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  • धन्यवाद !

    धन्यवाद !

    समीर भाग कर दादाजी की गोद में आकर बैठ गया और बड़ी मासूमियत से कहने लगा दादा जी अंकित है ना.. मेरा दोस्त बहुत मज़े करता है उसकी किस्मत कितनी अच्छी है वो अभी  सिंगापुर से...

  • विदाई !

    विदाई !

    जाना है छोड़ कर अब जानती हूँ बाबा ये सब पर जान कर अंजान रही बात ह्रदय की न कही! याद तो सभी आएंगे पंछी वहाँ भी गाएंगे मायका भी कैसा होता है मन कहीं जिसे न खोता...

  • छुटकी !

    छुटकी !

    शोभा अपनी सास के साथ सुबह से कन्या पूजन की तैयारी में लगी थी। सब कुछ बन कर तैयार था, जल्दी से कन्याओं को घर पर बुलाने के लिए सासु माँ ने अपने पोते बंटी को...

  • तेजाब !

    तेजाब !

    होंठो पर झूठी मुस्कान लिए रीना ने सास ससुर का स्वागत किया। रवि सब जानता था पर घर में कलेश से डरते कुछ न कहता, पर ये बात उसे तेजाब की तरह जलन देती थी कि...

  • मूर्ति !

    मूर्ति !

    आज दीनदयाल अपने साथ अपने पोते को भी ले गया था विधालय में आज छुट्टी थी । रंग बिरंगी मूर्तियां बनाने का काम ज़ोरो पर था, सेठ ने दुकान के पीछे थोड़ी सी जगह दे रखी...

  • क्षणिका

    क्षणिका

    तुम फिर बहला दोगे हमे बातों से हम जानते हुए भी सच मान लेंगे खामोश रहकर बस देखेंगे तुम्हें झूठ को सच बताते हुए । कामनी गुप्ता*** जम्मू ! परिचय - कामनी गुप्ता माता जी का...

  • तरही ग़ज़ल !

    तरही ग़ज़ल !

    दिल में जो दर्द है उसे छुपा भी न सकूं। नगमा मुहोब्बत का उसे सुना भी न सकूं। हर महफिल में खोजता हूँ उसे जाने क्यूं; ढूंढने उसको चला हूँ जिसे पा भी न सकूं। रूठ...

  • कुसूर !

    कुसूर !

    सरला आज बहुत खुश थी उसके इकलौते बेटे अमीत और मीनू की शादी थी, शादी सम्पन्न हो गई थी। मीनू और अमीत वापिस जा चुके थे, अमीत प्राईवेट कंपनी में नौकरी करता था इसलिए इतने दिन...

  • तरही ग़ज़ल !

    तरही ग़ज़ल !

    सफ़र को छोड़ कश्ती से उतर जा। किसी के नाम खुशियां अपार कर जा। नहीं मोहताज हुनर किसी मुकाम का, हुनर से अपने रोशनी सा बिखर जा। मंज़िल को पाने की गर चाह है पक्की, मुश्किल...

  • तरही ग़ज़ल !

    तरही ग़ज़ल !

    कैसी ये आफत है हम कहेंगे कैसे। दिल पर इस बोझ को अब सहेंगे कैसे। वतन की कम खुद की फिक्र है सबको, एकजुट होकर यूं फिर अब रहेंगे कैसे। परिंदों ने भी ढूंढ लिया ठिकाना...