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  • कभी कभी करता है मन।

    कभी कभी करता है मन।

    कभी -कभी करता है मन। त्याग के सब उधेड़-बुन। करूं कुछ बातें तुमसे मैं; और कुछ तुम कहो साजन। मन करता हैभूल ये लम्हें; रहें हम इक दूजे में मग्न। ये फिज़ाएं ये नदियां सब; शांत...

  • नफ़रत।

    नफ़रत।

    अपनी मम्मी को आवाज़ लगाता ध्रुव चुपचाप वहीं खड़ा हो गया, मम्मी और दादी आपस में झगड़ रहे थे। दादी गुस्से वाले थे मगर उनके गुस्से में स्वार्थ के साथ-साथ फिक्र भी थी, मम्मी को आजाद...

  • रेलगाड़ी।

    रेलगाड़ी।

    एक स्टेशन से दूजे तक भागती जाती वो हरदम रुकने का न लेती नाम हरे सिग्नल तक करे विश्राम। तुम जब इसमें बैठोगे मंजिल तक पहुंचोगे इक बात का रखना ध्यान रखना साफ अपना जान। देश...

  • पार्सल।

    पार्सल।

    अवि दरवाजा खोलने के लिए उठा ही था कि रीना भागती पहले आ गई, वो… मेरा पार्सल आना था ” रीना की आवाज़ और चेहरे के भाव साफ़ बता रहे थे कि वो नहीं चाहती कि...

  • आस बंधाती याद तेरी।

    आस बंधाती याद तेरी।

    आस बंधाती याद तेरी मन जब डगमगाने लगा तिमिर सा जब छाने लगा फिर किरण बन गई मेरी आस बंधाती याद तेरी। तुम सब कुछ समझते हो जब भी मुझसे मिलते हो हर मुश्किल होती दूर...


  • गौरैया।

    गौरैया।

    मुंह खोल कर आस से देखें बच्चे उदास से चोंच में भर कर देखो मां कुछ लाई तो होगी। राह की चुनोतियों को कैसे कहे उन नीतियों को कितनी जदोजहद के बाद कुछ दाने ला पाई...

  • तुम से बिछड़ के।

    तुम से बिछड़ के।

    तुम से बिछड़ के सोचा न था, फिर तुम से यूं मिलना होगा। उन गलियों में फिर अपना, इक बार यूं चलना होगा। तुम से…. जानते हैं फिर पहले की तरह, घाव दिल पे कोई सहना...

  • हास्य कविता (राजनीति)

    हास्य कविता (राजनीति)

    राजनीति का गिरगिट पल पल रंग बदल रहा कौआ भी  देखो यहां हंस की चाल चल रहा तुम मुझे बुरा कहोगे तो क्या अच्छा तुम पाओगे एक सुनाओगे तो बदले अतीत की गिनती पाओगे एक दूसरे...

  • ज़िन्दगी….

    ज़िन्दगी….

    ज़िन्दगी…. छोटे बड़े ख्वाब दिखाती है ज़िन्दगी। हंसते -हंसते कभी रुलाती है ज़िन्दगी। सोचे जब कभी सब पा लिया है हमने; नई ख्वाहिश से रुबरु कराती है ज़िन्दगी। नाउम्मीदी की रात जब गुज़र जाती है; नई सुबह अरमानों...