हास्य व्यंग्य

व्यंग्य- इस ख़बर पर उनका दर्द

जैसे किसी गन्ने को चरखी में से चार बार गुजारने के बाद उसकी हालत होती है, या किसी भी पतरे की अलमारी को गोदरेज की अलमारी कहने की तर्ज पर पानी की हर बोतल को बिसलरी कहने वाले किसी व्यक्ति द्वारा पूरी बोतल गटकने के बाद उसे मरोड़ मरोड़ कर जो हालत कर दी जाती […]

सामाजिक

चिठ्ठी न कोई संदेश…

(10 अक्टूबर ‘राष्ट्रीय डाक दिवस‘ पर विशेष) एक कहावत है  – “ख़त का मजमून भाँप लेते हैं लिफाफा देखकर।” हैं साहब ऐसे लोग, जो ऐसा कर सकते हैं, लेकिन बहुत कम। हो सकता है आने वाले समय में यह कहावत अप्रासंगिक हो जाए और लिफाफा देखकर मजमून भाँपने वाले कोई न बचे…क्योंकि वर्तमान पीढ़ी न तो कागजों पर […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मुखिया मुख सो चाहिए

जनमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी को लेकर आम धारणा यही है कि वे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की भक्ति में आकंठ डूबे एक ऐसे कवि थे जिन्होंने जन-जन में सर्वाधिक लोकप्रिय राम चरित मानस,हनुमान चालीसा, विनय पत्रिका,जानकी मंगल सहित कई धार्मिक साहित्य की रचना की। वस्तुतः यह सही है, फिर भी गोस्वामी तुलसीदास जी के […]

हास्य व्यंग्य

हास्य व्यंग्य- किसम किसम के लोग

इन दो महीनो में जितना ‘वाट्सएप’ चलाया है, उतना कभी नहीं चलाया था। इससे प्राप्त ज्ञान व अनुभव के आधार पर कुछ नए किस्म के लोगों से परिचय हुआ, इन लोगों में वे शामिल नहीं हैं जो बिना नागा,तीसों दिन अलसुबह “गुड माॅर्निंग” शुभ प्रभात के किसी उपदेशात्मक संदेश को वाट्सएप पर भेजते हैं…! या […]

हास्य व्यंग्य

ऑनलाइन : तब और अब

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने एक डायलॉग किसी फिल्म में बोला था जो इस प्रकार है – “हम जहाँ खड़े होते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है।” सोचो अगर यही डायलॉग समर्थ अभिनेता ए. के. हंगल साहब ने बोला होता तो कैसा लगता..? खैर …बात यह नहीं है, यह तो यूँही परिहास में […]