Author :

  • यह प्रेम चीज क्या है?

    यह प्रेम चीज क्या है?

    यूं ही बैठे-बैठे खयाल आया, मन में बस एक सवाल आया। आखिर यह प्रेम चीज क्या है? जिसके पीछे दुनिया दीवानी हुई जाती है। मां की छाती से जो टपकता है, पिता के बाजुओं में जो...

  • तेरी निगाहें

    तेरी निगाहें

    तेरी निगाहों की तपिश पाकर, मोम बनकर पिघल जाती हूं मैं। तेरी बाहों के आगोश में आकर, खुशबू से बिखर जाती हूं मैं। तेरी तारीफ के अल्फाज में ढल कर, ग़ज़ल बन कागज पर उतर जाती...

  • रात एक पहेली है

    रात एक पहेली है

    तेरे लबों पर बिखरे तबस्सुम की तरह, रात एक पहेली है मेरी खातिर। समझ न सकी तेरी बेरुखी की वजह, उसमें परवाह भी शामिल है मेरी खातिर। तुझे भुला चुकी हूं बुरे ख्वाब की तरह, फिर...

  • वर्तमान में जी लें हम

    वर्तमान में जी लें हम

    बीता वक्त न लौट कर आता, इस सच्चाई को स्वीकार करें हम। बीती बातों पर मिट्टी डालें, वर्तमान में जी लें हम। आज मिला है जो अपना लें, व्यर्थ में क्यों संताप करें? सुख दुख तो...

  • प्रेम

    प्रेम

    प्रेम एक अनुभूति है, हृदय से हृदय तक स्पंदित होती। सच्चे प्रेम की अभिव्यक्ति को आवश्यकता नही, शब्दों की बैसाखी की। यह तो छलक ही पड़ता है, पलकों की ओट से। प्रियतम की एक झलक पाने...

  • किसी बहाने ही आ जाओ

    किसी बहाने ही आ जाओ

    प्यासी धरती जैसे तरसे बारिश की एक बूंद की खातिर, मेरा मन भी मचल रहा है तुमसे अब मिलने की खातिर। बेजुबान एहसास मेरे अब रात की खामोशी को तोड़ रहे, दिल के बेचैन अल्फाज मेरे...

  • अधूरे ख्वाब

    अधूरे ख्वाब

    दिल में यादों के नश्तर चुभोती वही उदास स्याह रात। जहां सिवाय तन्हाई के कुछ नहीं बचा था। टेप रिकॉर्डर पर धीमी आवाज में बजता गाना” चार दिना दा प्यार ओ रब्बा बड़ी लंबी जुदाई…….”, नम...

  • बरखा गीत

    बरखा गीत

    श्यामल घटा घनघोर घिर घिर, व्योम सागर से उमड़कर, इठलाती हुई,बलखाती हुई, थामे हुए घट नीर के, छम से चली,झट से चली। मार्ग में चपला ठुमक कर, संग उसके हो चली। आषाढ़ के बादल उचक कर,...

  • हम अपने मन के कैदी

    हम अपने मन के कैदी

    मन की बात न सुनियो भैया यह तो बड़ा ही चंचल है, इस के चक्कर में जो पड़ता वह पछताता हरदम है। पंछी बनकर यह उड़ता रहता कहां ठहरता एक पल है, इस पर अंकुश होता...

  • जाने दो उसे

    जाने दो उसे

    उन्मुक्त पंछी के जैसे; उसे भी गगन में उड़ने दो, जाने दो,उसको मत रोको,अपने मन की करने दो। हंसने,खेलने और पढ़ने का,उसको भी अधिकार है, जो छीने उसके सपनों को,उसको तो धिक्कार है! कब तक उसका...