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  • उलझन

    उलझन

    शिखा नई नई फेसबुक ज्वॉइन की थी ! सभी फेसबुक फ्रेंड्स की तस्वीरों पर हजारों की संख्या में लाइक्स कमेंट्स देखकर उसे भी इच्छा होती थी कि वो भी अपनी अच्छी अच्छी तस्वीरें डाले! अभी वह...

  • पलकों में ही अश्रु संजोकर

    पलकों में ही अश्रु संजोकर

    पलकों में ही अश्रु संजोकर पीना सीख लिया , रोते – रोते हँसकर मैंने जीना सीख लिया, तेरी खुशियों में प्रिय मैंने भूलकर अपनी खुशी , हर खुशियों में तेरे ही खुश होना सीख लिया  | बहुत...

  • संस्मरण : बीस पैसा

    संस्मरण : बीस पैसा

    हमारे लिए गर्मी की छुट्टियों में हिल स्टेशन तथा सर्दियों में समुद्री इलाका हमारा ननिहाल या ददिहाल ही हुआ करता था! जैसे ही छुट्टियाँ खत्म होती थी हम अपने ननिहाल पहुंच जाया करते थे जहाँ हमें...

  • चले आओ कि तेरे बिन

    चले आओ कि तेरे बिन

    चले आओ कि तेरे बिन कहीं अच्छा नहीं लगता | कि सपने देखती तो हूँ मगर सच्चा नहीं लगता | बहुत कोशिश किया मैनें कि रह लूँ मैं तुम्हारे बिन , मगर तुम बिन मुझे जीना...

  • हमारे बुजुर्ग

    हमारे बुजुर्ग

    हमारे बुजुर्ग हमारे धरोर हैं..! जिन्होंने अपने सुन्दर घर बगिया को अपने खून पसीने से सींच सींच कर उसे सजाया हो इस आशा से कि कुछ दिनों की मुश्किलों के उपरान्त उस बाग में वह सुकून...


  • बरस गयो रे

    बरस गयो रे

    बरस गयो रे सखी सावन की बदरी | भीगा मेरा तन मन भीग गई चुनरी || लाई पुरवाई साजन का संदेशा | छलक गयो रे मेरे भावों की गगरी || देखो सात रंग में रंग गया...

  • मेरे दिल के तार तुमसे

    मेरे दिल के तार तुमसे

    मिरे दिल के तार तुमसे जुड़ गये न जाने कैसे | सुनो प्रेम प्रेम तुमसे हो गया न जाने कैसे | धड़कने मेरे दिल की धड़के तुम्हारे संग में , छेड़ देते तुम ज़रा भी झनके...

  • रूप अपना मैं अक्सर बदलती रही

    रूप अपना मैं अक्सर बदलती रही

    रूप अपना मैं अक्सर बदलती रही ************************** रूप अपना मैं अक्सर बदलती रही आपमें ही हमेशा मैं ढलती रही माला बन आपके उर सुसज्जित रहूँ खुद में ही मैं कुंदन सी गलती रही पूर्ण हो जाये...