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  • ग़ज़ल- *****ग़लती की*****

    ग़ज़ल- *****ग़लती की*****

    सबने जिसको छोड़ा उसको क्या अपनाकर ग़लती की. मैंने फ़र्ज़ निभाया तो क्या फ़र्ज़ निभाकर ग़लती की. सोचा था इक मौका दूँ वो अपनी भूल सुधार करे, लेकिन उसने फिर दोबारा मौका पाकर ग़लती की. उसके...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    क्या हाथों में हाथ न दोगे? जीने के जज़्बात न दोगे? मात अगर अबकी भी खा लूँ , आगे से फिर मात न दोगे? जिसमें हम दोनों ही भीगें, वो बरसाती रात न दोगे? यादों के...

  • व्यंग्य गीत –  हउदी मोदी

    व्यंग्य गीत – हउदी मोदी

    अमरीका मा “हउदी मोदी” कितना स्वागत भवा अपार. मोदी-मोदी कहि चिल्लाने आये लोग पचास हज़ार. ट्रंप कहिन-हम अपने घर मा जलवा देखेन आज तुम्हार. समझ गएन हम तुमहीं ते अब होई बेड़ा पार हमार. हाथ पकरि...



  • ग़ज़ल-अब भी है

    ग़ज़ल-अब भी है

    दिल की पहले जैसी हालत अब भी है. मुझको उससे प्यार – मुहब्बत अब भी है. यों तो उससे अब रिश्ता है नज़दीकी, फिर भी थोड़ी-बहुत नज़ाकत अब भी है. अपना ग़म क्यों मुझसे न साझा...



  • व्यंग्य- चेला चंटाल

    व्यंग्य- चेला चंटाल

    अक्सर गुरु घंटाल की चर्चा होती है. मैंने विचार किया कि अगर गुरु घंटाल हो सकता है तो चेला चंटाल क्यों नहीं. लखनऊ के सनकी जी ने लिखा है- गुरु-गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय बलिहारी...