गीत/नवगीत

गीत-भीतर भी कोरोना है

बाहर  भी  कोरोना  दिखता  भीतर  भी  कोरोना  है. जाने कब  तक  कोरोना  का बोझा  हमको  ढोना है. सुबह-सुबह अख़बारों  में भी ये   ख़बरें   सिरमौर   हुईं   हैं. इतने   रोगी   और   बढ़  गये इतनी   मौतें   और    हुईं   हैं. कुछ भी नहीं समझ में आता-आगे क्या-क्या होना […]

बाल कविता

बन्दर से भी बुद्धिमान होती है अधिक बँदरिया

एक दिवस भोलू बन्दर ने पर्स राह में पाया. नोट देखकर काफी उसमें ऐसा प्लान बनाया- पाँच सितारा होटल में चल खाना खाया जाये. आज बँदरिया रानी पर कुछ रंग जमाया जाये. भोलू जी जा पहुँचे होटल वेटर को बुलवाया. सबसे पहले सूप टुमैटो वेटर लेकर आया. भोलू जी पी गये शौक से सूप गटागट […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल-दूसरा मिसरा नहीं मिला…

टूटा जो दिल तो दिल को दिलासा नहीं मिला. राँझे को हीर, हीर को राँझा नहीं मिला. सोचा जो दिल की कह दूँ तो हिम्मत नहीं हुई हिम्मत हुई तो कहने का मौक़ा नहीं मिला. इतने हैं रिश्तेदार कि मुश्किल शुमार है, कहते हैं जिसको रिश्ता,वो रिश्ता नहीं मिला. बिछुड़े हैं जबसे तुमसे हम ऐसे […]

बाल कविता

बालगीत- मैं हूँ तितली रानी

मैं हूँ तितली रानी-मैं हूँ तितली रानी. बहुत ध्यान से बच्चे सुनते, मेरी मधुर कहानी. बगिया-बगिया जाती हूँ. फूलों पर मंडराती हूँ. इठलाती-बलखाती हूँ. अनगिन खेल दिखाती हूँ. मुझे देखकर बच्चे दौड़ें, छोड़ें खाना-पानी. मैं हूँ तितली रानी-मैं हूँ तितली रानी. लाल-गुलाबी-नीले हैं. हरे-बैगनी-पीले हैं. कितने रंग-रँगीले हैं. मेरे पंख सजीले हैं. इन पंखों पर […]

गीतिका/ग़ज़ल

व्यंग्य ग़ज़ल-आज वो बदनाम कहता है

निकलता जिनसे कुछ मतलब उन्हें हुक्काम कहता है. निकल जाता है जब मतलब वो झंडू बाम कहता है. तरीका उसका अपना है किसी की चापलूसी का, पड़े जब काम कल्लू से तो कालाजाम कहता है. टहलने भी नहीं जाता न करता दंड-बैठक वो, सुबह बस फूँ-फाँ कर लेता उसे व्यायाम कहता है. पिलाकर जाम मुझको […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल- *****ग़लती की*****

सबने जिसको छोड़ा उसको क्या अपनाकर ग़लती की. मैंने फ़र्ज़ निभाया तो क्या फ़र्ज़ निभाकर ग़लती की. सोचा था इक मौका दूँ वो अपनी भूल सुधार करे, लेकिन उसने फिर दोबारा मौका पाकर ग़लती की. उसके घर में आग लगी थी मेरा घर भी जल जाता, तो क्या मैंने उसके घर की आग बुझाकर ग़लती […]

समाचार

कैलीफोर्निया की डाॅ. शकुंतला बहादुर के सम्मान में काव्य गोष्ठी

बे एरिया, कैलीफोर्निया की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.शकुंतला बहादुर आईआईटी, कानपुर में अपने पुत्र के पास आई थीं. कानपुर के हास्य कवि डाॅ.कमलेश द्विवेदी के आग्रह पर वह उनके निवास पर पधारीं जहाँ उनके सम्मान में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. डाॅ.शकुंतला जी मूलतः लखनऊ की रहने वाली हैं.वह वहां पर महिला डिग्री काॅलेज, में […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

क्या हाथों में हाथ न दोगे? जीने के जज़्बात न दोगे? मात अगर अबकी भी खा लूँ , आगे से फिर मात न दोगे? जिसमें हम दोनों ही भीगें, वो बरसाती रात न दोगे? यादों के सँग ही रह लूँ मैं, इतना भी सँग-साथ न दोगे? दिल न दिया है दर्द ही दे दो, कोई […]

गीत/नवगीत

व्यंग्य गीत – हउदी मोदी

अमरीका मा “हउदी मोदी” कितना स्वागत भवा अपार. मोदी-मोदी कहि चिल्लाने आये लोग पचास हज़ार. ट्रंप कहिन-हम अपने घर मा जलवा देखेन आज तुम्हार. समझ गएन हम तुमहीं ते अब होई बेड़ा पार हमार. हाथ पकरि मोदी जी बोले-अबकी बार ट्रंप सरकार. जइसे कौनौ दल का मुखिया प्रत्याशी का करै प्रचार. गये उहाँ इमरानव लेकिन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल-उसकी रहमत अगर नहीं मिलती

जब भी उसकी ख़बर नहीं मिलती. रात मिलती , सहर नहीं मिलती. मैं तो ख़ुद से कभी न मिल पाता, उसकी चाहत अगर नहीं मिलती. चाँदनी तो धरा पे मिलती है, चाँदनी चाँद पर नहीं मिलती. सच में कैसे अमीर होता मैं, दौलते – इश्क गर नहीं मिलती. जो भी अपनों को छोड़ देता है, […]