गीतिका/ग़ज़ल

मजा ही कुछ और है

यादों के गुलिस्तां में मन भटकता चहुं ओर है, तुम्हें सोचने का जाने क्यों मजा ही कुछ और है। हकीकत में सब हासिल हो यह मुमकिन नहीं, ख्वाबों में हकीकत को सजाने का मजा कुछ और है। जमीन हो या हो आसमान नहीं मिलता सबको, क्षितिज में दोनों को पाने का मजा ही कुछ और […]

गीतिका/ग़ज़ल

संभलना सिखा दिया

दुनिया की ठोकरों ने संभलना सिखा दिया, झूठ और फरेब को समझना सिखा दिया। बदल गया नजरिया लोगों को देखने का, आंखों से पर्दा उठा और सच दिखा गया। चेहरों के जंगल में खो गया था चेहरा मेरा, खोई हुई पहचान ने मशहूर होना सिखा दिया। गिर गिर कर उठने ने हौसला बढ़ा दिया, मुश्किलों […]

कविता

तुम साथ थे जब

गम भी खुशियां दे जाते थे, जब हम साथ तुम्हारा पाते थे। प्रीत के बंधन में बंध कर , सपनों की दुनिया में खो जाते थे। खुशियों की महफिल सजती थी, दुख के आलम गुम जाते थे। साथ तुम्हारा पाकर हम, सारी दुनिया को भूल जाते थे। सांसों में आज भी बसते हैं, तुमसे हसीन […]

कहानी

कहानी – उलझन

“मैं आपको चाहने लगा हूं ।आपकी याद आ रही थी इसलिए इतनी रात को फोन किया ।आपको बिना बताए नींद ही नहीं आती मुझे,” कहकर फोन काट दिया था उसने। तीन महीने पहले जिस रिश्ते की शुरुआत सामान्य औपचारिक बातचीत से हुई थी वह आज एक नया मोड़ ले चुका था। स्तब्ध रह गई थी […]

कविता

चांद से पूछो कभी

नील गगन के स्वप्निल आंगन में, अगणित तारों संग विचरता चांद। शांत अविरल आसमान में, पूरी रात का आधा चांद। सूरज के प्रकाश से रोशन, चांदनी बिखेरता दूधिया चांद। वैज्ञानिकों का कौतूहल बढ़ाता, आधी जानकारी का पूरा चांद। सबके सुख दुख का संगी, सबकी तनहाई का साथी चांद। कवियों की कविता का प्राण, प्रेमियों की […]

सामाजिक

नव वर्ष,नव संकल्प

नव वर्ष को एक उत्सव के रूप में मनाने का इतिहास वर्षों पुराना है ।कहा जाता है कि लगभग 4000 वर्ष पूर्व बेबीलोन में प्रतिवर्ष 21 मार्च को नए साल के रूप में मनाने का प्रचलन था जो बसंत के आगमन का द्योतक था। विश्व के विभिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न तिथियों और विधियों से नया […]

सामाजिक

शिक्षा या व्यवसाय

किसी देश या समाज के लिए” शिक्षा” भावी नागरिकों के व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक नियंत्रण, प्रगतिशील विचारधारा तथा सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति का मापदंड होती है ।यह जन्म से लेकर मृत्यु तक अनवरत चलने वाली सोद्देश्य पूर्ण प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति सामाजिकता को अपनाकर अपनी संस्कृति की रक्षा करता है और सभ्यता रूपी रथ […]

कविता

बेचैन दिल

मेरी धड़कनों पर नाम लिखा है तुम्हारा, कहना चाहूं मगर ,जताना नहीं आता है मुझे। अक्सर बिना बात यूं ही मुस्कुराने लगी हूं मैं, अपने विचारों को छुपाना नहीं आता है मुझे। दिल की बात है निगाहों से समझ लो न, इकरार ए मोहब्बत करना नहीं आता है मुझे। मेरी चाहत की कदर नहीं तुझको […]

राजनीति

महंगाई बनाम बेरोजगारी

इसमें कोई दो राय नहीं है कि विश्व पटल पर भारत एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरा है और अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल रहा है। किंतु यह भी सत्य है कि कभी” सोने की चिड़िया” कहा जाने वाला हमारा देश आज आंतरिक तौर पर विभिन्न जटिल समस्याओं जैसे जनसंख्या वृद्धि ,महंगाई, […]

लघुकथा

आत्मनिष्ठा

एक समय की बात है, गर्मी का महीना था और जंगल के ज्यादातर जल स्रोत सूख रहे थे ।प्रचंड गर्मी से सभी जानवर परेशान होकर पानी की तलाश में यहां वहां भटक रहे थे ।इन्हीं में जंगली भैंसों का भी एक समूह था जिसमें छोटे ,बड़े सभी प्रकार के सदस्य थे ।मोटी चमड़ी और काला […]