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  • ताल्लुक

    ताल्लुक

    रखना है ताल्लुक, झगडा क्यों करें हम, एक दूजे के लिये ही जीयें और मरें हम| रखना नही मतलब किसी से जब ठान लिया, वो जीयें या मरें, क्यों चिन्ता उनकी करें हम| है बहुत दुनिया...

  • गजल

    गजल

    न मकान गिरवी है, न लगान बाकी है, बस कर्ज का मुफ्त, भुगतान बाकी है| करता था मेहनत, कभी खेत में अपने, बंजर पडा है खेत, बस मचान बाकी है| हो गया आराम तलब, माफी के...

  • गजल – कुछ बोलो

    गजल – कुछ बोलो

    छप्पन ईंची सीने पर क्यों आरोप लगाते, कुछ बोलो, बोये थे पेड बबूल के, आम कहाँ से आयेंगे, कुछ बोलो? लूटा है मुल्क अभी तक जिसने, नित नये घोटाले कर, क्यों खामोश जुबां आपकी घोटालों पर,...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    खुद को खुदा समझने वाले, अहंकार में फँस जाते हैं, छोटी-छोटी बातों पर भी, गुस्से से वो लस जाते हैं। अन्धकार में दीप जलाकर, जग को रोशन करने वाले, मानवता हित जीने वाले, अक्सर खुदा सा...

  • गीतिका – बुजुर्ग

    गीतिका – बुजुर्ग

    मैं खामोश रहता हूँ, मगर गूँगा नही हूँ, अकेला रहता हूँ, मगर तन्हा नही हूँ। अथाह जल है समन्दर में तजुर्बों का, भरा है खार जीवन का, मीठा नही हूँ। हूँ दरख्त बूढा, अब फल दे...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    रेत की दीवार पर महल बना सकता हूँ, बहते पानी पर लिखकर बता सकता हूँ। मेरे हौसलों का अहसास नहीं है तुमको, बिना पंख के भी उड़कर दिखा सकता हूँ। — अ कीर्तिवर्धन

  • गीतिका

    गीतिका

    यह रचना उन सभी महानुभावों को समर्पित जो अपने घर के झगडों को तो सुलझा नहीं पाते और किसी भी सरकार को ऐसे भाषण देंगे जैसे कि उनसे बड़ा कूटनीतिज्ञ कोई नहीं है। कभी कभी दुश्मन...

  • होली पर एक रचना

    होली पर एक रचना

    इन्द्र्धनुष के रंगों जैसा, मुझको रंग दो, होली के रंगों को, सतरंगी कर दो। राग-द्वेष, बैर-भाव, नफ़रत जड़ से मिटाकर, बासंती अवसर को, खुशियों से भर दो। हिन्दू-मुस्लिम की बात नहीं करता यारों, मानवता जन-जन के...

  • दलित और मनुवाद

    दलित और मनुवाद

    भारत में आज अनेक संकट छाये हुए हैं – भ्रष्टाचार, आतंकवाद, कट्टरवाद, धर्मांतरण, नैतिक अध : पतन, अशिक्षा, चरमरायी हुई स्वास्थ्य व्यवस्था, सफ़ाई की समस्या वगैरह – वगैरह | पर इन सभी से ज्यादा भयावह है...