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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    चाह कर भी मुझको भुला न पाओगे, मेरी वफ़ा को दिल से मिटा न पाओगे। मेरी तरफ से तुम आजाद हो अब से, मेरी यादों से कैसे जुदा हो पाओगे। जिस तरफ देखोगे नजर मैं ही...

  • सतरंगी यादें

    सतरंगी यादें

    जीवन की अमूल्य धरोहर सी , होती हैं यह सतरंगी यादें…….! बचपन की नादानियों को समेटे यादें, यौवन की अल्हड़ता से भरी यादें, प्रिय के प्रेम स्मृति को संजोती यादें, घर की किलकारियों से गूंजती यादें,...

  • एक भिखारिन

    एक भिखारिन

    बदन में थोड़ी सी मिट्टी बचाए; उम्र के मधुमास को पीछे छोड़, टूटे घरौंदे के टुकड़े समेटे; तन के दीपक में प्राण बाती जलाए, जाने कब से जल रही है वह , अपनी आस्था लिए नर्मदा...

  • बचपन

    बचपन

    काश बचपन के दिन वापस लौट पाते, वह बेफिक्री वाले पल फिर से जी पाते। काश…………… दोस्तों के संग पढ़ना, खेलना ,झगड़ना, मोहल्ले में टोलियां बनाकर हुल्लड़ मचाना। भाई बहन से वह चिढ़ाना -चिढ़ाना; यूं ही...

  • बाल दिवस

    बाल दिवस

    बाल दिवस का दिन है आया, बच्चों का तन- मन हर्षाया। हंसकर गाकर खुशी जताया, चाचा नेहरू का जन्मदिन मनाया। भारत मां के लाल थे नेहरू, देश के प्रथम प्रधान थे नेहरू। अमन चैन का पैगाम...

  • खुद को लिखते रहो

    खुद को लिखते रहो

    मैं कोई पाषाण नहीं जो ठोकर खाकर पड़ी रहूं, न मैं माटी की मूरत हूं जो एक कोने में सजी रहूं। हृदय मेरा भी कोमल है,दर्द मुझे भी होता है, सब कष्टों को सहकर भी मैं,...

  • आखिर क्यों?

    आखिर क्यों?

    कई दिनों से नोटिस कर रही थी, कक्षा में हमेशा चहकने वाली सुमन आजकल गुमसुम रहने लगी थी । एक दो बार मैंने उसकी उदासी का कारण जानना चाहा तो उसने मुझे यह कहकर टाल दिया...

  • आत्मविश्वास

    आत्मविश्वास

    एक लड़की थी रिया। जीवन के 17 सावन पार कर चुकी थी ।अल्हड़, हंसमुख, निश्चल, दुनियादारी से दूर, अपने आप को बेहद प्यार करने वाली, जीवन के हर पल को हजार बार जी लेने को बेचैन...

  • दीपावली पर दो रचनाएं

    दीपावली पर दो रचनाएं

    1. दीपावली मन मंदिर को पावन कर जाओ, राग द्वेष के तम को हर जाओ। भाईचारे की अलख जगा कर, खुशियों के फिर दीप जलाओ।  नव दीपक की नवल ज्योति से, जाति धर्म का कलुष भगाओ।...

  • दिल और जज्बात

    दिल और जज्बात

    दिल और जज्बात दोनों के दावे खोखले निकले अफसोस कि दोनों ही झूठे निकले। दिल ने ठाना था कि न धड़केगा, अब किसी और की खातिर। जज्बात ने भी हामी भरी थी सिर झुका कर। गुजरते...