गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

है ज़िंदगी का फलसफ़ा, ज़रा सा मुस्कुराइये बनेगा दर्द भी दवा, ज़रा सा मुस्कुराइये विगत को क्यों गले लगा, बिसूरते हैं रात दिन बिसार के जो हो चुका, ज़रा सा मुस्कुराइये न कोई श्रम न दाम है, ये मुफ्त का इनाम है जो रहना चाहें चिर युवा, ज़रा सा मुस्कुराइये भुलाके रब की रहमतें, क्यों […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हरेक बात पे सौ बार जब विचार करो किसी के वादे पे तब दोस्त! ऐतबार करो ये जान लो कि नकाबों में हैं छिपे धोखे शकल न देखके तीखी अकल की धार करो जो तुमपे जाँ भी लुटाने को हो सदा तत्पर उसी पे जान-ओ-जिगर अपना भी निसार करो निभाओ उनसे जो सदमित्र हैं सदा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुदा से खुशी की लहर माँगती हूँ। कि बेखौफ हर एक घर माँगती हूँ। अँधेरों ने ही जिनसे नज़रें मिलाईं उजालों की उनपर नज़र माँगती हूँ। जो लाए नए रंग जीवन में सबके वे दिन, रात, पल, हर पहर माँगती हूँ। जो पिंजड़ों में सैय्याद, के कैद हैं, उन परिंदों के आज़ाद, पर माँगती हूँ। […]