गीतिका/ग़ज़ल

तुम वही हो क्या

जिसको चाहा था तुम वही हो क्या? मेरी हमराह ज़िंदगी हो क्या? कल तो हिरनी बनी उछलती रही क्या हुआ आज थक गई हो क्या? ऐ बहारों की बोलती बुलबुल क्यों हुई मौन बंदिनी हो क्या? ढूँढती हूँ तुम्हें उजालों में तुम अँधेरों से जा मिली हो क्या? महफिलें अब नहीं सुहातीं तुम्हें? कोई गुज़री […]

गीतिका/ग़ज़ल

बेटी बचाएँ

ज़मीं से उठाकर फ़लक पर बिठाएँ। अहम लक्ष्य हो, आज बेटी बचाएँ। जहाँ घर-चमन में, चहकती है बेटी बहा करतीं उस घर, महकती हवाएँ। क़तल बेटियाँ कर, जनम से ही पहले धरा को न खुद ही, रसातल दिखाएँ। बहन-बेटी होती सदा पूजिता है सपूतों को अपने, सबक यह सिखाएँ। पढ़ाती जो सद्भाव का पाठ जग […]

कहानी

परिणय के बाद

मीरा ने ज्योंही रसोई का कचरा डालने के लिए घर के पिछवाड़े का द्वार खोला, सामने एक सुदर्शन युवक को उसी तरफ घूरता पाकर सकपका गई. उसने बिना इधर-उधर देखे जल्दी से ढेर पर कचरा डाला और अन्दर जाकर तुरंत द्वार बंद कर दिया. बड़ी मुश्किल से अपनी बढ़ी हुई धड़कनों पर काबू पाया. उसे […]

गीतिका/ग़ज़ल

एक रोटी के लिये

रात दिन जो एक करते, एक रोटी के लिए। आज वो ही जन तरसते, एक रोटी के लिए। अन्न दाता देश के ये, हल चलाते हैं सदा। फिर भी गिरवी खेत रखते, एक रोटी के लिए। खून है सस्ता मगर, महँगी बहुत हैं रोटियाँ। पेट कटते अंग बिकते, एक रोटी के लिए। जो गए सपने […]

गीतिका/ग़ज़ल

सुनहरी भोर बागों में

सुनहरी भोर बागों में, बिछाती ओस की बूँदें! नयन का नूर होती हैं, नवेली ओस की बूँदें! चपल भँवरों की कलियों से, चुहल पर मुग्ध सी होतीं मिला सुर गुनगुनाती हैं, सलोनी ओस की बूँदें! चितेरा कौन है? जो रात, में जाजम बिछा जाता न जाने रैन कब बुनती, अकेली ओस की बूँदें! करिश्मा है […]

कहानी

अधूरी मन्नत

दमयंती की आँखों के सामने चाहे स्वच्छ अनंत आसमान था, मगर उसके मनस्पटल पर घोर काले बादल उमड़-घुमड़ मचा रहे थे. सहसा बिजली सी कौंधी और बादल बरसने लगे. उसका हाथ बरबस ही भीगे हुए गालों पर चला गया. अचानक दमयंती के मनस्पटल पर एक चित्र उभरा और उसने खुद को अपनी उम्र की ४८ […]

गीतिका/ग़ज़ल

नीम की शीतल हवा

ग्रीष्म ऋतु में संगिनी सी, नीम की शीतल हवा। दोपहर में यामिनी सी, नीम की शीतल हवा। झौंसता वैसाख जब, आती अचानक झूमकर सब्ज़ वसना कामिनी सी, नीम की शीतल हवा। ख़ुशबुएँ बिखरा बनाती, खुशनुमाँ पर्यावरण शांत कोमल योगिनी सी, नीम की शीतल हवा। खिड़कियों के रास्ते से, रात में आती सखी मंत्र-मुग्धा मोहिनी सी, […]

गीतिका/ग़ज़ल

जो रस्मों को मन से माने

जो रस्मों को मन से माने, पावन होती प्रीत वही तो! जीवन भर जो साथ निभाए, सच्चा होता मीत वही तो! जो रस्मों को मन से माने, पावन होती प्रीत वही तो! जीवन भर जो साथ निभाए, सच्चा होता मीत वही तो! रूढ़ पुरानी परम्पराएँ, मानें हम है नहीं ज़रूरी। जो समाज को नई दिशा […]

कहानी

अपने अपने हिस्से की धूप

एक छोटे से स्टेशन पर गाड़ी रुकी तो सामने ही गुमटी पर चाय बनती देखकर अभिनव नीचे उतरा. अपना छोटा सा बैग उसने हाथ में ही ले लिया था. चाय पीकर जैसे ही पैसे निकालने लगा, गाड़ी सरकने लग गई. चाय वाला चिल्लाया- “पैसे रहने दो बेटा, जल्दी जाओ” अभिनव बदहवासी में दौड़ लगाकर जैसे […]

गीतिका/ग़ज़ल

नम हवा फुलवारियों की

नम हवा फुलवारियों की खूब भाती है मुझे। नित्य नव भावों भरी कविता सुनाती है मुझे। रात के आगोश में सुख स्वप्न गाते लोरियाँ प्रात प्यारी शबनमी, निस दिन जगाती है मुझे। लाल सूरज जब समंदर में उतरता शाम को तब क्षितिज की स्वर्ण सी आभा लुभाती है मुझे रूप जब विकराल होता, गर्मियों में […]