कविता

विदाई

तुमसे विदा लेते समय, जो शब्द कहे थे मैंने, आहत कर गए थे मुझे भीतर तक। कितनी मुश्किल से बोल सकी थी, “अलविदा।’” जाने क्या-क्या टूट रहा था, मेरे अंतस में, मन और मस्तिष्क के अंतर्द्वंद से। आशाएं, धैर्य, व्याकुलता, सब पस्त हो गए थे इस कश्मकश में। आंसुओं का विशाल सागर, उमड़ पड़ा था […]

कविता

विरह

निष्ठुरता का कर आलिंगन, प्रस्तर हृदय प्रिय हो गए। याचना को कर तिरस्कृत, नयनों से ओझल हो गए। छिन गया जीवन बसंत, सहस्र शर हिय में चुभ गए। स्पंदन विहीन हो गई काया, प्राण वायु वे संग लेे गए। कितनी सहजता से उन्होंने, समर्पण मेरा ठुकरा दिया। करती रही यह आत्ममंथन, स्मृति कोहरा भी गहरा […]

कहानी

कहानी : छत

“मां, आखिर अब इस घर में बचा ही क्या है?पापा के जाने के बाद तुम भी बिल्कुल अकेली हो गई हो।मुझे रोज रोज छुट्टी नहीं मिलने वाली।सामान बांधो और चलो मेरे साथ”,रोहन ने लगभग चीखते हुए कहा सावित्री ने लम्बी सांस भरी और शांत भाव से बोली,”बेटा, मैं इस छत को छोड़कर कैसे चली जाऊं?इसमें […]

कविता

आत्मघात

अजब रस्म है दुनिया की, जीते जी दुत्कारे जाते हैं। लेकिन बाद मरने के, कारण खंगाले जाते हैं। इतनी ही परवाह अगर थी, तो जीने क्यों उसको दिया नहीं? जी लेता वह पाकर अपनापन, जख्मों को क्यों उसके सिया नहीं? उसके जाने के बाद कहो, क्यों अतिशय हंगामा करते हो? क्या,क्यों और कैसे हुआ, इन […]

सामाजिक

चिंतन का महत्व

मनुष्य प्रकृति का एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसमें सोच विचार, तर्क वितर्क, चिंतन, विश्लेषण आदि मानसिक क्रियाएं होती रहती हैं। जब भी कोई घटना घटित होती है अथवा समस्या उत्पन्न होती है तो उसका समाधान विचार विमर्श और चिंतन के द्वारा खोजने का प्रयास किया जाता है। यह प्रयास व्यक्तिगत या सामूहिक किसी भी रूप […]

कहानी

कहानी : अपना ख्याल रखना

निर्मला एक शासकीय शिक्षिका थी। हाल ही में प्री बोर्ड परीक्षाएं संपन्न हुई थीं और वह बड़ी तन्मयता से बारहवीं की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने में लगी हुई थी। तभी मोबाइल की घंटी बजी। देखा तो छोटे भाई अनुज का कॉल था। ” हैलो”, बोलते ही दूसरी ओर से भय मिश्रित आवाज़ आई, “दीदी, पापा को […]

कहानी

प्रायश्चित (कहानी)

रोहिणी कॉलेज से लौटी तो देखा आज सभी बहुत व्यस्त दिखाई दे रहे थे। घर को बड़े करीने से सजाया गया था। टेबल क्लॉथ, पर्दे, चादर, सोफ़ा कवर, सब कुछ नया। गुलदस्ते में महकते ताज़े फूल। उसने अंदाजा लगाया कि ज़रूर कोई ख़ास मेहमान आने वाला है जिसके स्वागत के लिए इतनी सारी सजावट की […]

कहानी

कहानी – मेरी मां

“मां” एक ऐसा शब्द जिसमें समस्त ब्रह्माण्ड समाया है।नारी के अनेक रूपों में से मां को सर्वश्रेष्ठ रूप कहना अनुचित नहीं होगा।वह एक ओर वात्सल्य की प्रतिमूर्ति है तो दूसरी ओर अपनी संतान के उचित मार्गदर्शन के लिए कठोर कदम उठाने से भी नहीं चूकती।मेरी मां भी ऐसी ही थीं।वह हम चारों भाई बहनों को […]

कहानी

कहानी: दस साल बाद

दिल्ली के प्रगति मैदान में गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य पुस्तक मेला का आयोजन किया गया था।चारों ओर दूधिया रोशनी और चहल पहल थी।काफी लोग आए हुए थे और बड़ी तल्लीनता से अपनी अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकें देखने में लगे हुए थे।इस मेले की सबसे चर्चित पुस्तक के रचनाकार एक उभरते […]

कविता

मन करता मनमानी

मन मनमानी पर उतर आया है, लगता है कि किसी बुरी आत्मा का साया है। कोई तो तरकीब हो जिससे यह समझ सके कि जरूरी नहीं है किसी दीन की मदद करना, किसी मासूम,असहाय के आंसू पोछना। किसी अबला की वेदना को समझना, आसपास हो रहे अन्याय को देखना। क्यों नहीं यह दूसरों की तरह […]