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  • मुक्तक

    मुक्तक

    दिल के जख्म जमाने को दिखाया नही करते हैं, देखने के बहाने जख्मों को, लोग कुरेदा करते है| जिसने जख्म दिये है वह, हमदर्दी की बात करें, महफिल हो या तन्हाई  जज्बात से खेला करते हैं|...

  • मुक्तक

    कोई माँ बच्चे को, यूँ दूध नही पिलाती, नजर न लगे, अपने आँचल में छुपाती| होती निगाहें, बच्चे की भाव भंगिमा पर, माँ अपने जिस्म की नुमाइश नही लगाती| नही भाव ममता का, है इसकी आंख...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    अहंकार का बोझ जब, सिर पर चढने लगा, आदमी को आदमी तब, कीडे सा लगने लगा| ढोने लगा वह बोझ अपना, अपने कांधो पर यहाँ, आदमी से आदमियत का, अहसास भी घटने लगा| — अ कीर्ति...

  • ताल्लुक

    ताल्लुक

    रखना है ताल्लुक, झगडा क्यों करें हम, एक दूजे के लिये ही जीयें और मरें हम| रखना नही मतलब किसी से जब ठान लिया, वो जीयें या मरें, क्यों चिन्ता उनकी करें हम| है बहुत दुनिया...

  • गजल

    गजल

    न मकान गिरवी है, न लगान बाकी है, बस कर्ज का मुफ्त, भुगतान बाकी है| करता था मेहनत, कभी खेत में अपने, बंजर पडा है खेत, बस मचान बाकी है| हो गया आराम तलब, माफी के...

  • गजल – कुछ बोलो

    गजल – कुछ बोलो

    छप्पन ईंची सीने पर क्यों आरोप लगाते, कुछ बोलो, बोये थे पेड बबूल के, आम कहाँ से आयेंगे, कुछ बोलो? लूटा है मुल्क अभी तक जिसने, नित नये घोटाले कर, क्यों खामोश जुबां आपकी घोटालों पर,...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    खुद को खुदा समझने वाले, अहंकार में फँस जाते हैं, छोटी-छोटी बातों पर भी, गुस्से से वो लस जाते हैं। अन्धकार में दीप जलाकर, जग को रोशन करने वाले, मानवता हित जीने वाले, अक्सर खुदा सा...

  • गीतिका – बुजुर्ग

    गीतिका – बुजुर्ग

    मैं खामोश रहता हूँ, मगर गूँगा नही हूँ, अकेला रहता हूँ, मगर तन्हा नही हूँ। अथाह जल है समन्दर में तजुर्बों का, भरा है खार जीवन का, मीठा नही हूँ। हूँ दरख्त बूढा, अब फल दे...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    रेत की दीवार पर महल बना सकता हूँ, बहते पानी पर लिखकर बता सकता हूँ। मेरे हौसलों का अहसास नहीं है तुमको, बिना पंख के भी उड़कर दिखा सकता हूँ। — अ कीर्तिवर्धन