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  • धनतेरस

    धनतेरस

    दीपावली पर्व कि बात करने से पहले कुछ बात धनतेरस यानी धन्वन्तरी त्रयोदशी के बारे में भी बता दूँ। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय अमृत कलश धारण किये भगवान धन्वन्तरी प्रकट हुए थे...

  • दीपावली और प्रदूषण

    दीपावली और प्रदूषण

    माना कि प्रदुषण फैलता है पटाखों से मगर, ख़ुशी के इजहार पर, पहरे लगाए नहीं जाते। पटाखों की जगह भूखों को खाना खिलाने वालों, भिखारियों को क्यों रोजगार दिलाये नहीं जाते ? बातें करते बड़ी बड़ी,...

  • दीपावली पर्व         

    दीपावली पर्व         

    यह सर्वविदित है कि भारत त्योहारों का देश है | भारत भूमि पर 36  करोड़ देवी देवता निवास करते हैं | इसीलिए यहाँ का प्रतिदिन ही नहीं प्रतिपल भी उत्सवों का पल है | भारत में...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    दिल के जख्म जमाने को दिखाया नही करते हैं, देखने के बहाने जख्मों को, लोग कुरेदा करते है| जिसने जख्म दिये है वह, हमदर्दी की बात करें, महफिल हो या तन्हाई  जज्बात से खेला करते हैं|...

  • मुक्तक

    कोई माँ बच्चे को, यूँ दूध नही पिलाती, नजर न लगे, अपने आँचल में छुपाती| होती निगाहें, बच्चे की भाव भंगिमा पर, माँ अपने जिस्म की नुमाइश नही लगाती| नही भाव ममता का, है इसकी आंख...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    अहंकार का बोझ जब, सिर पर चढने लगा, आदमी को आदमी तब, कीडे सा लगने लगा| ढोने लगा वह बोझ अपना, अपने कांधो पर यहाँ, आदमी से आदमियत का, अहसास भी घटने लगा| — अ कीर्ति...

  • ताल्लुक

    ताल्लुक

    रखना है ताल्लुक, झगडा क्यों करें हम, एक दूजे के लिये ही जीयें और मरें हम| रखना नही मतलब किसी से जब ठान लिया, वो जीयें या मरें, क्यों चिन्ता उनकी करें हम| है बहुत दुनिया...

  • गजल

    गजल

    न मकान गिरवी है, न लगान बाकी है, बस कर्ज का मुफ्त, भुगतान बाकी है| करता था मेहनत, कभी खेत में अपने, बंजर पडा है खेत, बस मचान बाकी है| हो गया आराम तलब, माफी के...

  • गजल – कुछ बोलो

    गजल – कुछ बोलो

    छप्पन ईंची सीने पर क्यों आरोप लगाते, कुछ बोलो, बोये थे पेड बबूल के, आम कहाँ से आयेंगे, कुछ बोलो? लूटा है मुल्क अभी तक जिसने, नित नये घोटाले कर, क्यों खामोश जुबां आपकी घोटालों पर,...