कविता

लॉक डाउन को सफल बनाते हैं

लक्ष्य प्राप्ति के लिए थोड़ा सब्र अपनाते हैं, कुछ न करके अपना- अपना फर्ज़ निभाते हैं। धैर्य और सहनशीलता का परिचय दे जाते हैं, घर बैठकर लॉक डाउन को सफल बनाते हैं। मास्क,सैनिटाइजर को अपना अस्त्र बनाते हैं, सोशल डिस्टेंस को अपनाकर प्राण बचाते हैं। कोरोना के हमले को हम सब विफल बनाते हैं, घर […]

कविता

इंतजार के पल…

इंतजार के पल अब गुजारे नहीं गुजरते हैं, हर घड़ी हम सिर्फ़ तुमको याद करते हैं। मूंद लेते हैं अक्सर हम इन पलकों को, जब तुमसे दीदार के वो पल याद करते हैं। हमको कभी तो तुम देख लो जी भर के, चूड़ी, बिंदिया, पायल ये फरियाद करते हैं। तुम्हारी एक झलक पाने को तरस […]

कविता

रात के गले मिलकर

तुझसे मिलने की अधूरी ख्वाहिश लेकर, दामन में तेरी चाहत के फूल खिलाकर, अपनी तमन्नाओं को मन में ही दबाकर, जी भरकर रोए हैं कल रात के गले मिलकर। तेरे ख्वाबों के तकिए में मुंह को छिपाकर, तेरे एहसास की चादर में खुद को लिपटाकर, अपनी रूठी किस्मत से कुछ घबराकर, जी भरकर रोए हैं […]

कविता

ऐ जिंदगी! ठहर जा

ऐसी भी क्या नाराजगी है , जो हाथ छुड़ाकर जाती है। ऐ जिंदगी! ठहर जा न, हम भी तेरे ही साथी हैं। तेरी नफरत से देख तो ज़रा, जान पर आ बनी है सबकी। उजड़ रही है दुनिया मानव की, लौट कर आबाद कर दे न फिर से। परिंदों की तरह चारदीवारी में, आजकल कैद […]

कविता

भूख का कोई धर्म नहीं

भूख का कोई ईमान धर्म नहीं। जात- पात, लिंगभेद के भेदभाव से दूर, उम्र की सीमा से परे, अबोध, युवा और बुजुर्ग सभी को सताती, रुलाती, तड़पाती है यह भूख। भूख के रूप भी कितने भिन्न भिन्न है, किसी को भूख है पेट की आग बुझाने की, किसी को भूख है बुलंदियों तक पहुंच जाने […]

कविता

एक गुजारिश…

कुछ वक़्त अपने भी साथ बिता कर देखो, अपनों की भी कद्र है तुम्हें यह जता कर देखो। घर की चारदीवारी भी सुकून दिया करती है, अगर यकीन नहीं है तो ज़रा आजमाकर देखो। बेड़ियां पहना लो अपने इन आवारा कदमों को, कैद में भी सुकून है ,इस एहसास को जगाकर देखो। फिजाओं में हर […]

कविता

आजकल खुश रहने लगी हूं मैं

किसी के ख्वाबों में सजने लगी हूं मैं, किसी के ख्वाब सजाने लगी हूं मैं, यह महसूस होता है मुझे…. आजकल खुश रहने लगी हूं मैं। दिन निकलता है उसके ख्याल के साथ, दिन ढलता है तो उसकी याद के साथ, चांदनी रात में सितारों को तकने लगी हूं मैं, आजकल खुश रहने लगी हूं […]

कविता

आहिस्ता- आहिस्ता

विस्तृत,अनंत, शांत आसमान में, खामोशी को समेटे आहिस्ता- आहिस्ता, विचरता पूरी रात का आधा चांद। अनगिनत प्रेमी- प्रेमिकाओं के प्रेम संदेश लिए, भटक रहा है यहां से वहां। उसके इस भटकाव में साथी हैं, निहारिका परिवार के असंख्य तारे। टटोलती रहती हूं उसकी धुंधली चांदनी में, तुम्हारी प्रेम की सुनहरी चादर, जो ढके हुए हैं […]

कविता

अधूरापन

अधूरी चाहत ,अधूरी ख्वाहिश, अधूरी जिंदगी…. इस “अधूरे “एहसास के साथ जी रही हूं मैं! “अधूरापन “जो पूर्णता का पर्याय बन गया मेरी खातिर, इस के दर्द को तुम भी समझोगे एक दिन। उस दिन जब किसी ‘अधूरे प्रेम ‘से करोगे ‘पूरी मोहब्बत’, जरा संभल जाना उस वक्त, दिल के झरोखे खोलने से पहले। भटक […]

गीतिका/ग़ज़ल

एक गुज़ारिश

अपने दिल में हमेशा बसा कर रखना, अपनी बाहों में मुझे छुपा कर रखना। संवरना चाहती हूं आजकल तेरी खातिर, आईना अपनी निगाहों को बनाकर रखना। बहक न जाऊं कहीं तुम्हारे करीब आकर, इश्क की तहजीब को तुम बचा कर रखना। मेरी गुस्ताखियों को नजरअंदाज करके, अपनी दुआओं में मुझे मांग कर रखना। टूट जाऊंगी […]