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  • व्यंग्य गीत –  हउदी मोदी

    व्यंग्य गीत – हउदी मोदी

    अमरीका मा “हउदी मोदी” कितना स्वागत भवा अपार. मोदी-मोदी कहि चिल्लाने आये लोग पचास हज़ार. ट्रंप कहिन-हम अपने घर मा जलवा देखेन आज तुम्हार. समझ गएन हम तुमहीं ते अब होई बेड़ा पार हमार. हाथ पकरि...



  • ग़ज़ल-अब भी है

    ग़ज़ल-अब भी है

    दिल की पहले जैसी हालत अब भी है. मुझको उससे प्यार – मुहब्बत अब भी है. यों तो उससे अब रिश्ता है नज़दीकी, फिर भी थोड़ी-बहुत नज़ाकत अब भी है. अपना ग़म क्यों मुझसे न साझा...



  • व्यंग्य- चेला चंटाल

    व्यंग्य- चेला चंटाल

    अक्सर गुरु घंटाल की चर्चा होती है. मैंने विचार किया कि अगर गुरु घंटाल हो सकता है तो चेला चंटाल क्यों नहीं. लखनऊ के सनकी जी ने लिखा है- गुरु-गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय बलिहारी...


  • दोहे-थोड़े चित्र-विचित्र

    दोहे-थोड़े चित्र-विचित्र

    कल का सपना आपको, आज बताऊँ मित्र. मैंने देखे ख़्वाब में, थोड़े चित्र-विचित्र. राहुल कहते-दीजिए, हमें हार का श्रेय. माँ-बहना सँग मिल हुये, हम सब “दत्तात्रेय”. लगा ज्योतिरादित्य का, बहुत बड़ा दरबार. सबके सँग खिंचवा रहे,...

  • संस्कार और दिखावा

    संस्कार और दिखावा

    कल सपने में देखा-गुरुवर पत्नी सहित पधारे. “धन्यभाग्य हैं” कहकर हमने उनके पाँव पखारे. वे बोले-खुश रहे सदा तू बस इतना बतला दे- यों ही चरण कभी क्या धोये तूने मात-पिता के? यह सुनते ही नींद...