इतिहास गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल-घर के जैसा ठौर कहाँ है

करके देखा गौर, कहाँ है?तुझ सा कोई और कहाँ है? क्या फल की उम्मीद करें हम,इन आमों में बौर कहाँ है? हाथ मिलाना भूल गये सब,अब पहले सा दौर कहाँ है? ख़ुद को वो चाहे जो कह ले,लेकिन अब सिरमौर कहाँ है? जो माँ के हाथों मिलता था,रोटी का वो कौर कहाँ है? जग में […]

इतिहास भाषा-साहित्य

पहला कवि सम्मेलन

इस वर्ष कवि सम्मेलन का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है.पहला कवि सम्मेलन कानपुर में हुआ था.गूगल जानकारी के अनुसार 1920 में.कानपुर का निवासी और हिंदी का एक छोटा सा सेवक होने के नाते इस विषय पर काफी समय से कुछ लिखने की सोच रहा था.पर चूँकि यह ऐतिहासिक विषय है,अत: इस संबंध में कुछ […]

कविता

व्यंग्य : कवि बनाम कूड़ा-करकट

कल एक कवि मित्र को फोन कियाउसने ढँग से रिस्पांस ही नहीं दियामैंने पूछा-क्या झगड़ा हो गया है किसी सेवो बोला-हाँ, पत्नी से मैंने समझाया-अरे यार दुनिया में कौन सा घर हैजहाँ न कोई आपसी खटपट होवो बोला-पत्नी ने कहा हैतुम कवि नहीं होकूड़ा-करकट होतू क्या समझता हैयह साधारण खटपट हुई हैअरे यार, मेरी आत्मा […]

गीत/नवगीत

कोरोना पर गीत – हार ही जायेगा यह कोरोना

कानपुर के चर्चित हास्य-व्यंग्य कवि डॉ. कमलेश द्विवेदी ने कोरोना योद्धाओं को समर्पित एक गीत लिखा है-“हार ही जाएगा यह कोरोना” जिसका वीडियो एल्बम उनके बेटे दिव्यांश द्विवेदी ने तैयार किया है. इस एल्बम में डाॅ.कमलेश द्विवेदी के साथ ही डॉ. विष्णु सक्सेना (अलीगढ़) डाॅ. कीर्ति काले (नई दिल्ली) और डाॅ. कविता किरण ( फालना-राजस्थान) […]

गीत/नवगीत

गीत-भीतर भी कोरोना है

बाहर  भी  कोरोना  दिखता  भीतर  भी  कोरोना  है. जाने कब  तक  कोरोना  का बोझा  हमको  ढोना है. सुबह-सुबह अख़बारों  में भी ये   ख़बरें   सिरमौर   हुईं   हैं. इतने   रोगी   और   बढ़  गये इतनी   मौतें   और    हुईं   हैं. कुछ भी नहीं समझ में आता-आगे क्या-क्या होना […]

बाल कविता

बन्दर से भी बुद्धिमान होती है अधिक बँदरिया

एक दिवस भोलू बन्दर ने पर्स राह में पाया. नोट देखकर काफी उसमें ऐसा प्लान बनाया- पाँच सितारा होटल में चल खाना खाया जाये. आज बँदरिया रानी पर कुछ रंग जमाया जाये. भोलू जी जा पहुँचे होटल वेटर को बुलवाया. सबसे पहले सूप टुमैटो वेटर लेकर आया. भोलू जी पी गये शौक से सूप गटागट […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल-दूसरा मिसरा नहीं मिला…

टूटा जो दिल तो दिल को दिलासा नहीं मिला. राँझे को हीर, हीर को राँझा नहीं मिला. सोचा जो दिल की कह दूँ तो हिम्मत नहीं हुई हिम्मत हुई तो कहने का मौक़ा नहीं मिला. इतने हैं रिश्तेदार कि मुश्किल शुमार है, कहते हैं जिसको रिश्ता,वो रिश्ता नहीं मिला. बिछुड़े हैं जबसे तुमसे हम ऐसे […]

बाल कविता

बालगीत- मैं हूँ तितली रानी

मैं हूँ तितली रानी-मैं हूँ तितली रानी. बहुत ध्यान से बच्चे सुनते, मेरी मधुर कहानी. बगिया-बगिया जाती हूँ. फूलों पर मंडराती हूँ. इठलाती-बलखाती हूँ. अनगिन खेल दिखाती हूँ. मुझे देखकर बच्चे दौड़ें, छोड़ें खाना-पानी. मैं हूँ तितली रानी-मैं हूँ तितली रानी. लाल-गुलाबी-नीले हैं. हरे-बैगनी-पीले हैं. कितने रंग-रँगीले हैं. मेरे पंख सजीले हैं. इन पंखों पर […]

गीतिका/ग़ज़ल

व्यंग्य ग़ज़ल-आज वो बदनाम कहता है

निकलता जिनसे कुछ मतलब उन्हें हुक्काम कहता है. निकल जाता है जब मतलब वो झंडू बाम कहता है. तरीका उसका अपना है किसी की चापलूसी का, पड़े जब काम कल्लू से तो कालाजाम कहता है. टहलने भी नहीं जाता न करता दंड-बैठक वो, सुबह बस फूँ-फाँ कर लेता उसे व्यायाम कहता है. पिलाकर जाम मुझको […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल- *****ग़लती की*****

सबने जिसको छोड़ा उसको क्या अपनाकर ग़लती की. मैंने फ़र्ज़ निभाया तो क्या फ़र्ज़ निभाकर ग़लती की. सोचा था इक मौका दूँ वो अपनी भूल सुधार करे, लेकिन उसने फिर दोबारा मौका पाकर ग़लती की. उसके घर में आग लगी थी मेरा घर भी जल जाता, तो क्या मैंने उसके घर की आग बुझाकर ग़लती […]