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  • खुदगर्ज !

    खुदगर्ज !

    पाषाण, अस्थिर पल पल बदलती, उन रिक्त नैनो से रह रह झलकती ! शून्य से थमती उभरती धड़कते भी , अब हो चुकी है यूं बोझिल उनकी शक्ति! कभी उम्मीदों का दामन थामे वो बेजान तन, नस...

  • जोकर !

    जोकर !

    हंसता हूँ और हंसाता हूँ मैं यूं अपने गम छुपाता हूँ मैं तुम जिसे हुनर जानते हो वो हकीकत बताता हूँ मैं चाहे अरमां टूट चुके हो फिर भी मुस्काता हूँ मैं चंद रुपए की खातिर...

  • पापा कब आएंगे  !

    पापा कब आएंगे !

    पुनित बहुत उदास था तो मनीषा ने फोन पर पुनित की बात सुदेश से कराई। अपने पापा से बात करके पुनित बहुत खुश हो गया कि इस बार दीवाली पर पापा घर आ रहे हैं। वो...

  • सूरत !

    सूरत !

    प्रीती और समीर एक दूसरे से शादी में मिले थे। प्रीती अपनी मर्ज़ी और पसंद से अपने मुताबिक लड़के से शादी करना चाहती थी। शादी में प्रीती से जब मुलाकात हुई उसे पहली ही नज़र में...

  • नन्हीं परी !

    नन्हीं परी !

    नन्ही परी! मेरी नन्ही सी परी है वो सोने सी खरी है मासूम है अंजान भय का नहीं ज्ञान बस वो मुस्काती है गीत कोई गाती है काश वो न हो बड़ी न लगे पहरों की...

  • जीवन का आधार !

    जीवन का आधार !

    मानो या न मानो लेकिन जीवन का आधार यही है। सुख दुख आते जाते रहते मेरा तो व्यवहार यही है। जाने रहते हैं क्यों ,नशे में चूर कुछ लोग यहां ; गिरते को उठा ले जो...

  • बेवकूफ़ !

    बेवकूफ़ !

    अर्पना जैसे ही गाड़ी से निकली, गाड़ी के दरवाज़े से पैदल चल रहे मज़दूर को ठोकर लग गई और वो एकदम से नीचे गिर गया। अर्पना परेशान हो गई, उसे उठाने ही लगी थी कि दूसरी...

  • मुक्ति !

    मुक्ति !

    सुबह सुबह ही रसोईघर से बढ़िया खाने की खुशबू सारे घर में फैल रही थी। सरला ने अपनी मधुर आवाज़ में सबको उठाना शुरु किया और डांटना भी  कि अगर मैं न जगाऊं तो क्या हो,...

  • और उम्र ढलती जाती है !

    और उम्र ढलती जाती है !

    कभी उलझ जाते हैं कभी  सुलझ जाते हैं हमसफर संग चलते चलते कुछ रिश्ते बदल जाते हैं और उम्र ढलती जाती है ! कुछ बिछड़ जाते हैं कुछ मिल जाते हैं कुछ नए से रिश्ते फिर यूं...

  • धन्यवाद !

    धन्यवाद !

    समीर भाग कर दादाजी की गोद में आकर बैठ गया और बड़ी मासूमियत से कहने लगा दादा जी अंकित है ना.. मेरा दोस्त बहुत मज़े करता है उसकी किस्मत कितनी अच्छी है वो अभी  सिंगापुर से...