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  • व्यंग्य- चेला चंटाल

    व्यंग्य- चेला चंटाल

    अक्सर गुरु घंटाल की चर्चा होती है. मैंने विचार किया कि अगर गुरु घंटाल हो सकता है तो चेला चंटाल क्यों नहीं. लखनऊ के सनकी जी ने लिखा है- गुरु-गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय बलिहारी...


  • दोहे-थोड़े चित्र-विचित्र

    दोहे-थोड़े चित्र-विचित्र

    कल का सपना आपको, आज बताऊँ मित्र. मैंने देखे ख़्वाब में, थोड़े चित्र-विचित्र. राहुल कहते-दीजिए, हमें हार का श्रेय. माँ-बहना सँग मिल हुये, हम सब “दत्तात्रेय”. लगा ज्योतिरादित्य का, बहुत बड़ा दरबार. सबके सँग खिंचवा रहे,...

  • संस्कार और दिखावा

    संस्कार और दिखावा

    कल सपने में देखा-गुरुवर पत्नी सहित पधारे. “धन्यभाग्य हैं” कहकर हमने उनके पाँव पखारे. वे बोले-खुश रहे सदा तू बस इतना बतला दे- यों ही चरण कभी क्या धोये तूने मात-पिता के? यह सुनते ही नींद...