से माँगोगे फल यदि मार पत्थर वो भी देगा...

  • मीत जागते रहो

    मीत जागते रहो

    वसुंधरा करे पुकार, मीत जागते रहो कि लौट जाए ना बहार, मीत जागते रहो उमड़ रहे हैं उपवनों में, कंटकों के काफिले करें न कलियों पर प्रहार, मीत जागते रहो समंदरों की सैर को सँवर रहीं...