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  • माँ !

    माँ !

    माँ तो बस माँ होती है इतना ही जानता हूँ मैं! ममता के सुखद सपर्श बस पहचानता हूँ मैं! माँ बिन कहे सब जाने माँ को रब मानता हूँ मैं! माँ तो बस माँ होती है...

  • शिकायत !

    शिकायत !

    अभय माँ की रोज़- रोज़ की डांट से तंग आ चुका था। सुबह ही अभय ने फैसला किया कि वो आज नानी के घर चला जाएगा रहने, वो भी  माँ को बिना बताए। अभय की हरकतों...



  • दिनभर वक्त़ हमारा अब !

    दिनभर वक्त़ हमारा अब !

    मेरे पास आओ माँ, गीत कोई सुनाओ माँ, इम्तिहान खत्म हुए अब, मौज करेंगे मिलकर सब! मेरे पास….. बंटु,बंबु और जीतू आओ, यारो कुछ नया सुनाओ , दिनभर वक्त हमारा अब, नतीजे आएंगे सोचेंगे तब! मेरे...

  • लगता है !

    लगता है !

    लगता है ! होली पे तुम सब भूल कर बड़ाओगे कदम आगे , लगता है सच ही तो है ,क्या रखा है छोटी -छोटी बातों को बड़ाने में बार-बार रुठने और मनाने में त्योहार यही तो...

  • मास्टर जी !

    मास्टर जी !

    सोमनाथ जी ने जैसे ही घर में कदम रखा, रमा ने लम्बी सामान की लिस्ट थमा दी। सोमनाथ जी समझ गए आज रमा गुस्से में है, रमा ने फिर पुराना राग अलापना शुरु कर दिया था।...

  • यात्रा वृत्तान्त!

    यात्रा वृत्तान्त!

    छुट्टियों का बहाना ढूंढना और अपने कज़न्स के साथ बैष्णौ देवी के दर्शन करने जाना जो कटरा में है तकरीबन दो घंटे लग जाते हमें जम्मू से कटरा पहुंचने में। रास्ता तब इतना अच्छा नहीं था,...

  • कैक्टस !

    कैक्टस !

    कैक्टस! जानता हूँ तुम्हें बस फूलों की महक पसंद है, पर मैं तो ठहरा साधारण सा कैक्टस ! जिसमें न महक है और न ही कोई आकर्षण , तुम्हें मैं नापसंद हूँ ,मेरा नाम भी तुम्हें पसंद...

  • खाली हाथ !

    खाली हाथ !

    सविता ऐसे तो चुप ही रहती थी, पर जब बात उसके स्वाभिमान पर आती तो वो अपना आपा खो देती थी और फिर जो भी सामने आए उसको बात सुना देती। सविता के दो बेटे थे ज़िन्दगी...