गीतिका/ग़ज़ल

वो सबके आँगन में है

राम रमा कण-कण में है.सुमिरो वो सुमिरन में है. तुलसी जैसी भक्ति करो,मिलता वो चन्दन में है. शबरी जैसी चाहत हो,आ जाता वो वन में है. आज न सिर्फ़़ अयोध्या में, राम सभी के मन में है. हम घर बैठे लेकिन मन,लगा भूमि पूजन में है. आँगन-आँगन दीप जले,वो सबके आँगन में है. डॉ कमलेश […]

इतिहास

पहला कवयित्री सम्मेलन

जब मैंने पहले कवि सम्मेलन के बारे में लेख लिखा तो मन में यह विचार आया कि पहला कवयित्री सम्मेलन भी कभी न कभी हुआ होगा.कब हुआ होगा,कहाँ हुआ होगा और किसने करवाया होगा जैसे प्रश्न मन में उठे.कुछ मित्रों से चर्चा भी की. पता चला कि पहले कवि सम्मेलन के ठीक दस साल बाद […]

गीत/नवगीत

यादों की अलबम

एक चित्र यादों की अलबम से कल निकला बाहर.उसने हमें दिखाये कितने भूले – बिसरे मंज़र. याद आ गया घंटों – घंटों तुमसे बातें करना.घंटों – घंटों बातें करनाफिर भी जी ना भरना.चलते-चलते कहना-कल फिर मिलना हमें यहीं पर.एक चित्र यादों की अलबम से कल निकला बाहर. वो काॅलेज की कैंटीन मेंमिलकर समय बिताना.एक – […]

गीत/नवगीत

गीत- “कोई पेड़ लगाता है”

कोई पेड़ लगाता है फल दूजा कोई खाता है. उसको है मालूम मगर वो पेड़ लगाये जाता है. कितने पेड़ लगाये उसने कितनों की तैयारी है. सारे पेड़ों का विकास हो उसकी ज़िम्मेदारी है. वो अपनी ये ज़िम्मेदारी पूरी तरह निभाता है. कोई पेड़ लगाता है फल दूजा कोई खाता है. सर्दी-गर्मी या वर्षा हो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल-घर के जैसा ठौर कहाँ है

करके देखा गौर, कहाँ है?तुझ सा कोई और कहाँ है? क्या फल की उम्मीद करें हम,इन आमों में बौर कहाँ है? हाथ मिलाना भूल गये सब,अब पहले सा दौर कहाँ है? ख़ुद को वो चाहे जो कह ले,लेकिन अब सिरमौर कहाँ है? जो माँ के हाथों मिलता था,रोटी का वो कौर कहाँ है? जग में […]

इतिहास

पहला कवि सम्मेलन

इस वर्ष कवि सम्मेलन का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है.पहला कवि सम्मेलन कानपुर में हुआ था.गूगल जानकारी के अनुसार 1920 में.कानपुर का निवासी और हिंदी का एक छोटा सा सेवक होने के नाते इस विषय पर काफी समय से कुछ लिखने की सोच रहा था.पर चूँकि यह ऐतिहासिक विषय है,अत: इस संबंध में कुछ […]

कविता

व्यंग्य : कवि बनाम कूड़ा-करकट

कल एक कवि मित्र को फोन कियाउसने ढँग से रिस्पांस ही नहीं दियामैंने पूछा-क्या झगड़ा हो गया है किसी सेवो बोला-हाँ, पत्नी से मैंने समझाया-अरे यार दुनिया में कौन सा घर हैजहाँ न कोई आपसी खटपट होवो बोला-पत्नी ने कहा हैतुम कवि नहीं होकूड़ा-करकट होतू क्या समझता हैयह साधारण खटपट हुई हैअरे यार, मेरी आत्मा […]

गीत/नवगीत

कोरोना पर गीत – हार ही जायेगा यह कोरोना

कानपुर के चर्चित हास्य-व्यंग्य कवि डॉ. कमलेश द्विवेदी ने कोरोना योद्धाओं को समर्पित एक गीत लिखा है-“हार ही जाएगा यह कोरोना” जिसका वीडियो एल्बम उनके बेटे दिव्यांश द्विवेदी ने तैयार किया है. इस एल्बम में डाॅ.कमलेश द्विवेदी के साथ ही डॉ. विष्णु सक्सेना (अलीगढ़) डाॅ. कीर्ति काले (नई दिल्ली) और डाॅ. कविता किरण ( फालना-राजस्थान) […]

गीत/नवगीत

गीत-भीतर भी कोरोना है

बाहर  भी  कोरोना  दिखता  भीतर  भी  कोरोना  है. जाने कब  तक  कोरोना  का बोझा  हमको  ढोना है. सुबह-सुबह अख़बारों  में भी ये   ख़बरें   सिरमौर   हुईं   हैं. इतने   रोगी   और   बढ़  गये इतनी   मौतें   और    हुईं   हैं. कुछ भी नहीं समझ में आता-आगे क्या-क्या होना […]

बाल कविता

बन्दर से भी बुद्धिमान होती है अधिक बँदरिया

एक दिवस भोलू बन्दर ने पर्स राह में पाया. नोट देखकर काफी उसमें ऐसा प्लान बनाया- पाँच सितारा होटल में चल खाना खाया जाये. आज बँदरिया रानी पर कुछ रंग जमाया जाये. भोलू जी जा पहुँचे होटल वेटर को बुलवाया. सबसे पहले सूप टुमैटो वेटर लेकर आया. भोलू जी पी गये शौक से सूप गटागट […]