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  • सहिष्णुता

    सहिष्णुता

    सहिष्णुता यानी सहनशीलता या सहन करने की शक्ति जो प्रत्येक व्यक्ति, समाज या राष्ट्र  अलग होती है और अलग अलग सन्दर्भों में  अलग। सहिष्णुता का सम्बन्ध मानसिक, शारीरिक, आध्यात्मिक, राजनैतिक अथवा जातिवादी सन्दर्भों में भी लिया...

  • मुक्तक – हौसला

    मुक्तक – हौसला

    रेत की दीवार पर महल बना सकता हूँ, बहते पानी पर लिख कर बता सकता हूँ। मेरे हौसलों का अहसास नही है तुमको, बिना पंख के भी उडकर दिखा सकता हूँ। — अ कीर्तिवर्धन

  • कविता — हदें

    कविता — हदें

    हदें निर्धारित हैं नदी की, नहर की, तालाब व समंदर की, और स्त्री-पुरुष की भी। मगर जब टूटती हैं हदें बरसात में नदी-नहर पोखर या समंदर की आती है प्रलय और कर जाती है सर्वस्व विनाश।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सिमटने लगे हैं घर अब दादी के दौर के, बिखरने लगे हैं लोग जब गाँव छोड़ के। हो गया बड़ा मेरा गाँव, सरहद के छोर से, बनने लगे मकां, जब घरों को तोड़ के। सिमट गई...

  • कुछ मुक्तक

    कुछ मुक्तक

    भीगी पलकों से ख्वाब चुराना तो अदा है, भंवरें का फूल से पराग चुराना तो अदा है। तुम क्या जानो हमने सब कुछ लूटा दिया, प्यार में लूटा कर मुस्कराना भी तो अदा है। पत्थर कभी...

  • बचपन के वो दिन

    बचपन के वो दिन

    मुझे याद है बचपन के वो दिन कागज की कश्ती बनाकर पानी मे तैराना, बरसात के दिनों मे उमडते घुमड़ते बादलों के बीच कल्पना के घोड़े दौड़ाना, मनचाहे चरित्रों को तलाशना, हाँ मुझे याद है। मुझे...

  • स्वास्थ्य

    स्वास्थ्य

    क्या खायें और क्या न खायें, इस पर करें विचार, रात्री में दही त्याग करें, और देर रात आहार। सम्भव हो भोजन करें, नित सूर्यास्त से पूर्व, सलाद न खायें रात में, आयुर्वेद का सार। सुबह...


  • भूत, भविष्य, वर्तमान

    भूत, भविष्य, वर्तमान

    भूत, भविष्य, वर्तमान, मानव के हैं तीन वस्त्र। भूतकाल के वस्त्र बदलकर, वर्तमान में रह लो मस्त। जो भविष्य की चिंता में चिंतित, सदा रहे वह मानव त्रस्त। भूतकाल की जो कमियाँ थी, वर्तमान में शोधन...

  • राष्ट्र के वास्ते

    राष्ट्र के वास्ते

    कब तलक पानी बिलो, मक्खन बनाते रहोगे, हिंसा पर, निंदा की मरहम लगाते रहोगे? मर रहे हैं रोज सैनिक, वतन की हिफाजत में, कब तलक थूक बिलो, मानवाधिकार से डराते रहोगे? चलो कुछ कर दिखायें, अब...