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  • गुरुर होते देखा है !

    गुरुर होते देखा है !

    दिल को अपने ही हाथों मजबूर होते देखा है। न चाहते हुए भी प्यार से दूर होते देखा है। न करनी थी वो गलतियों जो हो चुकी हैं अब, उन छोटी गलतियों को भी नासूर होते...

  • टूट गई दीवारें !

    टूट गई दीवारें !

    टूट गई दीवारें अब सब दिखता है गरीबी की अपनी देखो हर कोई कहानी लिखता है। कल तक परदे में था अब सब सामने दिखता है इक आम इंसान जब तड़प कर भूख से मरता है।...

  • बेटा !

    बेटा !

    कविता के पति जय अपनी ममी पापा के इकलौते बेटे थे, इसलिए शादी के चार पाँच महीने बाद ही सास और पति ने बेटे का फरमान जारी कर दिया था। देखो बहु हम लड़की लड़के में...

  • समय !

    समय !

    समय किसी के लिए नहीं रुकता ये हम सब जानते हैं। कभी  कभी बहुत कुछ पाने की होड़ में हम अपना बहुत कुछ खो देते हैं और समय आगे निकल जाता है। शंभु रोज़ की तरह...

  • कविता ।

    कविता ।

    फिर उमड़-उमड़ कर निकल पड़े कुछ शब्द मन के गलियारों से। लिखने इक नई कविता कोई आपबीती कुछ अंजाने विचारों से। तुम जब पड़ोगे शब्दों को दोष न देना फिर कुछ हमको ; शब्द तो साझे...

  • नील गगन को छूने दो !

    नील गगन को छूने दो !

    न मन में संकोच है, न भावों में आक्रोश है। मन का पंछी न सुने ,दिल का क्या दोष है। ख्वाहिशों को मचलने दो,नील गगन को छूने दो; हर पल को जीने की चाह,धड़कन मदहोश है।...

  • औरत !

    औरत !

    पूनम आज भी अपने पति के साथ ज़िन्दगी गुजारना चाहती थी पर समय जाने क्या-क्या रंग दिखा रहा था। औरत हूँ शायद इसलिए इतना बड़ा फैसला नहीं ले पा रही हूँ….ऊपर से दो बेटियां हैं वो भी मेरी...

  • जानवर !

    जानवर !

    बंटी जल्दी जल्दी स्कूल की ओर जा रहा था,तभी एक नज़र पिंकी के पापा पर पड़ी! पिंकी के पापा उसी ओर आ रहे थे, पर अचानक बंटी के कदम रुक गए …..ये क्या? पास की झाड़ियों में...

  • दिल की बात कहता हूँ !

    दिल की बात कहता हूँ !

    सुनो गर तो आज दिल की बात कहता हूँ! कह न सका जो बरसों वो जज़्बात कहता हूँ! चाँद को तारों से कहनी थी जो अनकही ; वो हसीन झिलमिल सी मुलाकात कहता हूँ! ख्वाबों का...

  • हमारा वतन !

    हमारा वतन !

    बात वतन के हित की हो बस कुछ को तकलीफ़ होती है, हर बात पे बस राजनीति क्या कोई इसकी हद होती है ! वतन के साथ यूं खिलवाड़ न करो राजनीति़ के गलियारों से, मौके...