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  • हमारा वतन !

    हमारा वतन !

    बात वतन के हित की हो बस कुछ को तकलीफ़ होती है, हर बात पे बस राजनीति क्या कोई इसकी हद होती है ! वतन के साथ यूं खिलवाड़ न करो राजनीति़ के गलियारों से, मौके...



  • गुड़िया की शादी !

    गुड़िया की शादी !

    रीचा बड़े ही प्यार से अपनी गुड़िया को सजा रही थी उसने कितने दिनो से शोर मचाया हुआ था कि वो अपनी गुड़िया की शादी प्रियंका के गुड्डे से सोमवार को करेगी। पापा और ममी के...

  • हर पल को जी लूं !

    हर पल को जी लूं !

    हर पल को जी लूं ! कहता है मन कभी  कभी  तोड़ के बंधन ये अजनबी आज हर पल को जी लूं कल्पनाओं का तिलिस्म जाने क्या कशिश है इसमें खींचता है जो अपनी ओर आज...

  • क्या करे कोई !

    क्या करे कोई !

    अपने ही जब अपनों को छले तो क्या करे कोई! शमां में जानकर परवाना जले तो क्या करे कोई! वक्त़ तो बदल जाता है सबके लिए कभी न कभी; इंतज़ार की लम्बी शाम न ढले तो...

  • थोड़ा सा आसमान !

    थोड़ा सा आसमान !

    सुबह ही बाबू जी ने दोनो बेटों और बहुओं को अपने कमरे में बुलाया था। कमरा तो नाम का था बस एक पलंग मुश्किल से लगा था, और पत्नी के देहांत को अभी एक माह भी नहीं...

  • माँ !

    माँ !

    माँ तो बस माँ होती है इतना ही जानता हूँ मैं! ममता के सुखद सपर्श बस पहचानता हूँ मैं! माँ बिन कहे सब जाने माँ को रब मानता हूँ मैं! माँ तो बस माँ होती है...

  • शिकायत !

    शिकायत !

    अभय माँ की रोज़- रोज़ की डांट से तंग आ चुका था। सुबह ही अभय ने फैसला किया कि वो आज नानी के घर चला जाएगा रहने, वो भी  माँ को बिना बताए। अभय की हरकतों...