गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वो चिट्ठियों का दौर पुराना हो गया, जबसे मोबाइल से याराना हो गया। खत्म हुई बातें इन्तजार की खत के, अब तो रूबरू इश्कियाना हो गया। निगाहें दर पर डाकिये का इन्तजार, वह किस्सा गुजरा जमाना हो गया। पढ़ते थे वह भी जो लिखा ही नहीं, छिप छिपकर पढ़ना फसाना हो गया। कितनी बार भिगोया […]

कविता

कविता

जीत मे भी, हार मे भी अविचल चलता रहूँगा, विश्वास का संबल लिये मंजिलें गढता रहूँगा| था नही कुछ भी हमारा जो यहाँ पर खो दिया हो, पा सकूँ सारा जहां इस आस मे बढता रहूँगा| हैं कुछ बाधायें यहाँ और पग में कंकर चुभ रहे, हौसलों की डोर थामे नित सृजन करता रहूंगा| कौन […]

बाल कविता

बादल

आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊं, एक कहानी बादल की, काले- पीले, रंग- बिरंगे, भूरे- काले बादल की। रूई से बन गगन में घूमें, अलग अलग धर रूप सलोने, भरा हुआ है कुछ में पानी, बात निराली बादल की। सोच रहे क्या कहां से लाता, इतना सारा ये पानी, धरती जिससे धानी बनती, प्यास बुझाते बादल की। […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

देखती हूं खुद का चेहरा, जब कभी दर्पण में मैं, बस तू ही दिखता मुझे, निहारती हूं खुद को मैं। क्या करूं कान्हा बता, सखियां मुझको टोकती, तू रहा तू ही तू, तुझमें रमकर मैं रह न सकी मैं। — अ कीर्ति वर्द्धन

कविता

वृक्षारोपण

नये साल में नये संकल्प, हमको लेने ठान लिया, वृक्ष बचेंगे जीवन होगा, सच भी हमने जान लिया। विनम्र हमारा अनुरोध है, शासन पर भी अंकुश हो, वृक्ष मित्र भी लगे खेल में, जनता ने पहचान लिया। विकास का मतलब, भौतिक सुविधा को हमने माना, वृक्ष काट कंक्रीट लगाना, विकास का प्रतीक जाना। बढ़ते वाहन […]

गीतिका/ग़ज़ल

जीना है तो मरना सीखो

जीना है तो मरना सीखो पाना है तो खोना सीखो सुबह उजाला गर चाहो तो अन्धकार से लड़ना सीखो । मिलन पिया की आस हृदय में तन्हाई संग जीना सीखो निर्भरता मानव की दुश्मन निज पैरों पर चलना सीखो । खुद को आदर पाना चाहो खुद भी आदर देना सीखो माना रिश्ते अहम् जगत में […]

गीतिका/ग़ज़ल

बदलते दौर में

बदलते दौर में खुद का महत्व बनाये रखना, दांतों के बीच जीभ सा, जरूरत जताये रखना। छोड़ देना कुछ व्यस्न, और पुरानी आदतों को, उम्र का दौर चौथा, निज अहमियत बताये रखना। काम आऊं मैं किसी के, कुछ हुनर हो पास में, बुढ़ापे में प्रिय बनूं, मधुर व्यवहार अपनाये रखना। “मैं और मेरे” में खुश, […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

एक पक्षीय बात, कभी अच्छी नहीं होती, सुनी सुनाई बात, कभी सच्ची नहीं होती। घोल रहे हैं जहर फसल में, जो नित दिन, आन्दोलन की अगुवाई, अच्छी नहीं होती। जरा गौर से देखो, विगत वर्षों की कहानी, कृषक के घर, खुशहाली की नयी कहानी। मिलती दवा खाद, नियमित सस्ते दामों पर, बढे दाम फसलों के, […]

कविता

बेटियाँ

उड रही हैं बेटियाँ, उस उडान की तरफ, अन्जान जिसकी मंजिल, मुकाम की तरफ। विस्तृत गगन सामने, कोमल पर लिये, धरा छोड बढ रही, आसमान की तरफ। है गगन विशाल सामने, सूरज भी जल रहा, उडने की ललक है, मन्जिल का नही पता| हों बाज से प़ंख, और वापसी का भान भी, आगे बढें मगर […]

कविता

जब कभी मन में व्यथा हो

जब कभी मन में व्यथा हो आँसूओं का संग जुदा हो बात मन की कह सको ना तब मुझे तुम याद करना| मुझसे तुम संवाद करना व्यक्त सब जज्बात करना मैं सुनूँगा सब धीर रखकर और मार्ग भी प्रशस्त करूँगा| जानता हूँ बहुत कठिन यह गैर से निज जज्बात कहना पीर जब नासूर बनने लगे […]