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  • हास्य कविता (राजनीति)

    हास्य कविता (राजनीति)

    राजनीति का गिरगिट पल पल रंग बदल रहा कौआ भी  देखो यहां हंस की चाल चल रहा तुम मुझे बुरा कहोगे तो क्या अच्छा तुम पाओगे एक सुनाओगे तो बदले अतीत की गिनती पाओगे एक दूसरे...

  • ज़िन्दगी….

    ज़िन्दगी….

    ज़िन्दगी…. छोटे बड़े ख्वाब दिखाती है ज़िन्दगी। हंसते -हंसते कभी रुलाती है ज़िन्दगी। सोचे जब कभी सब पा लिया है हमने; नई ख्वाहिश से रुबरु कराती है ज़िन्दगी। नाउम्मीदी की रात जब गुज़र जाती है; नई सुबह अरमानों...

  • कभी कहा था तुमने …

    कभी कहा था तुमने …

    कभी  कहा था तुमने …. रहेंगे संग उम्रभर मगर आज जाने को कहते हो तुमसे दूर कैसे रह सकूंगी सोचो तो ऐ मेरे हमसफ़र। मेरी हर याद में और बात में तुम्हारा ही जिक्र है हर...


  • दिल चाहता है।

    दिल चाहता है।

    पुरुष उत्पीड़न ! दिल चाहता है। पूनम और रवि की शादी को अभी एक महीना भी नहीं हुआ था कि अलगाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। रवि समझ नहीं पा रहा था कि वो क्या...

  • होली।

    होली।

    सपना ने आँखें मलते हुए बाहर देखा बच्चे गली में होली खेल रहे थे, इतनी सुबह….मन मे बुदबुदाई। मन तो था, पर दादी के डर से नहीं जा रही थी। पर थोड़ी देर बाद सब्र का...

  • चौकीदार।

    चौकीदार।

    जनता का अब के मूड कुछ ओर है। कुछ कहते हैं कि चौकीदार ही चोर है। पहली बार नेता ऐसा मिला है वतन को; इसलिए विपक्ष के खेमें में इतना शोर है। न मुद्ददा कोई ठोस...

  • उमड़ा जन सैलाब।

    उमड़ा जन सैलाब।

    असलम ! असलम को जैसे ही खबर मिली कि सरहद पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए उनके गांव का उसका प्यारा बचपन का दोस्त शहीद हो गया है, उसका दिमाग चकरा गया दस दिन पहले ही...

  • बेटी की शादी।

    बेटी की शादी।

    ं ममता यूं तो बीच वाले भाई की पत्नी थी पर जाने क्यों न तो उसे देवरानी से सम्मान मिलता था न ही जेठ जेठानी से प्यार। सास के पास बहुत पैसा था सब बेटे आज्ञाकारी...

  • ये आशाओं का डेरा है।

    ये आशाओं का डेरा है।

    ये आशाओं का डेरा है… आशाएं यहां लुप्त होगी जिन्दगी वहाँ सुप्त होगी हर निशा के बाद सवेरा है और ये जो जीवन है… ये आशाओं का डेरा है। मत सोचो क्या क्या खोया था दिल...