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  • दोहे-थोड़े चित्र-विचित्र

    दोहे-थोड़े चित्र-विचित्र

    कल का सपना आपको, आज बताऊँ मित्र. मैंने देखे ख़्वाब में, थोड़े चित्र-विचित्र. राहुल कहते-दीजिए, हमें हार का श्रेय. माँ-बहना सँग मिल हुये, हम सब “दत्तात्रेय”. लगा ज्योतिरादित्य का, बहुत बड़ा दरबार. सबके सँग खिंचवा रहे,...

  • संस्कार और दिखावा

    संस्कार और दिखावा

    कल सपने में देखा-गुरुवर पत्नी सहित पधारे. “धन्यभाग्य हैं” कहकर हमने उनके पाँव पखारे. वे बोले-खुश रहे सदा तू बस इतना बतला दे- यों ही चरण कभी क्या धोये तूने मात-पिता के? यह सुनते ही नींद...





  • ग़ज़ल-जाओ, मत समझो

    ग़ज़ल-जाओ, मत समझो

    मुझको शतप्रतिशत समझो. या फिर बिलकुल मत समझो. लाभ मिलेगा रिश्तों से, पर उनकी क़ीमत समझो. कोई तुमको चाहे तो, अच्छी है क़िस्मत समझो. झूठ अभी तक बोले हो, सच की भी ताक़त समझो. धन-दौलत, शोहरत,...

  • ग़ज़ल-बात तुम्हारी एकतरफ

    ग़ज़ल-बात तुम्हारी एकतरफ

    कृष्णमुरारी एकतरफ. सेना सारी एकतरफ. एकतरफ मेरी दुनिया, दुनियादारी एकतरफ. इश्क अगर हो चारागर, हर बीमारी एकतरफ. जो देकर दस्तार मिले, वो सरदारी एक तरफ. बस मिलने की शिद्दत हो, सब लाचारी एकतरफ. इतनी तेज़ ज़ुबाँ...

  • ग़ज़ल- वाह नहीं है

    ग़ज़ल- वाह नहीं है

    किसको धन की चाह नहीं है? लेकिन मुझको डाह नहीं है. उसकी फ़िक्र करूँ क्यों जिसको, मेरी कुछ परवाह नहीं है. मंज़िल की बातें करता वो, पाने का उत्साह नहीं है. उसको एक नज़र भर देखा,...